आख़िर क्या है इस कलाकृति का रहस्य?
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गंजाम (बरहमपुर), ओडिशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता – अनिल कुमार चौधरी
बेकार और अनुपयोगी वस्तुओं पर भगवान जगन्नाथ की अद्भुत छवि उकेरकर युवा कलाकार शताब्दी पाणिग्राही ने कला और आस्था का अनूठा संगम प्रस्तुत किया
गंजाम (बरहमपुर), 25 जुलाई 2026। कभी बेकार समझी जाने वाली वस्तुएँ जब किसी कलाकार के हाथों में पहुँचती हैं तो वे एक नई पहचान हासिल कर लेती हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है ओडिशा के गंजाम जिले के बरहमपुर की युवा कलाकार शताब्दी पाणिग्राही ने। उन्होंने रथयात्रा के पावन अवसर पर अनुपयोगी वस्तुओं, पारंपरिक चांदुआ, पत्थर, कपड़े, पत्तियों और अन्य सामग्री पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और माता सुभद्रा की ऐसी मनमोहक कलाकृतियाँ तैयार की हैं, जिन्हें देखकर हर कोई आश्चर्यचकित हो रहा है।
बरहमपुर के खजुरिया निवासी त्रिलोचन पाणिग्राही और मिनती पाणिग्राही की पुत्री शताब्दी ने अपनी कला के माध्यम से यह संदेश दिया है कि सृजनात्मक सोच से बेकार वस्तुओं को भी नई उपयोगिता और नया जीवन दिया जा सकता है। उनकी कलाकृतियों में न केवल भगवान जगन्नाथ के प्रति गहरी आस्था झलकती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) का संदेश भी स्पष्ट दिखाई देता है।
शताब्दी ने उद्भिद विज्ञान (बॉटनी) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स डेवलपमेंट से क्राफ्ट डिज़ाइनिंग का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता को कला के साथ जोड़ते हुए पारंपरिक और आधुनिक शैली का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया है। पिछले सात वर्षों से वे निरंतर चित्रकला और हस्तशिल्प के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं तथा अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
विशेष बात यह है कि उन्होंने केवल कैनवास पर ही नहीं, बल्कि पारंपरिक चांदुआ, पत्थर, कपड़े, पत्तियों, लकड़ी और अन्य छोटी-बड़ी अनुपयोगी वस्तुओं पर भी भगवान जगन्नाथ की आकर्षक पेंटिंग बनाई हैं। उनकी ट्राइबल पेंटिंग भी कला प्रेमियों के बीच काफी पसंद की जा रही है। हर कलाकृति में रंगों का संतुलन, सूक्ष्म रेखांकन और ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत की झलक साफ दिखाई देती है।
शताब्दी बताती हैं कि कला के प्रति उनका पहला लगाव उनकी माता मिनती पाणिग्राही से मिला, जिन्होंने बचपन से उन्हें हस्तशिल्प और सृजनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा आदिवासी कला गुरु दीनबंधु सोरेन के मार्गदर्शन और सहयोग ने उनकी कला को नई दिशा और नई ऊँचाइयाँ दीं।
उनका सपना है कि वे भविष्य में ओडिशा स्टेट हैंडीक्राफ्ट अवॉर्ड तथा राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार (नेशनल हैंडीक्राफ्ट अवॉर्ड) प्राप्त कर राज्य और देश का नाम रोशन करें। उनका मानना है कि भारतीय पारंपरिक कला और लोक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए निरंतर नवाचार और समर्पण आवश्यक है।
शताब्दी पाणिग्राही की यह अनूठी पहल केवल एक कलाकृति नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि आस्था, पर्यावरण संरक्षण और रचनात्मकता जब एक साथ मिलते हैं, तो साधारण से साधारण वस्तु भी असाधारण बन जाती है।
प्रदीप मिश्रा
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