एमएसएमई के लिए बड़ी राहत: भुगतान विवादों का होगा तेज निपटारा, बकाया वसूली होगी आसान
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नई दिल्ली
By ACGN – 7647981711, 9303948009
मध्यस्थता से लेकर पंचाट तक की प्रक्रिया को समयबद्ध करने की तैयारी, टीआरईडीएस के जरिए भुगतान में तेजी, छोटे कारोबारियों के लिए आसान होगा कारोबार
नई दिल्ली ACGN: देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत बनाने और छोटे कारोबारियों के सामने लंबे समय से चली आ रही भुगतान संबंधी परेशानियों को कम करने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं। संशोधित व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य एमएसएमई को समय पर भुगतान दिलाना, भुगतान विवादों का शीघ्र समाधान करना, बकाया राशि की वसूली को प्रभावी बनाना और कारोबार के लिए अधिक भरोसेमंद वातावरण तैयार करना है।
एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था में रोजगार, उत्पादन, निर्यात और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों का बड़ा आधार हैं। लेकिन छोटे उद्यमों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक खरीदारों से समय पर भुगतान प्राप्त करना रही है। कई बार सामान या सेवाएं उपलब्ध कराने के बाद भुगतान लंबे समय तक अटक जाता है। इससे छोटे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी प्रभावित होती है और उन्हें कर्मचारियों का वेतन, कच्चा माल, बिजली, परिवहन तथा अन्य खर्च चलाने में कठिनाई होती है। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए संशोधित प्रावधानों में विवाद समाधान और बकाया वसूली की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया गया है।
मध्यस्थता खत्म होने के बाद 30 दिन में पंचाट की ओर बढ़ेगा मामला
एमएसएमई से जुड़े भुगतान विवादों के समाधान के लिए सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद यानी एमएसईएफसी की भूमिका महत्वपूर्ण है। संशोधित व्यवस्था के अनुसार यदि मध्यस्थता के माध्यम से विवाद का समाधान नहीं हो पाता है और मध्यस्थता की प्रक्रिया समाप्त हो जाती है, तो संबंधित मामले को 30 दिनों के भीतर पंचाट के लिए भेजना होगा। इसके बाद पक्षकारों की ओर से मामले से संबंधित दावे और जवाब यानी आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद एमएसईएफसी या वैकल्पिक विवाद समाधान सेवा उपलब्ध कराने वाली संबंधित संस्था अथवा केंद्र को 90 दिनों के भीतर पंचाट का निर्णय यानी पुरस्कार देने का प्रावधान किया गया है। इसका सीधा उद्देश्य यह है कि भुगतान विवाद वर्षों तक लंबित न रहें और छोटे उद्यमियों को अपने बकाया धन के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया में फंसे रहने की स्थिति से राहत मिल सके।
बकाया राशि की वसूली में भी बड़ा बदलाव
संशोधित व्यवस्था में एमएसएमई के पक्ष में मध्यस्थता से हुआ समझौता या एमएसईएफसी द्वारा दिया गया पंचाट पुरस्कार महत्वपूर्ण बनाया गया है। धारा 18 के अंतर्गत मध्यस्थता सेवा प्रदाता या वैकल्पिक विवाद समाधान संस्था के माध्यम से हुए समझौते अथवा दिए गए पंचाट पुरस्कार की राशि की वसूली अब भू-राजस्व के बकाये की तरह किए जाने की व्यवस्था की गई है।
इसके लिए उस क्षेत्र के जिला कलेक्टर, उपायुक्त अथवा अधिसूचित प्राधिकारी के माध्यम से कार्रवाई की जा सकेगी, जहां खरीदार की संपत्ति स्थित है। यह प्रावधान छोटे उद्यमियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्हें अपने पक्ष में निर्णय आने के बाद भी राशि प्राप्त करने में कई बार अलग प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है। बकाया वसूली को अधिक प्रभावी बनाने से एमएसएमई को वास्तविक राहत मिलने की उम्मीद है।
टीआरईडीएस के माध्यम से भुगतान में आएगी तेजी
एमएसएमई को समय पर भुगतान दिलाने के लिए व्यापार प्राप्य बट्टाकरण प्रणाली यानी टीआरईडीएस को भी अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है। संशोधित व्यवस्था के तहत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के सभी उपक्रमों को एमएसएमई से वस्तुओं और सेवाओं की खरीद से संबंधित चालानों के निपटान को टीआरईडीएस मंच के माध्यम से करने की व्यवस्था की गई है।
टीआरईडीएस ऐसा संस्थागत मंच है जिसके माध्यम से एमएसएमई अपने लंबित चालानों के आधार पर भुगतान प्राप्त करने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। इससे छोटे कारोबारियों को अपनी राशि के लिए लंबे समय तक खरीदार के भुगतान का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उनकी कार्यशील पूंजी में भी सुधार हो सकता है।
राज्यों के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को भी टीआरईडीएस के माध्यम से चालान निपटाने के लिए प्रोत्साहित करने की व्यवस्था की गई है।
टीआरईडीएस पर बढ़ा कारोबार
सरकारी आंकड़ों के अनुसार टीआरईडीएस पर चालान बट्टाकरण की मात्रा में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में करीब 40 हजार करोड़ रुपये के चालानों का बट्टाकरण हुआ था, जो बढ़कर 2025-26 में लगभग 3.47 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के चालान निपटान को अनिवार्य रूप से टीआरईडीएस के माध्यम से करने की व्यवस्था एमएसएमई के भुगतान संबंधी संकट को और कम करने में मददगार हो सकती है।
राज्यों को अधिक एमएसईएफसी बनाने की सुविधा
एमएसएमई से जुड़े विवादों की संख्या को देखते हुए केवल एक सुविधा परिषद के माध्यम से सभी मामलों का निपटारा करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी समस्या को देखते हुए संशोधित व्यवस्था में एमएसईएफसी की संरचना को अधिक लचीला बनाने का प्रावधान किया गया है। अब राज्य सरकारें आवश्यकता के अनुसार एक से अधिक एमएसईएफसी गठित कर सकेंगी, जिससे भुगतान विवादों के निपटारे में तेजी लाई जा सकेगी। इसके साथ ही राज्य सरकारों को एमएसईएफसी से संबंधित नियम बनाने की शक्ति भी दी गई है। इससे अलग-अलग राज्यों में स्थानीय जरूरतों और मामलों की संख्या के अनुसार सुविधा परिषदों की व्यवस्था विकसित की जा सकेगी।
इस बदलाव का उद्देश्य स्पष्ट है मामले कम लंबित हों, सुनवाई की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो और छोटे उद्यमियों को अपने बकाये के लिए लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े।
कारोबार में आसानी के लिए दंड व्यवस्था में भी बदलाव
संशोधित प्रावधानों में केवल भुगतान व्यवस्था को ही नहीं, बल्कि एमएसएमई क्षेत्र में कारोबार करने में आसानी बढ़ाने और नियमों को अधिक भरोसे पर आधारित बनाने पर भी जोर दिया गया है।
पहले एमएसएमई विकास अधिनियम के तहत कुछ मामलों में पंजीकरण संबंधी जानकारी दाखिल नहीं करने या आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराने पर दोषसिद्धि और जुर्माने की व्यवस्था थी। अब इन प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करते हुए दीवानी दंड की क्रमिक व्यवस्था अपनाई गई है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था पहली बार गलत जानकारी उपलब्ध कराती है तो उसे पहले चेतावनी दी जाएगी। दूसरी और उसके बाद की घटनाओं में दंड लगाया जा सकेगा। इस बदलाव का उद्देश्य छोटे कारोबारियों और उद्यमियों पर अनावश्यक आपराधिक कार्रवाई का दबाव कम करना तथा उन्हें नियमों का पालन करने के लिए सुधार का अवसर देना है।
बकाया राशि और ब्याज की जानकारी नहीं देने पर भी क्रमिक कार्रवाई
खरीदारों द्वारा अपने वार्षिक लेखों में एमएसएमई की बकाया राशि और उस पर देय ब्याज का खुलासा नहीं करने से संबंधित प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। अब पहली बार ऐसी स्थिति सामने आने पर चेतावनी, दूसरी बार दंड और तीसरी तथा उसके बाद की स्थिति में जुर्माने की व्यवस्था की गई है।
सरकार का मानना है कि इस तरह की क्रमिक दंड व्यवस्था से एक ओर नियमों का पालन सुनिश्चित होगा, वहीं दूसरी ओर कारोबारियों के लिए नियामकीय वातावरण अधिक सहज और भरोसेमंद बनेगा।
छोटे कारोबारियों के लिए क्या बदलेगा?
इन प्रावधानों का सबसे बड़ा असर उन छोटे कारोबारियों पर पड़ने की उम्मीद है जिनकी बड़ी मात्रा में राशि बड़े खरीदारों, कंपनियों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के पास अटक जाती है।
यदि विवाद होने पर समाधान की प्रक्रिया समयबद्ध होती है, भुगतान संबंधी निर्णय को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है और टीआरईडीएस के जरिए चालान का भुगतान तेजी से होता है, तो एमएसएमई की कार्यशील पूंजी की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
छोटे उद्योगों के लिए नकदी प्रवाह बेहद महत्वपूर्ण होता है। किसी कारोबारी के पास ऑर्डर होने के बावजूद यदि पिछली बिक्री का भुगतान समय पर नहीं आता तो वह नया कच्चा माल खरीदने, मजदूरी देने और उत्पादन जारी रखने में कठिनाई महसूस कर सकता है। इसलिए समय पर भुगतान केवल कारोबारी सुविधा नहीं बल्कि छोटे उद्योगों के अस्तित्व और विस्तार से जुड़ा विषय भी है।
एमएसएमई को विस्तार और रोजगार बढ़ाने का अवसर
सरकार के अनुसार मजबूत एमएसएमई क्षेत्र देश की समावेशी, टिकाऊ और रोजगार आधारित आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। छोटे और मध्यम उद्यम बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर उत्पादन और सेवाओं को बढ़ावा देते हैं।
भुगतान व्यवस्था में सुधार होने से उद्यमियों को कारोबार बढ़ाने के लिए अधिक भरोसा मिल सकता है। विवादों के शीघ्र समाधान और बकाया राशि की बेहतर वसूली से उद्यमियों को अपनी पूंजी को दोबारा कारोबार में लगाने का अवसर मिलेगा।
इसके साथ ही एमएसएमई के औपचारिकरण को बढ़ावा देने और छोटे उद्यमों को आगे चलकर बड़े और प्रतिस्पर्धी उद्यमों के रूप में विकसित करने की दिशा में भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से जुड़ा कदम
सरकार ने इन संशोधनों को ‘विकसित भारत @2047’ के व्यापक दृष्टिकोण से जोड़ा है। सरकार का मानना है कि यदि एमएसएमई क्षेत्र को मजबूत वित्तीय आधार, समय पर भुगतान, तेज विवाद समाधान और सरल नियामकीय व्यवस्था उपलब्ध होती है तो यह क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति में और बड़ी भूमिका निभा सकता है।
कुल मिलाकर संशोधित व्यवस्था का फोकस समय पर भुगतान, तेज विवाद निपटारा, बकाया वसूली को प्रभावी बनाना, टीआरईडीएस का विस्तार, अधिक एमएसईएफसी की स्थापना और भरोसे पर आधारित नियमन पर है।
यदि इन प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर सुनिश्चित होता है तो छोटे और मध्यम उद्यमियों को अपने कारोबार में नकदी संकट और भुगतान विवादों से काफी राहत मिल सकती है। इससे न केवल एमएसएमई क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि रोजगार, उत्पादन और देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में भी इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
प्रदीप मिश्रा
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