प्रबंधन पर कार्रवाई,शिक्षा सुविधाओं को लेकर भी सरकार से की मांग के साथ आदिवासी परिषद का ज्ञापन,
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कोरबा (छत्तीसगढ़)
By ACGN | 7647981711, 9303948009
राज्यपाल–मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, अजगरबहार में आवासीय विद्यालय और मोरगा में बालिका छात्रावास की मांग तेज
छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद, जिला शाखा कोरबा ने एक साथ कई जनहित के मुद्दों को उठाते हुए प्रशासन के सामने सशक्त तरीके से अपनी बात रखी है। परिषद ने जहां एक ओर पावर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी ओर आदिवासी अंचलों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ठोस पहल की जरूरत पर जोर दिया है।

परिषद द्वारा प्रदेश के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर कोरबा को सौंपे गए ज्ञापन में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कंपनी की कार्यप्रणाली से क्षेत्र के ग्रामीणों और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ा है, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ है। परिषद का कहना है कि इस तरह की परिस्थितियों में केवल प्रशासनिक जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोषी प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई आवश्यक है, ताकि जवाबदेही तय हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में भी इस प्रकार की घटनाओं के कारण जनहानि और पर्यावरणीय क्षति के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। परिषद ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और संबंधित अधिकारियों एवं प्रबंधन के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएं।

इसके साथ ही परिषद ने शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है। आदिवासी परियोजना प्रशासक, कोरबा को सौंपे गए अलग ज्ञापन में तहसील मुख्यालय अजगरबहार में सर्वसुविधायुक्त आवासीय विद्यालय खोलने की मांग की गई है। परिषद का तर्क है कि यह क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य और वनांचल होने के कारण शिक्षा की आधुनिक सुविधाओं से अब भी वंचित है। यहां के बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए दूरस्थ शहरों की ओर पलायन करना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है।
परिषद ने यह भी रेखांकित किया कि यदि स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण आवासीय विद्यालय की स्थापना की जाती है, तो न केवल बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलेगी बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास को भी गति मिलेगी।
इसी क्रम में मोरगा क्षेत्र के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक बालिका छात्रावास की मांग भी उठाई गई है। परिषद के अनुसार, छात्रावास की कमी के कारण विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा प्रभावित होती है, क्योंकि उन्हें दूर-दराज के क्षेत्रों में जाकर पढ़ाई करने में कई सामाजिक और भौगोलिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यदि छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, तो बालिकाओं की शिक्षा को निरंतरता मिलेगी और ड्रॉपआउट दर में भी कमी आएगी।

परिषद ने अपने ज्ञापन में यह स्पष्ट किया है कि इन सभी मांगों का उद्देश्य केवल समस्याओं को उजागर करना नहीं, बल्कि उनके समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाना है। संगठन ने प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि इन मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन गंभीर मुद्दों पर क्या रुख अपनाता है और क्या परिषद की मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाता है।
जनहित से जुड़े इन मुद्दों पर कार्रवाई की उम्मीद के साथ ज्ञापन सौंपा गया है।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और जनहित में समर्पित पत्रकारिता अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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