श्रमिक बच्चों के सपनों को मिलेगी नई उड़ान
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रायपुर छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय
मुख्यमंत्री साय ने प्रतिभावान बच्चों का किया सम्मान, 1.45 लाख श्रमिकों के खातों में 39.67 करोड़ से अधिक की सहायता राशि अंतरित
रायपुर ACGN:- श्रमिक परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को बेहतर शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सोमवार को राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित सम्मान समारोह में योजना के अंतर्गत अध्ययनरत बच्चों से आत्मीय संवाद किया और शिक्षा, खेल, कला तथा अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया।
इस अवसर पर विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के तहत 1 लाख 45 हजार 841 श्रमिकों के बैंक खातों में 39 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे अंतरित की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक प्रदेश के विकास की मजबूत नींव हैं। उनके परिश्रम से सड़कें, भवन, पुल और अनेक विकास कार्य आकार लेते हैं। ऐसे में श्रमिक परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर देना सरकार की प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगे और अपने सपनों को पूरा करेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने बच्चों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हुए कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, शिक्षा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

100 से बढ़कर 200 बच्चों तक पहुंची योजना – मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की शुरुआत पिछले वर्ष 100 बच्चों के साथ की गई थी। इस वर्ष योजना का विस्तार करते हुए 200 प्रतिभावान बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में पढ़ाई का अवसर दिया गया है। प्रदेश के सभी 33 जिलों से चयनित बच्चे राजकुमार कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल और रुंगटा पब्लिक स्कूल जैसे प्रतिष्ठित विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिन विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना श्रमिक परिवारों के लिए कभी कठिन सपना हुआ करता था, आज सरकार उस सपने को साकार करने का प्रयास कर रही है। योजना केवल अच्छे विद्यालय में प्रवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को बेहतर वातावरण, आत्मविश्वास और अपनी प्रतिभा निखारने के समान अवसर भी उपलब्ध करा रही है।
श्रमिकों के परिश्रम से बनती है विकास की बुनियाद – मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों की ऊंची इमारतों से लेकर गांवों की सड़कों और बड़े पुलों तक विकास की हर बड़ी संरचना के पीछे श्रमिकों का पसीना और परिश्रम है। राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से श्रमिकों के कल्याण के लिए 67 प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृत्व सहायता, दिव्यांग सहायता, पेंशन, कौशल विकास, रोजगार और आवास सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। सरकार का प्रयास है कि इन योजनाओं का लाभ पात्र श्रमिकों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे और सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा हो।

ढाई साल में श्रमिकों को 774 करोड़ से अधिक की सहायता – श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में श्रमिकों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए लगातार नई पहल की जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के खातों में अंतरित की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि आर्थिक परिस्थितियों के कारण किसी श्रमिक परिवार के बच्चे के सपने सीमित न हों। बच्चा अपनी प्रतिभा और रुचि के अनुसार डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, वैज्ञानिक, उद्यमी अथवा किसी अन्य क्षेत्र में आगे बढ़ सके, इसके लिए योजनाओं का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
बदलते रोजगार परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए पार्सल डिलीवरी से जुड़े श्रमिकों को वाहन खरीदने के लिए सहायता और चरवाहों को आर्थिक सहायता जैसी नई योजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।

बच्चों से बोले मुख्यमंत्री, बड़े सपने देखें और खूब मेहनत करें
मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अपने जीवन के संघर्ष और अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे अभी से बड़े सपने देखें और यह तय करें कि भविष्य में किस क्षेत्र में जाकर देश और प्रदेश की सेवा करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी, तो कोई व्यवसाय अथवा समाजसेवा के क्षेत्र में जाना चाहता है। लक्ष्य कोई भी हो, उसकी मजबूत नींव शिक्षा ही है। इसलिए विद्यार्थियों को मिले इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान उपलब्ध हैं। उच्च शिक्षा के लिए ऋण और विदेश में अध्ययन के लिए सहायता जैसी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं, ताकि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभावान विद्यार्थी की शिक्षा और उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें।
दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी शिक्षा के नए अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के विकास में लंबे समय तक नक्सलवाद बड़ी चुनौती रहा है। सरकार के प्रयासों और सुरक्षा बलों के साहस से अब ऐसे क्षेत्रों में भी विकास और शिक्षा के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। उन्होंने ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी जैसी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर सहित दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र के साथ राज्य सरकार समाज के हर वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रही है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और विकास के अवसर पहुंचाना जरूरी है।
बच्चों के अनुभवों में दिखा आत्मविश्वास
समारोह में योजना के अंतर्गत अध्ययनरत विद्यार्थियों ने अपने अनुभव भी साझा किए। राजनांदगांव के दिल्ली पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत बीजापुर के अतीश ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें इतने प्रतिष्ठित विद्यालय में पढ़ने का अवसर मिलेगा। योजना के कारण पढ़ाई के साथ खेल और अन्य गतिविधियों में भी अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिल रहा है। अतीश ने मुख्यमंत्री के सामने आईएएस अधिकारी बनकर देश और प्रदेश की सेवा करने का सपना साझा किया।
रुंगटा पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत कबीरधाम की छात्रा इशिका डाहरे ने बताया कि पहले उन्हें अंग्रेजी में सहजता से बात करने का विश्वास नहीं था, लेकिन नए विद्यालय के वातावरण और अवसरों से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। अभिभावकों ने भी राज्य सरकार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाना उनके लिए कठिन था, लेकिन इस योजना ने उनके बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद मजबूत की है।
बच्चों के साथ बैठकर मुख्यमंत्री ने किया भोजन
कार्यक्रम का सबसे आत्मीय क्षण तब देखने को मिला जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय श्रमिक परिवारों के बच्चों के साथ बैठकर दोपहर का भोजन करने लगे। मुख्यमंत्री ने बच्चों से सहजता से बातचीत की और उनके सवालों के जवाब दिए। बच्चों ने मुख्यमंत्री से उनके बचपन, पढ़ाई, पसंदीदा भोजन और जीवन के अनुभवों से जुड़े सवाल पूछे।
मुख्यमंत्री ने बच्चों को अपने जीवन के संघर्षों के बारे में बताते हुए मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा दी। बच्चों ने भी मुख्यमंत्री के साथ इस आत्मीय मुलाकात को यादगार बताया। एक विद्यार्थी ने कहा कि मुख्यमंत्री उनके अच्छे शिक्षक की तरह हैं, जिनसे वे खुलकर सवाल पूछ सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा कि उनकी सफलता ही सरकार और उनके माता-पिता की सबसे बड़ी खुशी होगी। वे खूब पढ़ें, अपने सपनों को बड़ा रखें और जीवन में सफलता हासिल करने के बाद समाज और प्रदेश के प्रति अपने दायित्व को भी हमेशा याद रखें।
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना का उद्देश्य आर्थिक परिस्थितियों के कारण प्रतिभावान बच्चों के अवसर सीमित न होने देना और उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराकर भविष्य के लिए तैयार करना है।
कार्यक्रम में सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री योगेश दत्त मिश्रा, उपाध्यक्ष श्री किशोर महानंद, श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता सहित विभागीय अधिकारी, श्रमिक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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