अतिक्रमण के आगे हारी व्यवस्था: बंद रास्ते ने छीना सुरक्षित प्रसव का अधिकार
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647 98171193039 48009
संवाददाता – सौरभ साहू की विशेष रिपोर्ट
रास्ता बंद, सिस्टम बेबस: घर तक नहीं पहुंच सकी एंबुलेंस, खेत में हुई गर्भवती की डिलीवरी
तीन महीने से रास्ता खुलवाने के लिए भटकता रहा परिवार, शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई; स्वास्थ्य व्यवस्था और राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
प्रतापपुर/सूरजपुर। प्रतापपुर विकासखंड के ग्राम धुरिया से सरकारी व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक तंत्र दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला तक 108 एंबुलेंस केवल इसलिए नहीं पहुंच सकी क्योंकि उसके घर तक जाने वाला रास्ता बंद था। हालात इतने गंभीर हो गए कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही खेत में महिला की डिलीवरी करानी पड़ी।
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति को उजागर करती है। सरकार द्वारा मातृ एवं शिशु सुरक्षा, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और गांव-गांव तक चिकित्सा सुविधा पहुंचाने के दावे तब खोखले नजर आते हैं, जब एक गर्भवती महिला को केवल रास्ता बंद होने के कारण अस्पताल तक नहीं पहुंचाया जा सके।

परिजनों के अनुसार महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा को सूचना दी गई। एंबुलेंस गांव तक पहुंची, लेकिन घर तक जाने वाला मार्ग बंद होने के कारण आगे नहीं बढ़ सकी। मजबूरी में परिजन महिला को पैदल सहारा देकर खेत की ओर लेकर निकले, लेकिन रास्ते में ही प्रसव पीड़ा तेज हो गई और खेत में ही सुरक्षित प्रसव कराना पड़ा। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए बेहद पीड़ादायक और व्यवस्था की विफलता का प्रतीक बन गया।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनके घर तक जाने वाला रास्ता सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण के कारण पिछले कई महीनों से अवरुद्ध है। परिवार का कहना है कि वे लगभग तीन महीने से नायब तहसीलदार कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। इस संबंध में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। यदि समय रहते प्रशासन ने शिकायतों का निराकरण किया होता, तो संभवतः गर्भवती महिला को खेत में प्रसव कराने जैसी दर्दनाक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि गांवों में लोगों के घर तक पहुंचने का रास्ता ही सुरक्षित और सुगम नहीं होगा, तो एंबुलेंस, स्वास्थ्य योजनाएं और सरकारी सुविधाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगी। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
यह मामला केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता अवरुद्ध होने की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले से थी, फिर भी समाधान नहीं निकाला गया। इसका खामियाजा एक गर्भवती महिला और उसके परिवार को भुगतना पड़ा।

ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, शिकायतों की अनदेखी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने, बंद रास्ते को तत्काल खुलवाने तथा गांव में स्थायी सड़क एवं आपातकालीन पहुंच मार्ग की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अब भी प्रशासन नहीं जागा तो भविष्य में इससे भी बड़ा हादसा हो सकता है।

धुरिया गांव की यह घटना शासन और प्रशासन के लिए एक गंभीर चेतावनी है। सुशासन का अर्थ केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि संकट की घड़ी में हर नागरिक तक सरकारी सुविधा बिना किसी बाधा के समय पर पहुंचे। जब एक एंबुलेंस घर तक नहीं पहुंच पाती और खेत प्रसूति कक्ष बन जाता है, तब व्यवस्था की सफलता नहीं बल्कि उसकी विफलता सामने आती है।
प्रदीप मिश्रा
संपादक, अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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