“गांव की चरागाह से उद्योग की जमीन तक… चंदेरी में आखिर क्या चल रहा है?” 59 एकड़ चरागाह पर मो.अकबर ने उठाए सवाल
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बलौदाबाजार-भाटापारा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
चरागाह की जमीन पर किसकी नजर? चंदेरी में 59 एकड़ को लेकर बड़ा सवाल, ग्रामसभा के विरोध के बावजूद औद्योगिक क्षेत्र के लिए भूमि दिए जाने का आरोप, पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की
बलौदाबाजार-भाटापारा ACGN:- सिमगा तहसील के ग्राम चंदेरी में चरागाह भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए दिए जाने का मामला अब चर्चा में आ गया है। पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि गांव की करीब 23.93 हेक्टेयर यानी लगभग 59 एकड़ चरागाह भूमि को औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के लिए उद्योग विभाग को सौंपने की कार्रवाई की गई है, जबकि ग्राम पंचायत और ग्रामसभा दोनों इस भूमि को उद्योग के लिए देने का विरोध कर चुके हैं।

मोहम्मद अकबर ने कहा कि 23 फरवरी 2024 को दामाखेड़ा में आयोजित कबीरपंथ के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने दामाखेड़ा के 10 किलोमीटर के दायरे में उद्योग नहीं लगाने को लेकर आश्वासन दिया था। उनके मुताबिक चंदेरी इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है और ऐसे में यहां औद्योगिक क्षेत्र के लिए चरागाह भूमि का उपयोग किए जाने की कार्रवाई मुख्यमंत्री के आश्वासन को लेकर सवाल खड़े करती है।
पूर्व मंत्री ने बताया कि चंदेरी तहसील के खसरा नंबर 1660, 2206, 2207 और 1743 की कुल करीब 23.93 हेक्टेयर भूमि को 6 फरवरी 2026 को उद्योग विभाग के आधिपत्य में दिए जाने की कार्रवाई की गई। उनका कहना है कि यह भूमि राजस्व अभिलेखों में चरागाह के रूप में दर्ज है और आसपास की करीब 8 से 10 ग्राम पंचायतों के गोवंश तथा अन्य मवेशियों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक चरागाह के रूप में उपयोग होती रही है।
मामले में ग्राम पंचायत के विरोध का भी हवाला दिया गया है। अकबर के अनुसार 20 दिसंबर 2025 को ग्राम पंचायत चंदेरी की बैठक में उक्त भूमि को उद्योग के लिए हस्तांतरित नहीं करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसके बाद 30 जुलाई 2026 को ग्रामसभा में भी ग्रामीणों ने चरागाह भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए देने का विरोध किया। इसके बावजूद संबंधित भूमि का उद्योग के नाम दर्ज होने का आरोप लगाया गया है।
पूर्व मंत्री ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के 10 मार्च 2011 के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित भूमि को अन्य प्रयोजन के लिए आवंटित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेशों और शासन के निर्देशों के पालन को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
अकबर का कहना है कि जब ग्राम पंचायत और ग्रामसभा दोनों स्तर पर ग्रामीणों ने भूमि हस्तांतरण का विरोध किया है, तब शासन स्तर पर इस मामले में दोबारा विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से तत्काल मामले का संज्ञान लेने और राजस्व मंत्री से पूरे मामले में सरकार की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि भूमि वास्तव में चरागाह के रूप में दर्ज है और ग्रामीण इसके औद्योगिक उपयोग का विरोध कर रहे हैं, तो इसके बावजूद भूमि को उद्योग विभाग के आधिपत्य में देने की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी। साथ ही ग्रामसभा के निर्णय और राजस्व अभिलेखों की स्थिति को लेकर भी अब स्पष्ट जवाब की जरूरत महसूस की जा रही है।
हालांकि, इस मामले में पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर द्वारा लगाए गए आरोपों पर शासन और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग के आधिकारिक स्पष्टीकरण और दस्तावेजों के आधार पर ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल चंदेरी की चरागाह भूमि को लेकर राजनीतिक बयानबाजी के साथ ग्रामीण स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं।
प्रदीप मिश्रा
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