त्वरित न्याय सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन
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भुवनेश्वर, ओडिशा
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजयानंद जी महाराज, ओड़िशा ब्यूरो
जिला अदालतों में दीवानी मामलों के प्रभावी प्रबंधन पर कार्यशाला, न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर जोर
भुवनेश्वर ACGN:- ओडिशा सरकार राज्य के नागरिकों को समयबद्ध और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने के लिए कानूनी व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में जिला अदालतों में दीवानी मामलों के बेहतर प्रबंधन और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शनिवार को लोक सेवा भवन में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला में सरकारी अधिवक्ताओं, अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ताओं तथा सहयोगी अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने किया। उन्होंने न्याय व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए कहा कि राज्य के प्रत्येक नागरिक को उचित और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
न्याय व्यवस्था में अधिवक्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण
कानून मंत्री ने कहा कि लोक अभियोजकों, अतिरिक्त लोक अभियोजकों और अधिवक्ताओं की भूमिका न्याय व्यवस्था को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में बेहद महत्वपूर्ण है। अधिवक्ता संवैधानिक व्यवस्था और न्यायपालिका का अभिन्न हिस्सा हैं। ऐसे में कानूनों और नियमों की व्यापक समीक्षा के साथ न्यायिक प्रक्रिया को सरल, प्रभावी और समयबद्ध बनाने पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि आम नागरिक को न्याय प्राप्त करने में अनावश्यक देरी न हो, इसके लिए न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े सभी पक्षों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। जिला अदालतों में लंबित मामलों के प्रभावी प्रबंधन और प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करने से न्याय व्यवस्था की कार्यक्षमता को और मजबूत किया जा सकता है।
तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल पर जोर
मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने न्यायिक प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभावी उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक का उचित और समयबद्ध इस्तेमाल न्यायिक प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि बदलते दौर में न्याय व्यवस्था को भी आधुनिक तकनीकी संसाधनों के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य तकनीकी साधनों का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग मामलों के प्रबंधन, दस्तावेजों के विश्लेषण और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायक हो सकता है।
कार्यशाला का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और अधिवक्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा दीवानी मामलों के प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से लोगों को जल्द और बेहतर न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक कदमों पर विचार करना रहा।
प्रदीप मिश्रा
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