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हसदेव अरण्य में नई कोयला खदान पर बढ़ा विवाद, टीएस सिंहदेव ने FAC बैठक से पहले उठाए बड़े सवाल

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सरगुजा, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को वन स्वीकृति देने के विरोध में पूर्व उप मुख्यमंत्री ने उठाए पर्यावरण और ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण के मुद्दे

सरगुजा ACGN:- हसदेव अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को लेकर एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और पर्यावरणीय बहस तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ के पूर्व उप मुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव ने केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (FAC) की बैठक से पहले इस परियोजना पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए वन स्वीकृति निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस परियोजना से लाखों पेड़ों की कटाई होगी और इसका असर पूरे हसदेव अरण्य क्षेत्र की जैव विविधता, जल स्रोतों और पर्यावरण पर पड़ेगा।


टीएस सिंहदेव ने बताया कि राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित और अदानी के एमडीओ वाले केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को वन स्वीकृति देने पर आज नई दिल्ली में FAC की बैठक में विचार होना है। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना के लिए करीब 1742 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग किया जाएगा, जिससे लगभग सात लाख पेड़ काटे जाएंगे। उनका कहना है कि यह क्षेत्र घने और समृद्ध जंगलों का हिस्सा है तथा यहां खनन होने से हसदेव नदी और बांगो जलाशय पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा।


पूर्व उप मुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव ने कहा कि उन्होंने FAC सदस्यों को फोन कॉल, ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से दस्तावेज भेजकर रामगढ़ पहाड़ियों और वहां स्थित ऐतिहासिक गुफाओं के संरक्षण की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट में रामगढ़ पहाड़ियों की दूरी खदान क्षेत्र से वास्तविकता से अधिक बताई गई है, जबकि खनन गतिविधियों के कारण पहाड़ियों में दरारें आने की बात सामने आ चुकी है। उनका कहना है कि यदि खनन को अनुमति दी गई तो प्राचीन गुफाएं और मंदिरों को नुकसान पहुंच सकता है।


उन्होंने भारतीय वन्यजीव संस्थान भारतीय वन्यजीव संस्थान और ICFRE की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि इन संस्थाओं ने हसदेव अरण्य क्षेत्र के कई हिस्सों को “नो गो एरिया” घोषित करने की सिफारिश की थी। सिंहदेव के अनुसार केते एक्सटेंशन क्षेत्र चोरनाई वाटरशेड का हिस्सा है, जो हसदेव नदी के लिए बेहद महत्वपूर्ण जलग्रहण क्षेत्र माना जाता है। इसके बावजूद यहां खनन की अनुमति देने की प्रक्रिया जारी है।


उन्होंने यह भी कहा कि यह इलाका हाथियों के प्राकृतिक आवास और लेमरू हाथी अभ्यारण्य के बफर जोन में आता है। उनके मुताबिक वर्ष 2014 के बाद इस क्षेत्र में मानव और हाथी संघर्ष की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। साथ ही उन्होंने 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित उस सर्वसम्मत प्रस्ताव का भी जिक्र किया, जिसमें हसदेव अरण्य क्षेत्र में नई कोयला खदानों का विरोध किया गया था।

PEKB खदान

टीएस सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ वन विभाग ने भी सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में यह उल्लेख किया है कि वर्तमान में संचालित PEKB खदान में पर्याप्त कोयला भंडार उपलब्ध है, जिससे आने वाले लगभग 20 वर्षों तक बिजली संयंत्रों की जरूरत पूरी की जा सकती है। ऐसे में नई खदान शुरू करने की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण, वन्यजीव और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए FAC को इस परियोजना पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और हसदेव अरण्य क्षेत्र को बचाने के लिए आवश्यक निर्णय लेना चाहिए।

प्रदीप मिश्रा
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