केंद्र-राज्य समन्वय की मिसाल: बस्तर बैठक में विकास और सुशासन पर चर्चा
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बस्तर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक: नक्सलमुक्त भारत के बाद विकास और सुशासन पर केंद्रित रहा एजेंडा
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ के बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने की। बैठक में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में देश के नक्सलमुक्त होने के ऐतिहासिक अवसर को लेकर विशेष चर्चा की गई। गृह मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुरक्षा बलों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि यह देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।

बैठक में गृह मंत्री ने कहा कि अब पूरा बस्तर क्षेत्र नक्सलमुक्त हो चुका है, जो सुरक्षा बलों, खुफिया एजेंसियों और केंद्र एवं राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में “Whole of the Government Approach” के तहत विकास कार्यों को तेज गति से आगे बढ़ाया गया है और आगे भी यह अभियान जारी रहेगा।
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलमुक्त क्षेत्रों का वास्तविक विकास तब तक पूरा नहीं माना जा सकता जब तक वे देश के अन्य विकसित क्षेत्रों के समकक्ष नहीं आ जाते। उन्होंने यह भी कहा कि यह क्षेत्र अब न केवल नक्सलमुक्त हुआ है बल्कि विवादमुक्त भी हो चुका है, जो संघीय व्यवस्था की एक बड़ी उपलब्धि है।

बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित चारों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
गृह मंत्री ने क्षेत्रीय परिषदों की बढ़ती प्रभावशीलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 2004-2014 की तुलना में 2014 के बाद बैठकों की संख्या और मुद्दों के समाधान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि अब तक 80 प्रतिशत से अधिक मुद्दों का समाधान किया जा चुका है, जिससे केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय और मजबूत हुआ है।

उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के दूसरे चरण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि हर घर तक नल से जल पहुंच सके। साथ ही स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, वित्तीय समावेशन और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में और तेजी से कार्य करने की जरूरत है।
गृह मंत्री ने कुपोषण के खिलाफ संयुक्त लड़ाई, स्कूल ड्रॉपआउट दर में कमी, शिक्षा गुणवत्ता सुधार, तथा POCSO और गंभीर अपराधों में शत-प्रतिशत दोषसिद्धि सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय पर DNA जांच और त्वरित न्याय प्रणाली से अपराधों में प्रभावी नियंत्रण संभव है।
उन्होंने राज्यों को 1930 साइबर हेल्पलाइन को और अधिक मजबूत बनाने तथा लंबित आपराधिक मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतों के गठन का सुझाव दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि मिलावटखोरी के मामलों में कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ दोषियों की सार्वजनिक पहचान भी आवश्यक है।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में लागू नई संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ वर्ष 2029 तक हर आपराधिक मामले को समयबद्ध रूप से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए।
बैठक को भारत में संघीय ढांचे को मजबूत करने, नक्सल उन्मूलन के बाद विकास की नई दिशा तय करने और केंद्र-राज्य समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
प्रदीप मिश्रा (संपादक)
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