महानदी विवाद पर दिल्ली में बड़ी बैठक, साय बोले- ऐसी राह निकले जिसमें दोनों राज्यों की जीत
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
अमित शाह की अध्यक्षता में साय-माझी समेत दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी, संवाद और वैज्ञानिक आकलन से स्थायी समाधान पर जोर
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद के समाधान को लेकर 1 अक्टूबर को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में उच्चस्तरीय बैठक हुई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने महानदी से जुड़े मुद्दों पर दोनों राज्यों का पक्ष रखा। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और जल संसाधन विभाग सहित केंद्र व राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बैठक में कहा कि महानदी केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की कृषि, संस्कृति और जनजीवन से जुड़ी जीवनधारा है। उनके अनुसार महानदी दोनों राज्यों को बांटने वाली नहीं, बल्कि जोड़ने वाली नदी है। उन्होंने कहा कि समाधान टकराव के बजाय संवाद, सहयोग और आपसी सहमति से निकलना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा समाधान चाहता है जिसमें दोनों राज्यों के किसानों, आम नागरिकों और आने वाली पीढ़ियों के हित सुरक्षित रहें। उन्होंने न्यायपूर्ण, निष्पक्ष, वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से समाधान तलाशने पर जोर दिया। साय ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ अपने हितों की बात करते हुए ओडिशा की आवश्यकताओं और हितों का भी सम्मान करता है।
साय ने महानदी के जलग्रहण क्षेत्र, कृषि, सिंचाई, पेयजल और ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की जरूरतों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी स्थायी समाधान में छत्तीसगढ़ की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने ओडिशा के हीराकुंड जलाशय के महत्व का भी उल्लेख किया और सहयोग की भावना से आगे बढ़ने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल उपलब्धता, वर्तमान और भविष्य की जरूरतों, सिंचाई, पेयजल तथा पर्यावरणीय आवश्यकताओं का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है। उनके अनुसार जल से जुड़े आंकड़ों और तथ्यों को पारदर्शी तरीके से साझा करते हुए तकनीकी स्तर पर स्पष्टता और राजनीतिक स्तर पर संवाद बनाए रखने से स्वीकार्य समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र की मध्यस्थता में दोनों राज्यों के बीच सकारात्मक संवाद से समाधान की उम्मीद मजबूत हुई है। इससे पहले 30 जुलाई 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में भी दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी, जिसमें बातचीत, तकनीकी सहयोग और सहमति के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध पुराने हैं। उन्होंने महाप्रभु जगन्नाथ की आस्था और शिवरीनारायण से पुरी तक जुड़े सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों राज्यों के बीच संबंधों को देखते हुए महानदी को विवाद की रेखा के बजाय सहयोग और विकास की धारा बनाने का प्रयास होना चाहिए।
बैठक में दोनों राज्यों के बीच तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर संवाद जारी रखने की बात सामने आई। महानदी जल बंटवारे को लेकर वर्ष 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया गया था। मौजूदा पहल में केंद्र सरकार, केंद्रीय जल आयोग और दोनों राज्यों के स्तर पर संवाद तथा तकनीकी विमर्श को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ की ओर से मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह और जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य फोकस दोनों राज्यों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए महानदी से जुड़े विवाद का संवाद और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर स्थायी समाधान तलाशना रहा।
प्रदीप मिश्रा
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