अबूझमाड़ में बदला हवाओं का रुख, राखी से जुड़ा विश्वास
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नारायणपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
हिंसा की राह छोड़ मुख्यधारा में लौटीं महिलाओं ने DRG जवानों की कलाई पर बांधा रक्षा-सूत्र, शांति और अपनत्व का दिया संदेश
नारायणपुर ACGN:- अबूझमाड़ की धरती पर इस रक्षाबंधन एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने बदलाव, विश्वास और शांति की नई कहानी लिख दी। कभी हिंसा और बंदूक के साये में जीवन बिताने वालीं, लेकिन अब आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौट चुकी महिला माओवादियों ने रक्षाबंधन के अवसर पर नारायणपुर पुलिस के डीआरजी परिसर में जवानों और पुलिस अधिकारियों की कलाई पर राखी बांधी।
यह दृश्य महज एक पर्व मनाने तक सीमित नहीं रहा। रक्षा-सूत्र के इस छोटे से धागे ने पुलिस और मुख्यधारा में लौट चुकी महिलाओं के बीच विश्वास, सम्मान और मानवीय रिश्ते की एक नई डोर जोड़ दी। जिन हाथों में कभी हिंसा का रास्ता था, उन्हीं हाथों से जवानों की कलाई पर राखी बंधी तो माहौल भावुक हो उठा।

बंदूक की जगह विश्वास की डोर
डीआरजी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में आत्मसमर्पित बहनों ने पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल सहित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अक्षय साबद्रा, अजय कुमार और ऐश्वर्य चंद्राकर समेत अन्य पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को राखी बांधी। बहनों ने जवानों के प्रति स्नेह और सम्मान जताते हुए शांति एवं सुरक्षित भविष्य की उम्मीद व्यक्त की।
एक समय संघर्ष और भय के वातावरण में रहने वाली ये महिलाएं आज पुलिस परिवार के साथ आत्मीयता से रक्षाबंधन मनाती नजर आईं। यह बदलाव इस बात का संकेत भी बना कि जब संवाद और विश्वास के रास्ते खुलते हैं तो हिंसा से दूर होकर समाज की मुख्यधारा में लौटने की राह मजबूत हो सकती है।

रक्षाबंधन बना सुरक्षा और सम्मान का संकल्प
पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार पटेल ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं है, बल्कि यह विश्वास, सुरक्षा और जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। मुख्यधारा में लौटे लोगों को समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देना और उनके भीतर सुरक्षा का विश्वास पैदा करना पुलिस और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पण के बाद नई जिंदगी की शुरुआत करने वाले लोगों को सकारात्मक वातावरण और सहयोग मिलना जरूरी है, ताकि वे अपने भविष्य को बेहतर दिशा दे सकें और समाज के साथ मजबूती से जुड़ सकें।

अबूझमाड़ में शांति की नई उम्मीद
नारायणपुर के डीआरजी परिसर में रक्षाबंधन के दौरान दिखाई दी यह आत्मीयता बदलते अबूझमाड़ की एक अलग तस्वीर सामने रखती है। बंदूक और हिंसा की जगह संवाद, अपनत्व और विश्वास की डोर मजबूत होती दिखाई दी।
राखी के इस पवित्र धागे ने यह संदेश दिया कि रिश्ते केवल खून के नहीं होते, बल्कि विश्वास और इंसानियत से भी बनते हैं। कभी एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े रहे लोगों के बीच आज सम्मान और अपनत्व का भाव दिखाई देना निश्चित रूप से बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।

अबूझमाड़ में मनाया गया यह रक्षाबंधन शांति, भाईचारे और विकास की उस उम्मीद को मजबूत करता है, जिसमें बंदूक की आवाज पीछे छूट रही है और संवाद तथा विश्वास की आवाज आगे बढ़ रही है।
प्रदीप मिश्रा
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