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फास्ट फूड और तनाव बना रहे युवाओं को फैटी लिवर का शिकार, डॉक्टरों ने जताई चिंता

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

संवाददाता :- अरविन्द तिवारी

20 से 40 वर्ष के युवाओं में तेजी से बढ़ रहा मेटाबॉलिक रोग, जीवनशैली को बताया मुख्य कारण

रायपुर ACGN :- राजधानी रायपुर में विशेषज्ञ चिकित्सक ने युवाओं में तेजी से बढ़ रहे फैटी लिवर के मामलों पर चिंता जताई है। डॉक्टर शुभम भेंडारकर ने कहा कि बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड का अधिक सेवन और तनाव के कारण आज 20 से 40 वर्ष आयु वर्ग के युवा बड़ी संख्या में मेटाबॉलिक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
डॉ. शुभम भेंडारकर ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में गैर-संचारी रोगों का बोझ तेजी से बढ़ा है और यह अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय शरीर संरचना में मांसपेशियों की मात्रा अपेक्षाकृत कम और आंतरिक वसा अधिक होने के कारण सामान्य वजन वाले लोग भी फैटी लिवर जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, जिसे चिकित्सा भाषा में “थिन फैट इंडिया” कहा जाता है।
उन्होंने समझाया कि टाइप-2 डायबिटीज और फैटी लिवर एक ही मेटाबॉलिक गड़बड़ी के दो रूप हैं, जिसमें अत्यधिक रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और निष्क्रिय जीवनशैली के कारण लीवर में फैट जमा होता है और धीरे-धीरे इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति पैदा होती है। इसके बाद शरीर में ब्लड शुगर और अन्य जटिलताएं बढ़ने लगती हैं।
डॉक्टर के अनुसार शुरुआती अवस्था में यह बीमारी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के आगे बढ़ती है, इसलिए समय रहते जांच और पहचान बेहद जरूरी है। गर्दन और शरीर के कुछ हिस्सों पर त्वचा का काला पड़ना तथा पेट के आसपास बढ़ी चर्बी इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
डॉ. भेंडारकर ने कहा कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह स्थिति आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज, लीवर सिरोसिस, किडनी फेलियर और हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
फैटी लिवर से बचाव के उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार युवाओं को अपने खानपान और जीवनशैली में सुधार करना चाहिए। तला-भुना और फास्ट फूड कम करना, नियमित व्यायाम करना, वजन नियंत्रित रखना, मीठे पेय से बचना, अधिक पानी पीना और हरी सब्जियों व फाइबर युक्त आहार को अपनाना जरूरी है। साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच भी आवश्यक बताई गई है।
डॉक्टर ने कहा कि यदि जीवनशैली में सुधार किया जाए तो फैटी लिवर जैसी बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित और रोका जा सकता है।

प्रदीप मिश्रा
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