“सड़क पर रोशनी या रुतबे की दौड़?” तेज LED, हाई बीम, हूटर और पद के बोर्ड – नियमों से बड़ा आखिर कौन?
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संपादकीय
अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ का साप्ताहिक विशेषांक
✍️ कलम की धार ✍️
By ACGN 7647981711, 9303948009
“निष्पक्ष लेखनी • निर्भीक विश्लेषण • विश्वसनीय तथ्य • जनहित की सच्ची आवाज़” हर रविवार आपके बीच
आलेख : प्रदीप मिश्रा
‘कलम की धार’ अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ का साप्ताहिक विशेष स्तंभ है, जो प्रत्येक रविवार प्रकाशित होता है। इसका उद्देश्य जनहित, जनजागरूकता और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की तथ्यपरक, निष्पक्ष एवं विश्लेषणात्मक प्रस्तुति करना है। जिसके माध्यम से जनहित से जुड़े उन मुद्दों पर बेबाक सवाल उठाने की एक कोशिश, जिन्हें हम रोज देखते हैं, लेकिन अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। “कलम की धार” का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि गलत प्रवृत्तियों के प्रति समाज और प्रशासन को जागरूक करना है।
आज का विषय :“सड़क पर रोशनी या दिखावे की दौड़?”
तेज LED, हाई बीम, हूटर, पदनाम के बड़े बोर्ड और वाहनों पर पहचान के बढ़ते दिखावे के बीच सवाल एक ही – सड़क पर रुतबा बड़ा हो या नियम?
सड़क पर रोशनी बढ़ी या हादसों का अंधेरा? LED की चौंध से लेकर पद के बोर्ड और हूटर तक – कब जागेंगे हम? सड़क पर आपका वाहन अकेला नहीं है, सामने वाला भी किसी घर का चिराग है
रात का समय है। एक पिता अपने बच्चे को बाइक पर बैठाकर घर लौट रहा है। एक मां स्कूटी से बाजार से वापस आ रही है। कोई मजदूर दिनभर की मेहनत के बाद घर पहुंचने की जल्दी में है। कोई युवक परीक्षा देकर लौट रहा है और किसी वाहन में कोई मरीज अस्पताल की ओर जा रहा है।
सड़क पर हर व्यक्ति की मंजिल अलग हो सकती है, लेकिन मकसद एक ही है, सुरक्षित घर पहुंचना।
लेकिन इसी रास्ते पर कुछ सेकंड की लापरवाही किसी परिवार की पूरी जिंदगी बदल सकती है।
आजकल वाहनों में तेज सफेद LED लाइटों का चलन बढ़ गया है। सामने से आने वाले वाहन की आंखों पर जब अत्यधिक तेज रोशनी पड़ती है तो कुछ क्षणों के लिए सड़क को स्पष्ट देखना कठिन हो सकता है। रात के अंधेरे में यह स्थिति और जोखिमपूर्ण हो जाती है। आजकल कुछ लोग बार-बार हाई बीम करके सामने वाले को चौंधियाते हैं।
सवाल यह है कि आखिर हम सड़क पर किससे आगे निकलने की कोशिश कर रहे हैं?
हाई बीम करना बहादुरी नहीं है। सही समय पर लो बीम करना समझदारी है, सड़क पर रोशनी का उद्देश्य रास्ता दिखाना है, सामने वाले की आंखों से रास्ता छीनना नहीं।
रंग-बिरंगी और अतिरिक्त लाइटें – स्टाइल या परेशानी?
वाहनों को आकर्षक बनाने के लिए रंग-बिरंगी और अतिरिक्त LED लाइटें लगाने का चलन भी बढ़ रहा है। हर अतिरिक्त लाइट को स्वतः अवैध कहना सही नहीं होगा, लेकिन यदि उसकी चमक या उपयोग दूसरे वाहन चालक की दृश्यता और ध्यान को प्रभावित करे, तो यह सड़क सुरक्षा का विषय जरूर बन जाता है, गाड़ी आपकी है, लेकिन सड़क सबकी है, आपका स्टाइल किसी दूसरे की सुरक्षा से बड़ा नहीं हो सकता,
लाइट का सही इस्तेमाल ही असली समझदारी है,
दिन हो या रात, लाइट का इस्तेमाल वाहन की डिजाइन, दृश्यता, सड़क की परिस्थिति और लागू यातायात नियमों के अनुसार होना चाहिए, सामने वाहन आने पर अनावश्यक हाई बीम से बचना चाहिए। कम दृश्यता या धुंध में आवश्यक लाइट का सही उपयोग होना चाहिए। फॉग लाइट को फैशन के लिए नहीं, जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करना चाहिए।
इंडिकेटर केवल चमकने के लिए नहीं है, वह पीछे और आसपास चल रहे लोगों को आपके इरादे की सूचना देता है, ब्रेक लाइट पीछे वाले चालक को सावधान करती है, यानी वाहन की हर लाइट का एक उद्देश्य है।
लाइट रास्ता दिखाए, जिंदगी को खतरे में न डाले।
अब गाड़ी पर पद और संगठन के बड़े-बड़े बोर्ड का सवाल
सड़क पर एक और नया चलन दिखाई दे रहा है। कई वाहनों पर व्यक्ति अपने पद, संगठन या विभाग का नाम बड़े-बड़े बोर्ड में लिखाकर चलता है। कहीं पुलिस, कहीं किसी संगठन का पद, कहीं “CG Government”, कहीं “On Duty” और कहीं दूसरी प्रभावशाली पहचान।
सवाल है आखिर इतना बड़ा बोर्ड लगाकर किसे क्या दिखाना है?
कई बार हालत ऐसी होती है कि वाहन की नंबर प्लेट छोटी दिखाई देती है और पद का बोर्ड उससे बड़ा, लेकिन वाहन की वास्तविक पहचान तो नंबर प्लेट से होनी चाहिए।
पद कार्यालय में बड़ा हो सकता है, सड़क पर नियम से बड़ा नहीं, और अगर कोई व्यक्ति ऐसे बोर्ड के माध्यम से आम आदमी पर अनावश्यक दबाव या प्रभाव जमाने की कोशिश करता है, तो यह और गंभीर सवाल है।
सड़क पर सामने वाला व्यक्ति यह सोचने के लिए मजबूर क्यों हो कि गाड़ी में कोई अधिकारी, पुलिसकर्मी, नेता या प्रभावशाली व्यक्ति बैठा है इसलिए उसे रास्ता देना ही होगा?
पद सम्मान के लिए है, आम आदमी पर दबाव बनाने के लिए नहीं।
हूटर रुतबा दिखाने का साधन नहीं
इसी के साथ कई वाहनों में हूटर का इस्तेमाल भी देखने को मिलता है। जरूरत न होने पर बार-बार हूटर बजाना सामने चल रहे चालक पर अचानक दबाव पैदा कर सकता है। वह घबराकर ब्रेक लगा सकता है, रास्ता बदल सकता है या वाहन का संतुलन बिगाड़ सकता है।
विशेष परिस्थितियों में जिन वाहनों को नियमों के तहत चेतावनी उपकरण की अनुमति है, उनके लिए अलग व्यवस्था है। लेकिन सामान्य वाहन में सिर्फ प्रभाव जमाने या रास्ता खाली कराने के लिए हूटर का इस्तेमाल हो रहा है तो इसकी जांच और नियमों के अनुसार कार्रवाई जरूरी है।
हूटर की आवाज से रुतबा नहीं, जिम्मेदारी की पहचान होनी चाहिए।
“PRESS” लिखा है तो निष्पक्षता भी दिखनी चाहिए
अब बात प्रेस की पत्रकारिता समाज का आईना है। प्रेस का काम जनता की आवाज उठाना, सत्ता से सवाल पूछना और सच को सामने लाना है।
लेकिन यदि किसी वाहन पर “PRESS” लिखे होने के साथ किसी राजनीतिक संगठन का झंडा भी लगा हो तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रेस की पहचान राजनीतिक झंडे से नहीं, निष्पक्ष कलम से होनी चाहिए।
पत्रकार किसी भी विचारधारा या दल के प्रति व्यक्तिगत विचार रख सकता है, लेकिन पत्रकारिता की सार्वजनिक पहचान और राजनीतिक प्रचार की पहचान को एक ही वाहन पर इस तरह प्रदर्शित करना कि दोनों एक ही भूमिका लगें, यह पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर सकता है।
इसलिए प्रेस लिखे वाहनों पर भी नियमों और पहचान के दुरुपयोग की जांच आवश्यक है।
नंबर प्लेट छोटी नहीं पड़नी चाहिए
वाहन पर पद का बोर्ड हो, संगठन का नाम हो, प्रेस लिखा हो या कोई अन्य पहचान,सबसे पहले यह सुनिश्चित होना चाहिए कि नंबर प्लेट स्पष्ट और नियमों के अनुरूप दिखाई दे। नंबर प्लेट को ढकने वाले बोर्ड, स्टिकर या अन्य सामग्री पर कार्रवाई होनी चाहिए।
क्योंकि सड़क पर किसी की पहचान उसके पद से नहीं, उसके वाहन की वैध पहचान से होनी चाहिए।
नियम सिर्फ आम आदमी के लिए क्यों? यही सबसे बड़ा सवाल है
अगर आम आदमी की गाड़ी में गलत लाइट लगी है तो कार्रवाई होनी चाहिए, अगर किसी प्रभावशाली व्यक्ति की गाड़ी में वही गलती है तो वहां भी कार्रवाई होनी चाहिए, अगर कर्मचारी नियम तोड़ता है तो कार्रवाई हो, अगर संगठन का पदाधिकारी नियम तोड़ता है तो कार्रवाई हो, अगर पत्रकार नियम तोड़ता है तो उससे भी सवाल हो।
कानून व्यक्ति देखकर नहीं, नियम देखकर लागू होना चाहिए।
प्रशासन सिर्फ चालान नहीं, जागरूकता भी फैलाए
यातायात विभाग को इस पूरे विषय को केवल चालान की कार्रवाई तक सीमित नहीं रखना चाहिए।
स्कूल-कॉलेज, ड्राइविंग स्कूल, पेट्रोल पंप, बस स्टैंड, ग्राम पंचायत और सार्वजनिक स्थानों पर “सुरक्षित रोशनी – सुरक्षित सफर” जैसे जागरूकता अभियान चलाए जा सकते हैं।
लोगों को बताया जाए कि हाई बीम और लो बीम का सही इस्तेमाल क्या है, अतिरिक्त लाइटों को लेकर क्या नियम हैं, हूटर का इस्तेमाल किन परिस्थितियों में अनुमत है, नंबर प्लेट कैसी होनी चाहिए और वाहन पर कौन-सी पहचान प्रदर्शित की जा सकती है, साथ ही यातायात पुलिस ऐसे वाहनों की भी नियमित जांच करे जिनमें अत्यधिक तेज LED, अनावश्यक अतिरिक्त लाइट, नियम विरुद्ध हूटर, नंबर प्लेट को ढकने वाले बोर्ड या भ्रामक पहचान वाले चिन्ह लगे हों।
एक हादसा सिर्फ एक व्यक्ति को नहीं बदलता, पूरा परिवार बदल देता है
हम अक्सर दुर्घटना की खबर पढ़कर आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन जिस घर में हादसा होता है, वहां कहानी खत्म नहीं होती, किसी बच्चे का पिता चला जाता है, किसी मां का बेटा वापस नहीं आता, किसी पत्नी का सहारा छिन जाता है, किसी परिवार का कमाने वाला अस्पताल पहुंच जाता है।
इसलिए सड़क सुरक्षा केवल यातायात विभाग का विषय नहीं है। यह हम सबकी जिम्मेदारी है।
जब सामने से तेज LED आए तो अनावश्यक हाई बीम से बचें, जब पीछे से वाहन आए तो अचानक रास्ता न बदलें, हूटर का गलत इस्तेमाल न करें,पद और संगठन के नाम का इस्तेमाल दूसरों पर दबाव बनाने के लिए न करें, नंबर प्लेट साफ रखें।
प्रेस की पहचान को राजनीतिक प्रदर्शन से अलग रखें, और सबसे जरूरी सड़क पर सामने वाले को भी अपने जैसा इंसान समझें।
कलम की धार का प्रशासन से सीधा सवाल
क्या यातायात विभाग अब केवल हेलमेट और सीट बेल्ट तक सीमित न रहकर वाहनों की तेज LED, हाई बीम, अतिरिक्त लाइट, हूटर, पदनाम बोर्ड, “On Duty” जैसे भ्रामक संकेत, नंबर प्लेट को ढकने वाले बोर्ड और अन्य नियम विरुद्ध सजावट की भी जांच करेगा?
क्या कार्रवाई पद, विभाग, संगठन या पहचान देखकर नहीं बल्कि नियम के आधार पर होगी?
और क्या जनता को चालान के डर से नहीं, अपनी और दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए जागरूक किया जाएगा?
यह कार्रवाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं होनी चाहिए, यह एक सुरक्षित यातायात संस्कृति बनाने की पहल होनी चाहिए।
सड़क पर हमें सबसे ज्यादा जरूरत रोशनी की नहीं, जिम्मेदारी की है।
आपकी गाड़ी की रोशनी जितनी महत्वपूर्ण है, सामने वाले की आंखों की रोशनी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
आपका पद जितना महत्वपूर्ण है, सामने वाले आम आदमी की जिंदगी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
आपको जल्दी घर पहुंचना है, सामने वाले को भी।
याद रखिए
हाई बीम ताकत नहीं, हूटर रुतबा नहीं, पद का बोर्ड अधिकार नहीं, प्रेस का झंडा निष्पक्षता नहीं, और सड़क किसी की निजी संपत्ति नहीं।
सड़क पर सबसे बड़ा आपका पद नहीं नियम है।
यातायात जागरूकता का संदेश
अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ “कलम की धार” का समस्त वाहन चलकों से विनम्र निवेदन है कि सड़क पर वाहन चलाते समय यातायात नियमों का पालन करें, सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रखें। सड़क पर दिखावे की जिंदगी न जिएं, अपनी गाड़ी, पद, लाइट, हूटर या किसी पहचान के जरिए खुद को दूसरों से आगे दिखाने की कोशिश न करें। याद रखें, सड़क पर असली पहचान आपके रुतबे से नहीं, आपकी जिम्मेदारी और आपके व्यवहार से होती है।
वाहन हमेशा संयम, धैर्य और जिम्मेदारी के साथ चलाएं। जल्दबाजी से बचें, अनावश्यक गति से बचें, मोबाइल का इस्तेमाल न करें, नशे में वाहन न चलाएं और सामने वाले चालक की सुविधा व सुरक्षा का भी ध्यान रखें, स्वयं सुरक्षित रहें, अपने परिवार को सुरक्षित रखें और दूसरों की जिंदगी को भी सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें।
क्योंकि सड़क पर जीत किसी से आगे निकलने में नहीं, सही-सलामत अपने घर पहुंचने में है।
“दिखावा छोड़ें, संयम अपनाएं,सुरक्षित चलें, सुरक्षित घर पहुंचें।”
आइए, ऐसा सफर बनाएं जिसमें गाड़ी की रोशनी रास्ता दिखाए, हूटर सिर्फ जरूरत पर बजे, पहचान नंबर प्लेट से हो और हर चालक के मन में एक ही बात रहे
“मुझे भी घर पहुंचना है और सामने वाले को भी।”
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़।
आपके क्षेत्र में भी कोई महत्वपूर्ण खबर, जनसमस्या या जनहित का मुद्दा हो तो हमें इस नंबर पर भेजें। 7647981711, 9303948009।
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