बैलगाड़ी से शुरू हुआ सफर, आज हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहीं सुखिया वर्मा
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता:- अनादि पांडेय
संघर्ष, मेहनत और हौसले से लिखी सफलता की कहानी, 4000 से अधिक लोगों को सिखाई ड्राइविंग और 500 से ज्यादा को दिलाया रोजगार
रायपुर ACGN:- आज शहरों की सड़कों पर महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ वाहन चलाते देखना सामान्य बात लगती है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब महिलाओं का स्टीयरिंग संभालना समाज के लिए आश्चर्य माना जाता था। ऐसे दौर में रायपुर की सुखिया वर्मा ने न सिर्फ खुद वाहन चलाना सीखा, बल्कि हजारों लोगों को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाकर समाज में एक नई मिसाल कायम की।
महतारी गौरव वर्ष के अवसर पर सुखिया वर्मा की संघर्ष और सफलता से भरी कहानी आज महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी सुखिया की शादी महज 22-23 वर्ष की उम्र में हो गई थी। गांव में रहते हुए वे बैलगाड़ी चलाया करती थीं। उस समय शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि यही सफर एक दिन उन्हें ड्राइविंग स्कूल संचालक बना देगा।

शादी के बाद परिवार और खेती-किसानी के कामों के बीच उन्होंने ट्रैक्टर चलाना सीखा। धीरे-धीरे उनके मन में गाड़ी चलाने और दूसरों को सिखाने का विचार आया। हालांकि उस समय महिलाओं का वाहन चलाना समाज में सहज रूप से स्वीकार नहीं किया जाता था। लोगों की बातें और ताने भी सुनने पड़े, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने हौसले को कमजोर नहीं पड़ने दिया।
संघर्ष के शुरुआती दिनों में उन्होंने अस्पताल की एंबुलेंस भी चलाई। करीब चार वर्षों तक वे मरीजों को अस्पताल लाने और ले जाने का काम करती रहीं। रात के दो बजे भी यदि किसी मरीज के लिए फोन आता, तो वे बिना डरे मदद के लिए निकल पड़ती थीं। लोगों की सेवा और मदद करने का जज्बा उन्हें अपने काम से और ज्यादा जोड़ता गया।

ड्राइविंग स्कूल शुरू करने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। तब उन्होंने अपने खेत की जमीन गिरवी रखकर मारुति 800 खरीदी। यही छोटी सी गाड़ी उनके बड़े सपनों की शुरुआत बनी। उन्होंने सड़कों पर ही लोगों को गाड़ी चलाने का प्रशिक्षण देना शुरू किया। उनका मानना है कि सीधे सड़क पर वाहन चलाने से डर जल्दी खत्म होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
सुखिया वर्मा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए ड्राइविंग सीखने के लिए लगातार प्रेरित करती हैं। वे कहती हैं कि महिलाओं के लिए वाहन चलाना सीखना आत्मनिर्भरता की महत्वपूर्ण सीढ़ी है। जरूरतमंद महिलाओं को वे कई बार बिना फीस लिए केवल फ्यूल खर्च पर ही प्रशिक्षण देती हैं, ताकि आर्थिक तंगी किसी के सपनों के बीच बाधा न बने।
आज वे 4000 से अधिक महिलाओं और पुरुषों को ड्राइविंग सिखा चुकी हैं। उनके माध्यम से 500 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिल चुका है। कई महिलाएं और पुरुष अलग-अलग जगहों पर ड्राइवर के रूप में काम कर रहे हैं, वहीं कई लोगों ने खुद का वाहन चलाकर अपना रोजगार शुरू किया है।
ड्राइविंग स्कूल से हुई कमाई से उन्होंने अपने परिवार को संभाला, तीनों बेटियों की शादी की और घर की जिम्मेदारियां निभाईं। सुखिया मानती हैं कि उनकी इस पूरी यात्रा में परिवार का सहयोग उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा। उनके पति, बच्चों और ससुर ने हर कदम पर उनका साथ दिया, जिसके कारण कठिन परिस्थितियों में भी वे कभी रुकी नहीं।
आज सुखिया वर्मा की कहानी सिर्फ एक महिला की सफलता नहीं, बल्कि उन हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो कुछ नया करना चाहती हैं, लेकिन परिस्थितियों और समाज के डर से पीछे हट जाती हैं। बैलगाड़ी से शुरू हुआ उनका यह सफर आज आत्मनिर्भरता, मेहनत और हौसले की ऐसी मिसाल बन चुका है, जो समाज को यह संदेश देता है कि अगर आत्मविश्वास और परिवार का साथ हो, तो कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं होती।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबरों तथा जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल — अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ (ACGN)।
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