नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन से बाहर निकलने की जरूरत : राज्यपाल रमेन डेका
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय
स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 9,194 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, मुख्यमंत्री ने बताया सेवा और दायित्व का नया पड़ाव
रायपुर ACGN:- पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में राज्यपाल रमेन डेका ने नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस’ से बाहर निकलने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति युवाओं की सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित कर रही है और केवल कृत्रिम संतुष्टि प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है।

राज्यपाल ने कहा कि बच्चों को मोबाइल फोन की दुनिया से बाहर निकालकर खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज के बच्चे सीमित दायरे में जीवन जी रहे हैं, जिसका प्रभाव उनकी शारीरिक और मानसिक क्षमता पर भी पड़ रहा है।
समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं बल्कि समाज और मानवता के प्रति नए दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का भी महत्वपूर्ण क्षण है।

दीक्षांत समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी एवं अन्य संकायों के कुल 9 हजार 194 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 7 हजार 545 स्नातक, 1 हजार 645 स्नातकोत्तर तथा 5 सुपर स्पेशियलिटी उपाधिधारी शामिल रहे। विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से भी सम्मानित किया गया।
राज्यपाल रमेन डेका ने नवस्नातक चिकित्सकों से कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं बल्कि मानवता की सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि मरीज का हित सर्वोपरि होना चाहिए और चिकित्सकों के सफेद कोट पर कभी कोई दाग नहीं लगना चाहिए। उन्होंने पारिवारिक चिकित्सक और नेबरहुड डॉक्टर की पुरानी व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता भी बताई।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकें स्वास्थ्य सेवाओं में नई क्रांति ला रही हैं। इन तकनीकों के माध्यम से दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकती हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि नया रायपुर में 100 एकड़ क्षेत्र में अत्याधुनिक मेडिसिटी विकसित की जा रही है, जिसमें 5 हजार से अधिक बिस्तरों की सुविधा होगी। इसके अलावा रायगढ़ और सरगुजा संभाग में भी नए अस्पताल स्थापित किए जाने की दिशा में कार्य चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में 240 बिस्तरों वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू हो चुका है, जिससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में नवस्नातक चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मानव, पशु और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल के अध्यक्ष डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. के. पात्रा, विधायक पुरंदर मिश्रा सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, विद्यार्थी, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
प्रदीप मिश्रा
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