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सिलफिली हाई स्कूल में तालाबंदी, प्राचार्य पर गंभीर आरोप

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सूरजपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू

मूलभूत सुविधाओं की कमी से नाराज छात्रों का फूटा आक्रोश, महिला कर्मचारी ने भी लगाए गंभीर आरोप; प्रथम जांच के बाद प्राचार्य को 15 दिनों के लिए हटाया गया

सूरजपुर ACGN:- जिले के सिलफिली स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में मंगलवार को विद्यालय की अव्यवस्थाओं और प्राचार्य के कथित व्यवहार को लेकर छात्र-छात्राओं का आक्रोश सामने आया। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने विद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों के इस कदम के बाद शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और विद्यार्थियों तथा विद्यालय के कर्मचारियों से बातचीत कर उनकी शिकायतें सुनीं।
विद्यार्थियों का कहना है कि विद्यालय में लंबे समय से कई मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। कक्षाओं में पंखों की खराबी के कारण विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों का आरोप है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार विद्यालय प्रबंधन को जानकारी दी गई, लेकिन समय रहते उनका समाधान नहीं किया गया। लगातार समस्या बने रहने से विद्यार्थियों में नाराजगी बढ़ती गई और मंगलवार को उन्होंने विद्यालय के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर अपनी बात प्रशासन के सामने रखने का निर्णय लिया।
विरोध के दौरान विद्यार्थियों ने विद्यालय के प्राचार्य के कथित व्यवहार को लेकर भी शिकायतें अधिकारियों के सामने रखीं। कुछ छात्र-छात्राओं ने प्राचार्य पर उनके साथ कथित रूप से अभद्र एवं अनुचित व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकारियों ने विद्यार्थियों से अलग-अलग बातचीत कर उनकी शिकायतों और बयानों को दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की।
विद्यालय की एक महिला कर्मचारी ने भी प्राचार्य पर कथित रूप से ऊंची आवाज में बात करने और दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया। महिला कर्मचारी के अनुसार, प्राचार्य ने उन्हें अपने पास बुलाया था और वहां नहीं जाने पर कथित तौर पर नाराजगी जताते हुए ऊंची आवाज में बात की गई। महिला कर्मचारी ने प्राचार्य पर एक लाख रुपये की कथित मांग किए जाने का भी गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राशि मांगने का कारण पूछने पर कथित रूप से डीओ बनने के लिए पैसे की आवश्यकता होने की बात कही गई। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी वास्तविकता विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
सिलफिली विद्यालय में सामने आए इस घटनाक्रम ने केवल प्राचार्य पर लगे आरोपों को ही नहीं, बल्कि विद्यालय की व्यवस्थाओं और शिक्षा विभाग की निगरानी प्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि विद्यार्थियों के अनुसार लंबे समय से पंखे और अन्य आवश्यक सुविधाएं खराब थीं, तो समय रहते विद्यालय का निरीक्षण कर इन समस्याओं का समाधान क्यों नहीं कराया गया, यह भी जांच का विषय है। विद्यालय में विद्यार्थियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना विद्यालय प्रबंधन के साथ-साथ संबंधित विभाग की भी जिम्मेदारी है।
मामले की जानकारी मिलते ही लटोरी तहसीलदार चन्द्रशिला जायसवाल और विकासखंड शिक्षा अधिकारी विद्यालय पहुंचे। अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं तथा विद्यालय के कर्मचारियों से बातचीत की और उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना। अधिकारियों ने विद्यार्थियों को पूरे मामले की जांच कराने और शिकायतों के आधार पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
तहसीलदार के अनुसार, प्रथम जांच में सामने आई शिकायतों को देखते हुए प्राचार्य को 15 दिनों के लिए विद्यालय से हटाया गया है। इस अवधि में मामले की विस्तृत जांच की जाएगी। जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार आगे विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के आश्वासन के बाद विद्यार्थियों ने अपना विरोध प्रदर्शन और विद्यालय की तालाबंदी समाप्त कर दी।
सिलफिली की यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में विद्यार्थी अपने विद्यालयों की समस्याओं और व्यवस्थाओं को लेकर अपनी आवाज उठाते दिखाई दे रहे हैं। विद्यार्थियों की शिकायतों को केवल विरोध प्रदर्शन के रूप में देखने के बजाय उनकी समस्याओं को सुनकर समय पर समाधान करना आवश्यक है, ताकि शिक्षा का वातावरण प्रभावित न हो और विद्यार्थियों को अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए आंदोलन का रास्ता न अपनाना पड़े।
अब इस पूरे मामले की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। एक तरफ विद्यार्थियों की मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें हैं, तो दूसरी तरफ प्राचार्य के व्यवहार और महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए आर्थिक मांग के गंभीर आरोप हैं। इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। फिलहाल प्रशासन ने प्रथम जांच के आधार पर प्राचार्य को 15 दिनों के लिए विद्यालय से हटाया है और विस्तृत जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
यह मामला शिक्षा विभाग के लिए भी एक संदेश है कि विद्यालयों में विद्यार्थियों की मूलभूत सुविधाओं, कर्मचारियों की शिकायतों और विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली की नियमित निगरानी जरूरी है। यदि शिकायतों का समय रहते समाधान होता रहे तो विद्यार्थियों को तालाबंदी और विरोध जैसे कदम उठाने की स्थिति से बचाया जा सकता है। अब विद्यार्थियों, अभिभावकों और विद्यालय से जुड़े लोगों को जांच के निष्कर्ष और विभाग की आगामी कार्रवाई का इंतजार है।

प्रदीप मिश्रा
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