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25 साल पुराने खेल मैदान पर आखिर क्या बन रहा है? दिव्य बच्चों को लेकर जनदर्शन पहुंची शिक्षिकाएं, उठे कई सवाल

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009


कोरबा के विशेष बच्चों के लिए महत्वपूर्ण दिव्य ज्योति विद्यालय के मैदान पर निर्माण को लेकर असमंजस, जमीन शासकीय है तो जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं?

कोरबा ACGN:- कोरबा जिले के कलेक्टर कार्यालय के पीछे डिंगापुर स्थित दिव्य ज्योति विशेष विद्यालय एवं छात्रावास विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा, देखभाल, शारीरिक विकास और पुनर्वास से जुड़ा संस्थान है। यहां मूक-बधिर एवं दृष्टिबाधित सहित करीब 100 विशेष बच्चे अध्ययनरत बताए जा रहे हैं।

विद्यालय से जुड़े लोगों के अनुसार बच्चों के खेल, शारीरिक व्यायाम और पुनर्वास गतिविधियों के लिए परिसर की जिस भूमि का उपयोग किया जा रहा है, वह करीब 25 वर्षों से बच्चों के काम आ रही है। ऐसे में इस मैदान पर निर्माण को लेकर अब बच्चों, विद्यालय और संस्था से जुड़े लोगों में चिंता है।

इन विशेष बच्चों के खेल मैदान को बचाने की मांग को लेकर रोटरी क्लब ऑफ कोरबा एवं इनर व्हील एजुकेशन सोसायटी, कोरबा द्वारा जिला प्रशासन के समक्ष लगातार गुहार लगाई जा रही है।

इस संबंध में रोटरी क्लब ऑफ कोरबा द्वारा मंत्री लखनलाल देवांगन को तथा इनर व्हील एजुकेशन सोसायटी द्वारा 11 सितंबर 2026 को जिला कलेक्टर को लिखित आवेदन दिया गया था। संस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि आवेदन के बाद मामले को देखने और जानकारी देने का आश्वासन मिला, लेकिन करीब एक माह बीत जाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई।


इसी बीच आज जब विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं विशेष बच्चों को लेकर जनदर्शन में आवेदन देने कलेक्ट्रेट पहुंचे तो कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद जिला शिक्षा अधिकारी ने उन्हें रोककर बच्चों को साथ लाने का कारण पूछा। शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बताया कि बच्चों के खेल मैदान में निर्माण कार्य किया जा रहा है, लेकिन संस्था को इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। पूछताछ करने पर ठेकेदार द्वारा भी निर्माण के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी जाती। उन्होंने बताया कि रात के समय भी निर्माण कार्य किया जा रहा है और बच्चों के खेल मैदान को लेकर चिंता जताने पर ठेकेदार कथित रूप से कहता है कि बच्चों को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी उसकी नहीं होगी, संस्था अपनी जिम्मेदारी संभाले और वह अपना काम करता रहेगा।


शिक्षक-शिक्षिकाओं ने जिला शिक्षा अधिकारी को यह भी बताया कि खेल मैदान को बचाने के लिए पहले आवेदन और आग्रह किया जा चुका है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण अब बच्चों को साथ लेकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखने पहुंचे हैं। शिक्षक-शिक्षिकाओं के अनुसार पूर्व में दिए गए आवेदन की बात सामने आने पर जिला शिक्षा अधिकारी ने कथित रूप से कहा कि “मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी।” इसके बाद मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई गई और संस्था की ओर से आवेदन प्रस्तुत किया गया और शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।


अब सवाल यह भी है कि यदि विद्यालय द्वारा पूर्व में आवेदन दिया गया था तो उसकी जानकारी संबंधित अधिकारी तक क्यों नहीं पहुंची? आवेदन किस स्तर पर लंबित रहा? उसकी प्राप्ति और कार्रवाई की स्थिति क्या है? क्या सरकारी कार्यालयों में दिए जाने वाले ऐसे महत्वपूर्ण आवेदनों की निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है?


मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि संस्था से जुड़े लोगों के अनुसार खेल मैदान में निर्माण कार्य रात के समय भी किया जा रहा है। निर्माण कर रहे ठेकेदार द्वारा बच्चों एवं संस्था से जुड़े लोगों को कथित रूप से धमकाने का आरोप भी लगाया गया है। आरोप है कि ठेकेदार ने कथित तौर पर कहा कि “बच्चों को कुछ होता है तो मेरी जिम्मेदारी नहीं है, आप अपनी जिम्मेदारी संभालिए, मैं तो यहां काम करूंगा।” इस कथन की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।


रात में निर्माण को लेकर भी सवाल है कि यदि काम पूरी तरह नियमों के तहत हो रहा है तो निर्माण दिन के बजाय रात में क्यों किया जा रहा है? आखिर निर्माण की जरूरत क्या है और उससे इन विशेष बच्चों के खेल मैदान पर क्या असर पड़ेगा?
एक और बड़ा सवाल यह है कि कोरबा जिले में विशेष बच्चों के लिए यह महत्वपूर्ण विद्यालय है और यहां बड़ी संख्या में बच्चे अध्ययनरत हैं, तो शासन की ओर से इन बच्चों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित खेल मैदान की व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही? यदि मौजूदा मैदान किसी अन्य शासकीय निर्माण के लिए जरूरी है, तो क्या बच्चों के लिए वैकल्पिक खेल मैदान की व्यवस्था की गई है?
विशेष बच्चों के लिए खेल का मैदान सिर्फ खाली जमीन नहीं, बल्कि उनके शारीरिक विकास, मानसिक स्वास्थ्य, पुनर्वास और आत्मविश्वास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए प्रशासन को अब स्पष्ट करना चाहिए कि भूमि का वास्तविक स्वामित्व क्या है, वहां किस योजना या विभाग का निर्माण हो रहा है, इसकी स्वीकृति किसने दी है और बच्चों के खेल मैदान के लिए आगे क्या व्यवस्था होगी।

आज जनदर्शन में बच्चों को देखकर मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा और जल्द कार्रवाई का आश्वासन मिला है। अब उम्मीद है कि केवल आश्वासन तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीन की स्थिति, निर्माण के उद्देश्य और बच्चों के खेल मैदान के भविष्य की पूरी तस्वीर प्रशासन सार्वजनिक करेगा।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस मैदान पर निर्माण क्या किया जा रहा है? निर्माण किस विभाग द्वारा कराया जा रहा है? जिस भूमि पर निर्माण हो रहा है, वह शासकीय है या किसी अन्य संस्था अथवा व्यक्ति के नाम पर है? यदि भूमि शासकीय है और शासन के किसी विभाग द्वारा वहां निर्माण कराया जा रहा है, तो विद्यालय प्रबंधन और विशेष बच्चों को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई? निर्माण की स्वीकृति, उद्देश्य, नक्शा और कार्यादेश क्या है, इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?


क्योंकि सवाल सिर्फ एक निर्माण का नहीं है, सवाल उन विशेष बच्चों का है, जिनके पास अपनी जरूरत बताने के लिए शब्द भले कम हों, लेकिन खेलने और सुरक्षित बचपन का अधिकार उतना ही है जितना किसी दूसरे बच्चे का।


प्रदीप मिश्रा
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