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धरोहर स्थलों का बदलेगा अंदाज, पर्यटकों के लिए बढ़ेंगी सुविधाएं

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर

एएसआई और संस्कृति विभाग के बीच एमओयू, पेयजल से साइट म्यूजियम और पार्किंग तक की सुविधाएं विकसित होंगी

रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ की पुरातात्विक और सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखते हुए अब इन स्थलों पर पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (एएसआई), भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग के बीच बुधवार को महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ। इसके तहत प्रदेश के संरक्षणाधीन स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों पर पर्यटक सुविधाओं एवं जरूरी अधोसंरचना का विकास किया जाएगा।
एमओयू के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन, भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के अधिकारियों की सलाह से अलग-अलग संरक्षित स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों के लिए पर्यटक सुविधाओं की योजनाएं तैयार करेगा। इसका उद्देश्य धरोहर स्थलों पर पहुंचने वाले पर्यटकों को बेहतर और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।
इन स्थलों पर शौचालय, स्वच्छ पेयजल, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया, पार्किंग, क्लॉक रूम, सूचना केंद्र, साइट म्यूजियम और साइनेज जैसी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। दिव्यांग और समावेशी पर्यटन को ध्यान में रखते हुए ब्रेल साइनेज और टैक्टाइल पाथवे की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इसके अलावा लैंडस्केपिंग सहित पर्यटकों की जरूरत के अनुसार अन्य सुविधाएं भी विकसित की जा सकेंगी।
धरोहर का मूल स्वरूप रहेगा सुरक्षित
विकास कार्यों के दौरान पुरातात्विक स्थलों और ऐतिहासिक स्मारकों की मौलिकता को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रस्तावित निर्माण की डिजाइन, सामग्री और संरचना इस तरह तय की जाएगी कि स्मारकों को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे। सभी कार्य पुरातत्त्व संबंधी अधिनियमों और नियमों के अनुरूप होंगे तथा भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण की स्वीकृति के बाद ही परियोजनाओं को लागू किया जाएगा।
केंद्र से लेकर CSR और PPP तक से जुटेंगे संसाधन
पर्यटक सुविधाओं के विकास के लिए केंद्रीय सहायता के अलावा राज्य शासन की एजेंसियों, कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के माध्यम से भी संसाधन जुटाए जा सकेंगे। विकसित सुविधाओं के रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ शासन अथवा अधिकृत एजेंसी की होगी।
योजनाओं की निगरानी के लिए “योजना एवं क्रियान्वयन समिति” का गठन किया जाएगा। यह समिति योजना बनाने से लेकर विकास और प्रबंधन तक अलग-अलग चरणों की निगरानी करेगी, जिससे धरोहर संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के विकास के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सके।
एमओयू के अवसर पर भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के महानिदेशक के प्रतिनिधि एवं मध्य क्षेत्र के निदेशक डॉ. टी. अरुण राज, रायपुर मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद् डॉ. एम. कलिमुथु मौजूद रहे। संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने छत्तीसगढ़ शासन की ओर से समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। संचालक पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय डॉ. संजय कन्नौजे सहित विभागीय अधिकारी भी उपस्थित रहे।
इस पहल से छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार के साथ विरासत पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है, वहीं धरोहरों के मूल स्वरूप और ऐतिहासिक पहचान को सुरक्षित रखने पर भी जोर रहेगा।


प्रदीप मिश्रा
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