आदिवासियों की जमीन कब्जाने के विरोध में किसान सभा का प्रदर्शन, प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
पतरापाली के आदिवासी किसानों ने बेनामी जमीन सौदों और बेदखली की आशंका को लेकर उठाई आवाज
कोरबा ACGN:- कोरबा जिले के भैसमा तहसील अंतर्गत ग्राम पतरापाली में आदिवासी किसानों की जमीन पर कथित कब्जे और बेनामी खरीद-फरोख्त के विरोध में शुक्रवार को छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया गया। तानसेन चौक से रैली निकालकर बड़ी संख्या में ग्रामीणों और किसान सभा कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा की मांग उठाई।

प्रदर्शन का नेतृत्व छत्तीसगढ़ किसान सभा ने किया, जो अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध संगठन है। प्रदर्शन के दौरान डिप्टी कलेक्टर टी आर भारद्वाज ने किसानों की समस्याएं सुनीं और मामले की जांच के लिए गांव में शिविर लगाने का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ गैर-आदिवासी लोग गांव में पहुंचकर उनकी कृषि भूमि को अपना बता रहे हैं और पुराने पंजीयन दस्तावेज दिखाकर जमीन खाली करने का दबाव बना रहे हैं। किसानों का कहना है कि वे पीढ़ियों से अपनी जमीन पर खेती करते आ रहे हैं और आज भी भूमि पर उनका कब्जा है, लेकिन पिछले कुछ समय से बाहरी लोगों द्वारा बेदखली की धमकियां दी जा रही हैं।

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि गांव के अधिकांश आदिवासी या तो निरक्षर हैं या कम पढ़े-लिखे हैं, जिसका फायदा उठाकर कथित तौर पर वर्षों पहले उनकी जमीनों के फर्जी सौदे किए गए। किसानों के अनुसार वर्ष 1990 के आसपास जमीन खरीदी जाने का दावा किया जा रहा है, जबकि संबंधित परिवार आज भी उसी भूमि पर निवास और खेती कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में एक मामले में एक गैर-आदिवासी व्यक्ति ने दो सगे भाइयों मंगल सिंह और भूखन लाल की जमीन पर घेरा डालकर कब्जा कर लिया, जिसके बाद पूरे गांव में भय का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो कई आदिवासी परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन से बेदखल हो सकते हैं।
किसान सभा के पदाधिकारियों ने बताया कि इससे पहले भी इसी तरह के मामलों में न्यायालय द्वारा आदिवासियों के पक्ष में फैसला दिया जा चुका है। संगठन का कहना है कि आदिवासी भूमि का गैर-आदिवासियों को अंतरण कानूनन प्रतिबंधित है और इस प्रकार के सभी सौदों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान किसान सभा और सीटू नेताओं ने प्रशासन से पूरे क्षेत्र में शिविर लगाकर वास्तविक भूमि स्वामित्व का सत्यापन कराने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि आदिवासी किसानों के पक्ष में सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदीप मिश्रा
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