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शादी या सामाजिक प्रतिस्पर्धा: दिखावे में डूबते रिश्तों पर गंभीर सवाल

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बलांगीर, ओडिशा

By ACGN 7647981711, 9303948009

भव्य शादियों की चमक के पीछे छिपा आर्थिक दबाव और कमजोर होते संस्कार

बलांगीर। उत्कल प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय मीडिया प्रभारी एवं पत्रकार पवन अग्रवाल ने वर्तमान समय में बदलते विवाह स्वरूप पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि आज शादियां एक पवित्र पारिवारिक संस्कार से अधिक सामाजिक प्रतिस्पर्धा और दिखावे का माध्यम बनती जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में भव्यता और आडंबर ने रिश्तों की सच्चाई को पीछे धकेल दिया है। सोशल मीडिया के प्रभाव के चलते गोदभराई, रिंग सेरेमनी, महिला संगीत, मेहंदी और हल्दी जैसे पारंपरिक आयोजन अब सादगी से हटकर खर्चीले आयोजनों में बदल गए हैं। जो रस्में कभी घर के आंगन में सरलता से संपन्न होती थीं, वे आज महंगे होटलों और भारी-भरकम बजट की “अनिवार्यता” बन चुकी हैं।
पवन अग्रवाल ने विशेष रूप से मध्यमवर्गीय परिवारों की स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि सामाजिक प्रतिष्ठा बनाए रखने की होड़ में लोग अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी कुछ घंटों के आयोजनों में खर्च कर देते हैं। इस दिखावे की अंधी दौड़ का परिणाम अक्सर कर्ज और मानसिक तनाव के रूप में सामने आता है।
उन्होंने कहा कि रिश्तों की वास्तविक मजबूती भव्य आयोजनों में नहीं, बल्कि कठिन समय में साथ निभाने में होती है। ऐसे में समाज को अपनी सोच बदलने की आवश्यकता है।
पवन अग्रवाल ने सुझाव दिया कि विवाह में फिजूलखर्ची को रोककर उस धन का उपयोग बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने में किया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा के लिए बचत, सुरक्षित निवेश जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट और सादगीपूर्ण या सामूहिक विवाह को बढ़ावा देने की बात कही, जिससे आर्थिक बोझ कम हो और सामाजिक संतुलन बना रहे।
उन्होंने अंत में कहा कि अब समय आ गया है कि समाज दिखावे से ऊपर उठकर रिश्तों की गहराई, सादगी और आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दे, क्योंकि रिश्ते भव्यता से नहीं, बल्कि सच्चे साथ और विश्वास से मजबूत होते हैं।

प्रदीप मिश्रा, देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय समाचार नेटवर्क ACGN

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