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10 दिनों में तीसरी बार बढ़े पेट्रोल के दाम, आम आदमी की रसोई से सफर तक पड़ेगा सीधा असर, अब महंगाई दे सकती है बड़ा झटका

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नई दिल्ली

By ACGN 7647 9817119303 948009

10 दिनों में तीसरी बार बढ़े ईंधन के दाम, सब्जी, राशन, किराया और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी की आशंका

देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वेस्ट एशिया संकट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच तेल कंपनियों ने एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। पेट्रोल में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बड़ी वृद्धि है, जिससे अब तक ईंधन करीब 5 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है।
नई दरों के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल 99.51 रुपये और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। मुंबई में पेट्रोल 108.49 रुपये और डीजल 95.02 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 110.64 रुपये तथा डीजल 97.02 रुपये प्रति लीटर हो चुका है। चेन्नई में पेट्रोल 105.31 रुपये और डीजल 96.98 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहनों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा प्रभाव हर घर की रसोई और आम जरूरतों पर पड़ता है। डीजल महंगा होने से ट्रकों और मालवाहक वाहनों का खर्च बढ़ जाता है, जिससे सब्जियां, दूध, अनाज, फल, सीमेंट, सरिया और रोजमर्रा के सामान महंगे होकर बाजार तक पहुंचते हैं। इसका सीधा बोझ उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।
परिवहन क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि डीजल महंगा होने के बाद बस किराए, ऑटो किराए और माल ढुलाई दरों में भी वृद्धि हो सकती है। इससे स्कूल बस शुल्क, ऑनलाइन डिलीवरी चार्ज और यात्राओं का खर्च बढ़ने की संभावना है। किसानों पर भी इसका असर पड़ेगा क्योंकि ट्रैक्टर, पंप और कृषि परिवहन में डीजल की बड़ी भूमिका होती है।
गृहिणियों का कहना है कि पहले से ही रसोई गैस, खाद्य तेल और दालों की बढ़ती कीमतों के बीच पेट्रोल-डीजल की नई बढ़ोतरी ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। मध्यम वर्ग और मजदूर वर्ग के लिए अब रोजमर्रा का खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
आर्थिक जानकारों के मुताबिक वेस्ट एशिया में ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। मिडिल ईस्ट से तेल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण आने वाले दिनों में कीमतों में और उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।
तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के कारण धीरे-धीरे ईंधन दरों में संशोधन किया जा रहा है, ताकि एक साथ बड़ा बोझ उपभोक्ताओं पर न पड़े। हालांकि आम जनता का कहना है कि लगातार छोटी-छोटी बढ़ोतरी मिलकर बड़ी महंगाई में बदल रही है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले समय में खाद्य पदार्थों, परिवहन और निर्माण सामग्री की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, जिससे महंगाई का असर आम आदमी के जीवन पर और गहरा पड़ेगा।

प्रदीप मिश्रा
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