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SECL के खिलाफ हजारों ग्रामीणों का हुंकार, आखिर ऐसा क्या छिपा है?दुर्गापुर कोल ब्लॉक में

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रायगढ़, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी रायगढ़

धर्मजयगढ़ के दशहरा मैदान में उमड़ा ग्रामीणों का सैलाब, भू-अर्जन और सर्वे रोकने की मांग पर प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

रायगढ़ ACGN:- दुर्गापुर कोल ब्लॉक को लेकर ग्रामीणों का विरोध शुक्रवार को सड़क पर दिखाई दिया। धर्मजयगढ़ के दशहरा मैदान में 11 सितंबर 2026 को सुबह से ही ग्रामीणों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ और देखते ही देखते हजारों की संख्या में लोग धरना स्थल पर जुट गए। ग्रामीणों ने SECL के खिलाफ शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन के साथ महारैली निकालकर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पहले से ही सतर्क था और दशहरा मैदान सहित आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी।


ग्रामीणों का कहना है कि दुर्गापुर कोल ब्लॉक से जुड़े प्रभावित परिवार लंबे समय से अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर प्रशासन तथा SECL के अधिकारियों के सामने अपनी बात रखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें उनकी प्रमुख मांगों का स्थायी और लिखित समाधान नहीं मिला है। इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों ने पहले ही 11 सितंबर को शांतिपूर्ण धरना एवं महारैली की सूचना प्रशासन को दी थी।


धरना प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों की ओर से अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, धर्मजयगढ़ के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, छत्तीसगढ़ शासन के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, कलेक्टर रायगढ़, SECL के CMD बिलासपुर तथा SECL रायगढ़ क्षेत्र के महाप्रबंधक के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक प्रभावितों की प्रमुख मांगों का स्थायी और लिखित समाधान नहीं किया जाता, तब तक दुर्गापुर कोल ब्लॉक में भू-अर्जन, सर्वे तथा अन्य अग्रिम गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए।


ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में बताया कि उन्होंने 28 जून 2026 को SECL रायगढ़ क्षेत्र के मुख्य प्रबंधक को लिखित रूप से अपनी समस्याएं दी थीं। इसके बाद 30 जून को अनुविभागीय अधिकारी के माध्यम से कलेक्टर रायगढ़ को ज्ञापन सौंपा गया तथा 2 जुलाई को एक बार फिर कलेक्टर के समक्ष अपनी मांगें रखी गईं। ग्रामीणों के अनुसार इसके बावजूद समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ।


मामला यहीं नहीं रुका। ग्रामीणों के अनुसार 20 अगस्त 2026 को कलेक्टोरेट में आयोजित DRRC बैठक में प्रभावित ग्रामीणों और SECL के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन उस बैठक के बाद भी उनकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया। इसके बाद 7 सितंबर को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व धर्मजयगढ़ के माध्यम से पुनः लिखित सूचना देकर अपनी समस्याओं से प्रशासन को अवगत कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार ज्ञापन और बैठकों के बावजूद उन्हें आज तक ऐसा लिखित समाधान नहीं मिला, जिससे उनकी चिंता दूर हो सके।


सबसे गंभीर सवाल ग्रामीणों ने दुर्गापुर और शाहपुर पंचायत में पेसा अधिनियम लागू होने को लेकर उठाया है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि प्रभावित ग्रामीणों को समुचित जानकारी और विश्वास में लिए बिना सर्वे, भू-अर्जन तथा अन्य अग्रिम गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे क्षेत्र में असंतोष और तनाव की स्थिति बन रही है। ऐसे में उनका सवाल है कि जब तक प्रभावितों की आपत्तियों और मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक आगे की कार्रवाई क्यों जारी रखी जा रही है?
शुक्रवार को दशहरा मैदान में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़ ने यह संकेत जरूर दिया कि दुर्गापुर कोल ब्लॉक का मुद्दा अब केवल कुछ परिवारों की शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों का एकजुट होकर विरोध करना प्रशासन और SECL दोनों के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है। हालांकि ग्रामीणों ने अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण बताते हुए अपनी मांगों के समाधान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने की बात कही है।
ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग यही है कि पहले उनकी समस्याओं का स्थायी और लिखित समाधान हो, इसके बाद ही भू-अर्जन, सर्वे अथवा अन्य अग्रिम प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास या क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास की प्रक्रिया में प्रभावित परिवारों के अधिकार, उनकी सहमति, पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा जैसे सवालों का स्पष्ट समाधान होना चाहिए।
अब देखना यह होगा कि हजारों ग्रामीणों के इस विरोध और ज्ञापन के बाद शासन-प्रशासन तथा SECL की ओर से क्या कदम उठाया जाता है। क्या ग्रामीणों की मांगों पर लिखित और स्थायी समाधान निकलेगा, या फिर दुर्गापुर कोल ब्लॉक को लेकर विरोध की यह आवाज आगे और तेज होगी? फिलहाल गेंद प्रशासन और SECL के पाले में है और ग्रामीण अपने अधिकारों के स्पष्ट समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

प्रदीप मिश्रा
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