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मेंढ़ुका आंगनबाड़ी का छज्जा गिरा, विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल,

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

जर्जर भवन में चल रहा था आंगनबाड़ी केंद्र, हादसे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ACGN:- जिले के दूरस्थ आदिवासी अंचल के ग्राम मेंढ़ुका स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में छज्जा गिरने की घटना सामने आई है जिसने महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। जानकारी के अनुसार जिस केंद्र में नौनिहालों के पोषण, शिक्षा और सुरक्षा की जिम्मेदारी शासन के कंधों पर है, वहां करीब 20 बच्चों को जर्जर भवन में बैठाकर उनकी जान जोखिम में डाली जा रही थी। अचानक छज्जा भरभराकर गिर पड़ा, हालांकि संयोगवश कोई बच्चा उसकी चपेट में नहीं आया और एक बड़ा हादसा टल गया।


ग्रामीणों के अनुसार आंगनबाड़ी भवन काफी समय से जर्जर अवस्था में था। छज्जे में दरारें साफ दिखाई दे रही थीं और भवन की हालत लगातार खराब होती जा रही थी। इसके बावजूद न तो भवन की मरम्मत कराई गई और न ही बच्चों को किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों को भवन की स्थिति की जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक घटना के समय लगभग 20 बच्चे केंद्र में मौजूद थे। अचानक तेज आवाज के साथ छज्जा गिरने से अफरा-तफरी मच गई। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने तत्काल बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। कुछ सेकंड की देरी या बच्चों की स्थिति थोड़ी अलग होती तो बड़ा जनहानि वाला हादसा हो सकता था।
यह घटना दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही स्थिति किसी शहरी क्षेत्र में होती तो तत्काल कार्रवाई होती, लेकिन आदिवासी अंचलों की समस्याओं को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। शासन द्वारा बच्चों की सुरक्षा और बेहतर सुविधाओं के किए जाने वाले दावों की वास्तविकता इस घटना से उजागर हो गई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों का ध्यान जमीनी व्यवस्थाओं की बजाय अन्य प्रशासनिक विवादों और प्रक्रियाओं में अधिक दिखाई देता है। परिणामस्वरूप कई आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ग्रामीणों ने जिले के सभी आंगनबाड़ी भवनों का सर्वे कराने, जर्जर भवनों में संचालित केंद्रों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भवन की जर्जर स्थिति लंबे समय से सामने थी तो विभाग ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था या फिर बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है? मेंढ़ुका की यह घटना पूरे तंत्र की संवेदनशीलता और जवाबदेही की परीक्षा बन गई है।

प्रदीप मिश्रा
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