सुशासन तिहार के दौरान विवाद बढ़ा, सीतापुर में विधायक रामकुमार टोप्पो व समर्थकों पर नायब तहसीलदार से मारपीट का आरोप, प्रशासनिक हलकों में मचा हड़कंप
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सरगुजा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :-
अंबिकापुर कोतवाली में शिकायत दर्ज, जांच शुरू
सरगुजा ACGN:- सीतापुर क्षेत्र में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब नायब तहसीलदार और स्थानीय विधायक रामकुमार टोप्पो व उनके समर्थकों के बीच कहासुनी के बाद मारपीट और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप सामने आए। मामला अब अंबिकापुर कोतवाली पहुंच गया है और पुलिस जांच में जुटी है
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह घटना हाल ही में सुशासन तिहार से जुड़े एक प्रशासनिक/जनसंपर्क कार्यक्रम के दौरान सीतापुर क्षेत्र में हुई बताई जा रही है। इसी दौरान प्रशासनिक टीम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच किसी विषय को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ, जो बाद में बढ़कर हाथापाई तक पहुंच गया।

सूत्रों के मुताबिक कार्यक्रम स्थल पर प्रशासनिक कार्यों और स्थानीय निर्णयों को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बहस शुरू हुई। बहस इतनी बढ़ गई कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और नायब तहसीलदार के साथ धक्का-मुक्की, मारपीट तथा कपड़े फाड़ने तक के आरोप सामने आए हैं।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह विवाद ‘शोधन क्षमता प्रमाण पत्र’ (Solvency Certificate) को लेकर शुरू हुआ. नायब तहसीलदार के अनुसार, विधायक के एक समर्थक ने इस प्रमाण पत्र को जारी करने के लिए संपर्क किया था. उन्होंने बताया कि बीमार होने के कारण दो दिन कार्यालय नहीं आने के बाद बुधवार को उन्होंने काम संभाला. उसी दिन एक महिला अधूरे दस्तावेज लेकर पहुंची, जिसे उन्होंने पूरा करने को कहा. आरोप है कि बाद में दूसरी महिला तत्काल हस्ताक्षर करने का दबाव बनाने लगी, जिसे उन्होंने नियमानुसार अगले दिन तक इंतजार करने को कहा.
सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से शिकायतें दर्ज की गई हैं.उन्होंने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है उन्होंने मामले की जानकारी मिलने के बाद एसडीएम को मौके पर जांच के निर्देश दिए थे. कलेक्टर ने कहा कि पुलिस जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. जिले के प्रशासन ने स्पष्ट किया है कलेक्टर ने कहा कि जांच पूरी निष्पक्षता के साथ की जाएगी तथा जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विधायक व समर्थकों पर गंभीर आरोप
नायब तहसीलदार ने आरोप लगाया कि बाद में विधायक के निजी सहायक ने उन्हें राजापुर बुलाया, जहां विधायक अपने समर्थकों के साथ मौजूद थे. उनका कहना है कि वहां पहुंचने पर कुछ समर्थकों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार, धक्का-मुक्की और मारपीट की गई। उन्होंने यह भी कहा है कि स्थिति इस हद तक बिगड़ गई कि उनके साथ दुर्व्यवहार और कपड़े फाड़ने जैसी घटना हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक ने भी कथित रूप से उन्हें पीटा, जबकि एसडीएम के हस्तक्षेप से उनकी जान बच पाई. एसडीएम फागेश सिन्हा ने भी पुष्टि की कि नायब तहसीलदार के साथ मारपीट की घटना हुई है.प्रारंभिक जानकारी के अनुसार विवाद का कारण प्रशासनिक कार्यप्रणाली और स्थानीय स्तर पर चल रही गतिविधियों को लेकर असहमति बताया जा रहा है। हालांकि वास्तविक कारण की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी। इस संबंध में उन्होंने अंबिकापुर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
घटना के बाद नायब तहसीलदार ने अंबिकापुर कोतवाली में की लिखित शिकायत दर्ज

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में सीतापुर के भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों के खिलाफ मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया है. यह कार्रवाई राजापुर उप तहसील में पदस्थ नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी की शिकायत के आधार पर की गई है. आरोप है कि राजपुर चौराहे पर विधायक और उनके समर्थकों ने उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की. घटना के बाद कोतवाली पुलिस ने जीरो में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. इस मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं, जिससे मामला और विवादित हो गया है. प्रशासन ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है.
मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा का आरोप
कोतवाली पुलिस ने विधायक रामकुमार टोप्पो, यूसुफ, नाजिम राजा, पंकज गुप्ता सहित करीब 10 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 221, 221(1), 132 और 191(2) के तहत अपराध दर्ज किया है. शिकायत में नायब तहसीलदार तुषार मानिकपुरी ने आरोप लगाया है कि विधायक और उनके समर्थकों ने सार्वजनिक रूप से उनके साथ मारपीट की और सरकारी कार्य में बाधा डाली.शिकायत में विधायक रामकुमार टोप्पो व उनके समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सभी पक्षों के बयान लिए जा रहे हैं।

विधायक पक्ष का भी आरोप – वहीं, विधायक की चचेरी बहन सीमा धनकी ने नायब तहसीलदार पर दुर्व्यवहार, धक्का देने और अभद्र भाषा का उपयोग करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि उन्होंने 14 मई को आवेदन दिया था और कई बार कार्यालय जाने के बावजूद काम नहीं किया गया. सीमा धनकी ने दावा किया कि अधिकारी ने उनके साथ बदसलूकी की और जातिसूचक टिप्पणी भी की, जिसके चलते उन्होंने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.

कोतवाली पुलिस ने जीरो में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है और गवाहों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं. यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है.
सरगुजा एसपी राजेश अग्रवाल ने कहा है कि शिकायत की जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। वहीं पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने इस घटना को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जनचर्चा का सवाल
इस घटना ने सुशासन के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस सरकार की ओर से लगातार “सुशासन और कानून के राज” की बात की जाती है, उसी व्यवस्था में यदि एक जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी के बीच इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप और हिंसा की स्थिति सामने आती है, तो यह बेहद गंभीर संकेत माना जा रहा है। जनता के बीच यह चर्चा तेज है कि जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ही मर्यादा और अनुशासन की सीमाएं लांघेंगे तो सुशासन की परिभाषा जमीन पर कैसे लागू होगी।
जनता के सवाल
क्या जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संवाद की यह स्थिति सामान्य मानी जाएगी?
क्या इस मामले में निष्पक्ष और बिना दबाव के जांच हो पाएगी?
क्या दोष साबित होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, या मामला राजनीतिक दबाव में दब जाएगा?
और सबसे बड़ा सवाल क्या यह घटना सुशासन के दावों पर एक बड़ा सवाल नहीं खड़ा करती?
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
प्रदीप मिश्रा
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