राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अपमान पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ममता बनर्जी को लिखा कड़ा पत्र
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवैधानिक मर्यादाओं के सम्मान पर जोर, आदिवासी समाज और मातृशक्ति के सम्मान का उठाया मुद्दा
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ हाल ही में हुए व्यवहार पर गहरी आपत्ति जताई है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा है कि जनजातीय समाज से आने वाली देश की पहली महिला राष्ट्रपति के साथ हुआ यह व्यवहार केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था, आदिवासी समाज और मातृशक्ति का भी अपमान है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने पत्र में कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराएं और शिष्टाचार पूरी दुनिया में सम्मानित रहे हैं। मतभेद को कभी भी मनभेद में नहीं बदलने की हमारी संस्कृति रही है, लेकिन राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद के प्रति न्यूनतम शिष्टाचार का भी पालन न किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से ठीक पहले एक जनजातीय समाज से आने वाली महिला राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं में लापरवाही और उनका अपमान किया जाना अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस घटना से देश के करोड़ों आदिवासियों, पिछड़ों, दलितों और मातृशक्ति की भावनाएं आहत हुई हैं।
मुख्यमंत्री साय ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि यह पहली बार है जब किसी राज्य सरकार के व्यवहार को लेकर स्वयं राष्ट्रपति को अपनी पीड़ा सार्वजनिक करनी पड़ी है, जो देश के लोकतांत्रिक इतिहास में चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं पश्चिम बंगाल जैसे प्रतिष्ठित राज्य की छवि को भी प्रभावित करती हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में संदेशखाली की घटनाओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वहां जनजातीय समाज की महिलाओं के साथ हुई घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया था। उन्होंने कहा कि वंचित और जनजातीय समाज के साथ इस प्रकार का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ममता बनर्जी से आग्रह किया है कि वे इस विषय पर देश और समाज से क्षमा मांगते हुए अपनी भूल स्वीकार करें और भविष्य में लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा संवैधानिक पदों के प्रति सम्मान बनाए रखने के लिए देश को आश्वस्त करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था का प्रतीक हैं और उनके सम्मान से ही लोकतंत्र की गरिमा जुड़ी हुई है, इसलिए किसी भी राजनीतिक मतभेद से ऊपर उठकर संवैधानिक पदों का सम्मान किया जाना चाहिए। 🇮🇳
प्रदीप मिश्रा
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