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हर घर मुनगा अभियान शुरू, अब पौधे की निगरानी से तय होगा नतीजा!

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सूरजपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू

तीजा-पोरा पर्व पर मुख्यमंत्री निवास से राज्यव्यापी अभियान की शुरुआत, 52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए 7.88 लाख परिवारों तक पहुंचेगा पोषण का संदेश

सूरजपुर ACGN:- पारंपरिक लोकपर्व तीजा-पोरा के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास परिसर से राज्यव्यापी ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी ठाकुर राजवाड़े की विशेष उपस्थिति में हुए कार्यक्रम के दौरान अभियान के आधिकारिक लोगो का अनावरण किया गया। साथ ही पोषण जागरूकता के लिए ‘सुपोषण रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
      मुनगा को पोषण अभियान का आधार बनाने की पहल
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने अभियान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुनगा यानी सहजन आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन से भरपूर प्राकृतिक खाद्य स्रोत है। महिलाओं में एनीमिया और बच्चों में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए मुनगा उपयोगी साबित हो सकता है। अभियान के तहत प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों, पोषण वाटिकाओं और ग्रामीण परिवारों की बाड़ियों में मुनगा के पौधे लगाए और वितरित किए जा रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाली माताओं, किशोरी बालिकाओं तथा बच्चों को स्थानीय स्तर पर पौष्टिक खाद्य उपलब्ध कराने से जोड़ना है, ताकि परिवार अपनी बाड़ी में उगाए मुनगा का उपयोग भोजन में कर सकें।
      छह योजनाओं के रोडमैप में पहली पहल जमीन पर
महिला एवं बाल विकास विभाग में हाल में किए गए प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद विभाग की ओर से छह नई जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करने का रोडमैप तैयार किए जाने की बात कही गई है। इसी क्रम में ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान को पहली महत्वपूर्ण पहल के रूप में जमीन पर उतारा गया है।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के अनुसार विभाग की टीम शेष पांच योजनाओं के ड्राफ्ट और उनके धरातलीय क्रियान्वयन मॉडल को अंतिम रूप देने में जुटी है। इन योजनाओं को महिला सशक्तिकरण, बाल देखरेख और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों से जोड़ते हुए चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है।
          मंत्रालय से गांव तक तय की गई जिम्मेदारी
अभियान को केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रखने के लिए अलग-अलग स्तर पर जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं। राज्य स्तर पर विभागीय सचिव की अध्यक्षता वाली समिति नीतिगत मार्गदर्शन करेगी। जिला स्तर पर कलेक्टर और विकासखंड स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में अंतर-विभागीय समन्वय समितियां अभियान के संचालन में भूमिका निभाएंगी।
इसके अलावा जिला कार्यक्रम अधिकारी, परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षक तथा गांव स्तर पर काम करने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को भी अभियान से जोड़ा गया है।
विभाग के अनुसार प्रदेश के 52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से करीब 7.88 लाख परिवारों को अभियान से जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र क्षेत्र में 15 मुनगा पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी निर्धारित की गई है।


पौधा लगाया, अब बचा भी तो कितने? डिजिटल निगरानी से होगा मूल्यांकन
अभियान की सबसे महत्वपूर्ण बात पौधरोपण के बाद उनकी स्थिति पर निगरानी रखने की व्यवस्था बताई जा रही है। विभाग के अनुसार पौधों के जीवित रहने, क्षति होने और आवश्यकता पड़ने पर पुनः रोपण की स्थिति दर्ज करने के लिए विशेष डिजिटल डैशबोर्ड तैयार किया गया है।
इसके माध्यम से उच्च स्तर से लेकर मैदानी स्तर तक अभियान की नियमित समीक्षा और अधिकारियों-कर्मचारियों के कार्यों का मूल्यांकन किए जाने की योजना है। इससे अभियान की सफलता को केवल लगाए गए पौधों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और जीवित रहने की स्थिति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
     मंत्री ने परिवारों से किया पौधे की देखभाल का आग्रह
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रदेशवासियों से तीजा-पोरा के अवसर पर अपनी बाड़ी में मुनगा का पौधा लगाने और उसकी संतान की तरह देखभाल करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास से स्वस्थ, सुपोषित और सशक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
उन्होंने परिवारों से सप्ताह में कम से कम तीन बार मुनगा फल, मुनगा भाजी और मुनगा फूल को भोजन में शामिल करने का भी आग्रह किया।
अब इस अभियान की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि लगाए गए पौधों में से कितने पौधे आने वाले समय में वास्तव में जीवित रहते हैं और कितने परिवार नियमित रूप से मुनगा को अपने भोजन का हिस्सा बनाते हैं। डिजिटल निगरानी और मैदानी जिम्मेदारी की व्यवस्था यदि प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो ‘हर घर मुनगा’ केवल एक अभियान नहीं बल्कि ग्रामीण परिवारों के पोषण से जुड़ी दीर्घकालिक पहल बन सकती है।

प्रदीप मिश्रा
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