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धरमजयगढ़ वन मंडल टेंडर विवाद में नया मोड़: 53 लाख की चर्चा, 10 लाख में स्वीकृत काम और उठते सवाल ठेकेदार उदय गुप्ता ने दी सफाई

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रायगढ़, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

संवाददाता:- संजय जेठवानी

ठेकेदार ने 53 लाख के काम से किया किनारा, डीएफओ ने बताया अफवाह; लेकिन सवाल अब भी बरकरार

रायगढ़ ACGN:- धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथी आवास विकास से जुड़े टेंडरों को लेकर भ्रष्टाचार के मामले में पिछले कई दिनों से चर्चाओं का दौर जारी है। 53 लाख रुपये के कार्य को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की बातें सामने आ रही हैं। इसी बीच ठेकेदार उदय कुमार गुप्ता और वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) जितेंद्र उपाध्याय के बयान सामने आने के बाद मामला और दिलचस्प हो गया है। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट की है, लेकिन कई ऐसे सवाल हैं जो अब भी जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

53 लाख रुपये के कार्य से संबंध नहीं, केवल मिट्टी कार्य तक सीमित है भूमिका

ठेकेदार उदय कुमार गुप्ता

ठेकेदार उदय कुमार गुप्ता ने स्पष्ट कहा है कि जिस 53 लाख रुपये के कार्य की चर्चा क्षेत्र में हो रही है, वह कार्य उन्हें नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि उनका संबंध केवल मिट्टी कार्य से जुड़े एक टेंडर से है। उदय गुप्ता के अनुसार उन्होंने लगभग 28 लाख रुपये के अनुमानित कार्य के लिए बोली लगाई थी और उन्हें यह कार्य लगभग 10 लाख रुपये में स्वीकृत हुआ। उन्होंने कहा कि अन्य किसी टेंडर या कार्य से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उनका नाम बेवजह विवाद में घसीटा जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर डीएफओ जितेंद्र उपाध्याय ने पूरे मामले को अफवाह बताते हुए कहा कि हाथी आवास विकास से संबंधित कार्य के लिए विधिवत टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई है। उन्होंने बताया कि उदय कंस्ट्रक्शन द्वारा कार्य लेने के बाद उनसे लिखित स्पष्टीकरण लिया गया था, जिसमें उन्होंने गुणवत्तापूर्ण कार्य करने की सहमति दी है। डीएफओ के अनुसार कार्य की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है और किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जीतेन्द्र उपाध्याय DFO धरमजयगढ़


डीएफओ ने यह भी स्पष्ट किया कि जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में उपलब्ध पत्थरों का संग्रहण विभागीय प्रक्रिया के तहत किया जाता है। पत्थर पैचिंग और अन्य तकनीकी कार्य विभाग द्वारा कराए जाते हैं, जबकि मिट्टी परिवहन जैसे कार्य निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कहीं कोई सामग्री गिरने या किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत मिलती है तो उसका नियमानुसार निराकरण किया जाएगा।

हालांकि पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही बनकर उभर रहा है कि जब किसी कार्य का मूल अनुमान लगभग 28 लाख रुपये था, तो वही कार्य मात्र 10 लाख रुपये में किस प्रकार गुणवत्तापूर्वक पूरा किया जाएगा। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि यदि कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप होता है तो यह विभाग की सफलता होगी, लेकिन यदि गुणवत्ता प्रभावित हुई तो भविष्य में यह बड़ा विवाद बन सकता है।
क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि आखिर 53 लाख रुपये वाले कार्य को लेकर भ्रम कैसे पैदा हुआ और वास्तविक रूप से वह कार्य किसे मिला। इस संबंध में अभी तक विभाग की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, जिसके कारण लोगों के बीच संशय की स्थिति बनी हुई है।
बड़ा सवाल… ?
जब 28 लाख रुपये का अनुमानित कार्य केवल 10 लाख रुपये में स्वीकृत हुआ है, तो क्या विभाग गुणवत्ता और तकनीकी मानकों से कोई समझौता किए बिना कार्य पूरा करा पाएगा, या फिर भविष्य में यह मामला और बड़ा विवाद बनेगा?
धरमजयगढ़ वन मंडल के इस टेंडर विवाद ने अब आम लोगों, जनप्रतिनिधियों और वन विभाग का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आने वाले दिनों में गुणवत्ता परीक्षण और विभागीय रिपोर्ट ही तय करेगी कि उठ रहे सवालों में कितना दम है और वास्तविकता क्या है।


प्रदीप मिश्रा
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