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मेडिकल दस्तावेज फाड़ने के विवाद में युवक की हत्या, मुख्य आरोपी को उम्रकैद

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सूरजपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू

शव को बोरे में भरकर बांध में फेंका, साक्ष्य छिपाने में सहयोगी बने पिता को 3 वर्ष की सजा

सूरजपुर ACGN :- लगभग पांच वर्ष पुराने बहुचर्चित हत्या प्रकरण में माननीय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सूरजपुर ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी सुखसाय उर्फ गंवटिया बरगाह को आजीवन कारावास तथा साक्ष्य छिपाने में सहयोग करने वाले महावीर बरगाह को तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार 11 सितंबर 2021 को ग्राम बलदेवनगर निवासी मनोज उरांव ने थाना प्रेमनगर में सूचना दी थी कि बांगों बांध के डुबान क्षेत्र छोटे छुरी में एक व्यक्ति का पैर पानी के ऊपर दिखाई दे रहा है। सूचना मिलने पर पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और रस्सी की सहायता से शव को पानी से बाहर निकाला। शव के गले में रस्सी बंधी हुई थी, जिससे मामला संदिग्ध प्रतीत हुआ। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।


जांच के दौरान मृतक की पहचान सुरेंद्र यादव (22 वर्ष), निवासी हनुमानगढ़, थाना रामानुजनगर के रूप में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने मृत्यु को हत्यात्मक बताया, जिसके बाद थाना प्रेमनगर में अज्ञात आरोपी के विरुद्ध हत्या एवं साक्ष्य छिपाने का मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
पुलिस जांच में सामने आया कि 5 सितंबर 2021 को सुरेंद्र यादव अपनी बहन और जीजा के घर अंबिकापुर गया था। वहां से वह अपने जीजा सुखसाय उर्फ गंवटिया बरगाह के साथ उसके पुत्र को लेने विंध्याचल गया था। अगले दिन सुखसाय अपने पुत्र के साथ वापस लौट आया, लेकिन सुरेंद्र उसके साथ नहीं था। इस संबंध में पूछताछ के दौरान आरोपी के बयान संदिग्ध पाए गए, जिसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की।


पूछताछ में खुलासा हुआ कि विंध्याचल स्थित मकान में सुरेंद्र द्वारा उसके पिता के मेडिकल दस्तावेज फाड़ दिए जाने को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी सुखसाय ने लकड़ी की पराठी से सुरेंद्र के सिर पर हमला कर दिया और बाद में रस्सी से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।
हत्या के बाद आरोपी ने अपने पिता महावीर बरगाह के साथ मिलकर शव को बोरे में भर दिया और साइकिल में रखकर छोटे छुरी बांध के डुबान क्षेत्र में ले गया। वहां शव और साइकिल में पत्थर बांधकर पानी में फेंक दिया गया ताकि घटना के साक्ष्य नष्ट किए जा सकें और पुलिस को गुमराह किया जा सके।
मामले की विवेचना तत्कालीन विवेचक उप निरीक्षक निर्मल राजवाड़े द्वारा की गई। उन्होंने घटनास्थल से प्राप्त साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को संकलित कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक रमेश सिंह कुशवाहा ने प्रभावी पैरवी की।
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश श्री मानवेन्द्र सिंह की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर न्यायालय ने मुख्य आरोपी सुखसाय उर्फ गंवटिया बरगाह को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास तथा धारा 201/34 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया। वहीं महावीर बरगाह को धारा 201/34 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
न्यायालय के इस फैसले को हत्या जैसे गंभीर अपराधों के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है, जिसमें अपराध करने के साथ-साथ साक्ष्य छिपाने वालों को भी कानून के तहत दंडित किया गया है।

प्रदीप मिश्रा
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