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गांवों में पर्यटन का नया खेल, 30 होमस्टे से खुलेगा रोजगार का रास्ता!

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जशपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू

PM-JUGA के तहत बगीचा-मयाली-जशपुर क्लस्टर के 6 जनजातीय गांवों में विकसित होंगे 30 होमस्टे, करीब 1.80 करोड़ रुपए होंगे खर्च

जशपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ में जनजातीय पर्यटन को गांवों तक पहुंचाने और स्थानीय परिवारों को पर्यटन से सीधे जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान यानी PM-JUGA के अंतर्गत जशपुर जिले के बगीचा-मयाली-जशपुर क्लस्टर में क्लस्टर आधारित होमस्टे परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के तहत जनजातीय अंचल के छह गांवों में कुल 30 नए होमस्टे विकसित किए जाएंगे। सरकार की योजना है कि पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने के साथ स्थानीय परिवारों को रोजगार और आय के नए अवसरों से जोड़ा जाए।
परियोजना के अंतर्गत किंकेल, कमतरा, डंगरी, महनई, सरुधाप और पंडरापाठ गांवों का चयन किया गया है। प्रत्येक गांव में पांच होमस्टे तैयार किए जाने का प्रस्ताव है। पूरे क्लस्टर के विकास पर लगभग 1.80 करोड़ रुपए खर्च किए जाने की योजना है। होमस्टे निर्माण के साथ गांवों में पर्यटकों और स्थानीय समुदाय के लिए आवश्यक सामुदायिक सुविधाओं के विकास का भी प्रावधान किया गया है।


होटल नहीं, गांव के घर में मिलेगा जशपुर का असली अनुभव
इस परियोजना की खास बात यह है कि पर्यटन को केवल होटल और रिसॉर्ट तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय समुदाय को इसका सीधा भागीदार बनाने का प्रयास किया जा रहा है। होमस्टे के माध्यम से पर्यटक स्थानीय परिवारों के बीच रहकर जशपुर की जनजातीय संस्कृति, खान-पान, लोक परंपराओं, प्राकृतिक वातावरण और ग्रामीण जीवन को करीब से जान सकेंगे।
इससे पर्यटन से होने वाली आय का एक हिस्सा सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंचने की संभावना है। स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने से गांवों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
प्रस्तावित होमस्टे स्थानीय परिवेश और पर्यटकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक गांव में सामुदायिक सुविधाओं के लिए पांच लाख रुपए तक के कार्य प्रस्तावित हैं। इन सुविधाओं से पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिलने के साथ ग्रामीणों के लिए सामूहिक उपयोग की आधारभूत सुविधाएं भी विकसित हो सकती हैं।


                  प्रकृति के करीब ठहरेंगे पर्यटक
होमस्टे क्लस्टर का चयन क्षेत्र की पर्यटन क्षमता को ध्यान में रखकर किया गया है। प्रस्तावित गांव बगीचा और जशपुर नगर के साथ कैलाश गुफा, खुड़ियारानी गुफा, बादलखोल अभयारण्य, रानीदाह जलप्रपात, देशदेखा पहाड़ और लोरोघाट जैसे प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के आसपास स्थित हैं।
इन क्षेत्रों में ठहरने की बेहतर सुविधा उपलब्ध होने से पर्यटकों के लिए केवल एक दिन घूमकर लौटने के बजाय जशपुर में अधिक समय बिताने का अवसर बढ़ सकता है। इसका लाभ स्थानीय दुकानदारों, वाहन चालकों, गाइडों, खान-पान से जुड़े लोगों और अन्य छोटे व्यवसायों को भी मिल सकता है।


      गाइड से लेकर हस्तशिल्प तक रोजगार की नई राह
होमस्टे परियोजना का असर केवल कमरे उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहने वाला है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए आतिथ्य सेवा, स्थानीय भोजन, पर्यटक गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प और अन्य पर्यटन आधारित गतिविधियों में काम के अवसर पैदा हो सकते हैं।
जशपुर की पारंपरिक संस्कृति, स्थानीय व्यंजन और हस्तशिल्प को पर्यटकों तक पहुंचाने से स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ने की भी संभावना है। यदि इन गतिविधियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ा गया तो पर्यटन ग्रामीण परिवारों के लिए आय का अतिरिक्त साधन बन सकता है।
मंत्री राजेश अग्रवाल बोले – स्थानीय संस्कृति से जुड़ेगा पर्यटन
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय और ग्रामीण संस्कृति प्रदेश की विशिष्ट पहचान है। सरकार का प्रयास है कि इस सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए स्थानीय समुदाय को पर्यटन से प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिले।
उन्होंने कहा कि जशपुर प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विशिष्ट लोक परंपराओं से भरपूर क्षेत्र है। PM-JUGA के तहत स्वीकृत क्लस्टर होमस्टे परियोजना पर्यटन को गांवों तक पहुंचाने और स्थानीय परिवारों को इसके आर्थिक लाभ से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि जशपुर आने वाले पर्यटक केवल यहां की प्रकृति को देखकर वापस न लौटें, बल्कि यहां के जनजातीय जीवन, संस्कृति और परंपराओं को भी करीब से समझें। स्थानीय युवाओं और महिलाओं को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने से रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और जशपुर की सांस्कृतिक पहचान देश-दुनिया तक पहुंच सकती है।


     पर्यटन का पैसा गांव तक पहुंचे – सौमिल रंजन चौबे
छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे ने कहा कि पर्यटन का लाभ केवल बड़े पर्यटन स्थलों या होटल व्यवसाय तक सीमित नहीं रहना चाहिए। गांव और स्थानीय परिवारों को भी पर्यटन का प्रत्यक्ष भागीदार बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जशपुर का होमस्टे क्लस्टर स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और आजीविका को एक साथ जोड़ने वाला मॉडल बन सकता है। इससे पर्यटकों को स्थानीय जीवन का वास्तविक अनुभव मिलेगा और जनजातीय परिवारों के लिए स्थायी आय के नए अवसर विकसित हो सकेंगे।


     क्या जशपुर बनेगा जनजातीय पर्यटन का बड़ा केंद्र?
जशपुर में छह गांवों के भीतर 30 होमस्टे विकसित करने की यह पहल पर्यटन को प्रमुख स्थलों से आगे ग्रामीण क्षेत्रों तक ले जाने की कोशिश है। यदि परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार जमीन पर उतरती है और स्थानीय परिवारों को प्रशिक्षण, बाजार तथा पर्यटकों से जोड़ने की व्यवस्था मजबूत रहती है, तो इसका लाभ लंबे समय तक गांवों तक पहुंच सकता है।
प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प और ग्रामीण जीवन को एक साथ पर्यटन से जोड़ने वाली यह परियोजना आने वाले समय में जशपुर को छत्तीसगढ़ के प्रमुख जनजातीय एवं ग्रामीण पर्यटन केंद्र के रूप में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

प्रदीप मिश्रा
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