किसानों की आय बढ़ाने छत्तीसगढ़ में बासमती धान मिशन की तैयारी
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय
अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार की नई पहल, पायलट प्रोजेक्ट से होगी शुरुआत
रायपुर ACGN:- किसानों की आय में वृद्धि, कृषि क्षेत्र में विविधीकरण तथा प्रदेश के धान उत्पादक किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। राज्य में बासमती धान की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विकास मंत्री श्री राम विचार नेताम की अध्यक्षता में अटल नगर, नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालय, बीज निगम और इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर प्रदेश में बासमती धान उत्पादन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक में कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए नई संभावनाओं पर लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि बासमती धान की खेती किसानों को पारंपरिक धान की तुलना में अधिक लाभ दिला सकती है, क्योंकि इसकी देश और विदेश दोनों बाजारों में अच्छी मांग है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस दिशा में ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।
बैठक में यह जानकारी सामने आई कि वर्तमान समय में यूरोप, मध्य पूर्व और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बासमती एवं अन्य सुगंधित चावलों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि छत्तीसगढ़ के किसान बासमती धान उत्पादन से जुड़ते हैं तो उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकता है। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि राज्य में प्रारंभिक तौर पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बासमती धान मिशन शुरू करने पर सहमति बनी है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां की जलवायु, मिट्टी और तापमान बासमती धान उत्पादन के लिए उपयुक्त हैं। चयनित क्षेत्रों में किसानों को प्रोत्साहित कर बासमती धान का रकबा बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही खेती की वैज्ञानिक तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीज, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी ताकि किसानों को अधिकतम लाभ मिल सके।
बैठक में इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के पदाधिकारियों ने भी राज्य सरकार को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। फेडरेशन ने किसानों के लिए बायबैक व्यवस्था, विपणन सहायता और निर्यात के अवसर उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बाजार तलाशने की समस्या नहीं होगी और उन्हें उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो छत्तीसगढ़ केवल सामान्य धान उत्पादन के लिए ही नहीं बल्कि सुगंधित और उच्च गुणवत्ता वाले चावल उत्पादन के क्षेत्र में भी राष्ट्रीय पहचान बना सकता है। इससे कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, निर्यात बढ़ेगा और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
बैठक में कृषि संचालक राहुल देव, अनुसंधान संचालक डॉ. संजय त्रिपाठी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों तथा बीज निगम के अधिकारियों ने भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात तक एक समन्वित व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे किसानों को उनकी उपज का अधिकतम लाभ मिल सके।
राज्य सरकार की यह पहल किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाली मानी जा रही है। यदि बासमती धान मिशन सफलतापूर्वक लागू होता है तो यह प्रदेश के कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर। जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़।
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