नुआंखाई भेटघाट में गूंजा एकता और भाईचारे का संदेश
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गंजाम, ओड़िशा
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनिल कुमार चौधरी, गंजाम
आम संस्कृति आम परंपरा, दैनिक आशा खबर कागज और एसएमआईटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ नुआंखाई भेटघाट कार्यक्रम
गंजाम ACGN:- ओड़िशा की संस्कृति और परंपराओं में पर्व-त्योहारों का विशेष महत्व है। यहां बारह महीनों में तेरह त्योहारों की परंपरा लोगों के जीवन में उत्साह और सामाजिक जुड़ाव का रंग भरती है। इसी समृद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है पश्चिमी ओड़िशा का नुआंखाई, जिसे धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति, अन्न और सामाजिक एकता से जोड़कर देखा जाता है।
नुआंखाई उत्सव की धूम के बीच मंगलवार को ब्रह्मपुर के हिल पटना स्थित एसएमआईटी कॉन्फ्रेंस हॉल परिसर में आम संस्कृति आम परंपरा, दैनिक आशा खबर कागज और एसएमआईटी के संयुक्त तत्वावधान में नुआंखाई भेटघाट कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया और एक-दूसरे से मुलाकात कर पर्व की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में एसएमआईटी के अध्यक्ष डॉ. भगवान गनंतायत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने नुआंखाई उत्सव के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए और उपस्थित लोगों को नुआंखाई पर्व की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हमारी परंपराओं को जीवंत रखने के साथ समाज में आपसी मेल-जोल को भी मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि के रूप में लायंस एवं जाने-माने समाजसेवी पी. धर्मा राव, वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ पटनायक तथा भवानी महापात्र सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। अतिथियों ने नुआंखाई भेटघाट की परंपरा और इसके सामाजिक महत्व पर अपने विचार रखे।

पश्चिमी ओड़िशा की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में नुआंखाई का विशेष स्थान है। अब नुआंखाई भेटघाट का आयोजन विभिन्न क्षेत्रों में भी होने लगा है। ऐसे आयोजनों से क्षेत्रवासियों को एक-दूसरे से मिलने, विचार साझा करने और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करने का अवसर मिलता है।
अतिथियों ने कहा कि भेटघाट जैसे कार्यक्रम समाज को एकता के सूत्र में बांधने और भाईचारे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बदलते समय में जब लोग अपने पारंपरिक आयोजनों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे आयोजन संस्कृति और सामाजिक रिश्तों को नई ऊर्जा देने का काम करते हैं।
वरिष्ठ पत्रकार सुदीप साहू ने नुआंखाई के प्राकृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नुआंखाई केवल नया अन्न ग्रहण करने का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति मां के सम्मान और प्रकृति की पूजा की परंपरा भी है। अन्न और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना इस पर्व की मूल भावना से जुड़ा हुआ है।
कार्यक्रम के अंत में पत्रकार सुदर्शन राउल ने सभी अतिथियों, आयोजकों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में प्रभाकर साहू एवं अभिराम पात्र सहित अन्य लोगों की भी सक्रिय सहभागिता रही।
नुआंखाई भेटघाट कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि संस्कृति केवल उत्सव मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को जोड़ने, परंपराओं को आगे बढ़ाने और समाज में आपसी प्रेम एवं भाईचारे को मजबूत करने का माध्यम भी है।
प्रदीप मिश्रा
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