छत्तीसगढ़ में चाय खेती की संभावनाओं को लेकर बढ़ी चर्चा
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
राज्यपाल रमेन डेका और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच चाय उद्योग विस्तार एवं रोजगार के अवसरों पर हुई विस्तृत चर्चा
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ में चाय खेती और चाय उद्योग के विस्तार को लेकर नई संभावनाओं पर चर्चा उस समय सामने आई, जब राज्यपाल श्री रमेन डेका से लोकभवन में छत्तीसगढ़ चाय व्यापारी संघ एवं छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष श्री महेंद्र कुमार बागड़ोदिया ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान प्रदेश में चाय उत्पादन, चाय उद्योग के विस्तार और उससे जुड़े आर्थिक अवसरों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
लोकभवन में हुई इस मुलाकात के दौरान श्री महेंद्र कुमार बागड़ोदिया ने राज्यपाल को चाय उद्योग में अपने लंबे अनुभव की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे वर्ष 1964 से कोलकाता की टी इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं और कई दशकों से चाय व्यापार के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में वे रायपुर में चाय व्यापार से जुड़े हैं तथा छत्तीसगढ़ में इस क्षेत्र की संभावनाओं पर लगातार कार्य कर रहे हैं।
चर्चा के दौरान श्री बागड़ोदिया ने राज्यपाल के समक्ष छत्तीसगढ़ में चाय खेती की संभावनाओं को लेकर अपने सुझाव रखे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में जलवायु, तापमान और प्राकृतिक परिस्थितियां ऐसी हैं, जहां चाय उत्पादन को लेकर संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। यदि इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जाए तो यह न केवल कृषि क्षेत्र बल्कि स्थानीय रोजगार, लघु उद्योग और व्यापार के लिए भी नए अवसर खोल सकता है।
राज्यपाल श्री रमेन डेका, जो स्वयं असम जैसे चाय उत्पादन के लिए प्रसिद्ध राज्य से आते हैं, उन्होंने भी इस विषय पर गंभीरता से चर्चा की। मुलाकात के दौरान असम के चाय बागानों की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी चाय उद्योग विकसित करने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
राज्यपाल ने कहा कि चाय केवल एक पेय पदार्थ का व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह कृषि, उद्योग, रोजगार और निर्यात से जुड़ा एक बड़ा आर्थिक क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से इस दिशा में पहल की जाए तो भविष्य में यह प्रदेश के किसानों और युवाओं के लिए लाभकारी साबित हो सकता है। उन्होंने इस विषय में संभावनाओं का अध्ययन कर आवश्यक मार्गदर्शन देने की बात भी कही।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल छत्तीसगढ़ में बड़े स्तर पर चाय खेती नहीं होती, लेकिन उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान कर वैज्ञानिक तरीके से प्रयोग शुरू किए जाएं तो आने वाले समय में यह प्रदेश के लिए एक नया कृषि विकल्प बन सकता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी नई फसल मॉडल को अपनाने से पहले मिट्टी, तापमान, वर्षा और बाजार की संभावनाओं का गहन अध्ययन आवश्यक होता है।
व्यापार जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि छत्तीसगढ़ में चाय खेती को लेकर व्यवहारिक स्तर पर अध्ययन और पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाते हैं तो इससे किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा वैकल्पिक आय का नया साधन भी मिल सकता है।
लोकभवन में हुई इस मुलाकात को व्यापार और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोग संभावनाओं की शुरुआती पहल के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल यह विचार-विमर्श का प्रारंभिक चरण है, लेकिन चाय उद्योग जैसे बड़े क्षेत्र को लेकर शुरू हुई चर्चा ने निश्चित रूप से उत्सुकता बढ़ा दी है।
प्रदीप मिश्रा
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