ओड़िशा में बढ़ रहे लापता बच्चों के मामले, 2024 में 6 हजार से अधिक बच्चे गायब
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भुवनेश्वर, ओड़िशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजया नंद जी महाराज
एनसीआरबी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, लापता बच्चों में 87 प्रतिशत लड़कियां शामिल
भुवनेश्वर, ACGN:- राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानी एनसीआरबी की ताजा “क्राइम इन इंडिया 2024” रिपोर्ट ने ओड़िशा में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 के दौरान राज्य में 18 वर्ष से कम आयु के कुल 6 हजार 223 बच्चे लापता हुए, जिनमें लगभग 87 प्रतिशत लड़कियां शामिल हैं। यह आंकड़ा वर्ष 2023 में दर्ज 5 हजार 938 मामलों की तुलना में करीब 4.8 प्रतिशत अधिक बताया गया है।
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले पांच वर्षों में राज्य में लापता बच्चों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2020 में जहां 2 हजार 899 बच्चों के लापता होने के मामले सामने आए थे, वहीं अब यह संख्या दोगुने से भी अधिक बढ़ चुकी है। आंकड़ों के अनुसार पांच वर्षों में मामलों में 114 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे बाल अधिकार संगठनों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2023 के अंत तक ओड़िशा में 7 हजार 272 बच्चे अब भी लापता और अनट्रेस्ड थे। वर्ष 2024 के नए मामलों को जोड़ने के बाद राज्य में कुल लापता और अनट्रेस्ड बच्चों की संख्या बढ़कर 13 हजार 495 तक पहुंच गई है।
हालांकि वर्ष 2024 के दौरान चलाए गए बचाव अभियानों में 3 हजार 566 बच्चों को खोज निकाला गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लड़कियों की तुलना में अधिक लड़कों का पता लगाया जा सका। बाल संरक्षण विशेषज्ञों ने किशोरियों के मानव तस्करी, जबरन विवाह, यौन शोषण, घरेलू दासता और पलायन जैसे गंभीर खतरों में फंसने की आशंका जताई है।

यह मुद्दा मार्च में आयोजित ओड़िशा विधानसभा सत्र में भी जोर-शोर से उठा था। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सदन को जानकारी देते हुए बताया था कि वर्ष 2024 में 6 हजार 838 बच्चे लापता हुए, जबकि वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 8 हजार 206 तक पहुंच गई। बचाव अभियानों के तहत वर्ष 2024 में 5 हजार 942 और वर्ष 2025 में 6 हजार 36 बच्चों को खोजा गया।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2024 के दौरान ओड़िशा में बच्चों के अपहरण के कुल 6 हजार 815 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग की 6 हजार 208 लड़कियां शामिल थीं। लगातार बढ़ते मामलों ने राज्य में बाल सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रदीप मिश्रा
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