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20 साल की रोज़ी पर संकट! आखिर किसके निशाने पर बालको के छोटे व्यापारी?

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :-
नोटिस से मचा हड़कंप, व्यापारियों का आरोप— बिना पुनर्वास उजाड़ने की तैयारी, मंत्री के निर्देशों की भी अनदेखी
कोरबा ACGN:- बालको नगर के मिनीमाता चौक, सेक्टर-3 स्थित वार्ड क्रमांक 43 में लगभग दो दशक से अपनी छोटी-छोटी दुकानों और गुमटियों के माध्यम से परिवार का भरण-पोषण कर रहे लघु उद्यमियों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। नगर पालिक निगम कोरबा के बालको जोन द्वारा जारी अतिक्रमण नोटिस के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। व्यापारियों का आरोप है कि बिना किसी वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था किए उन्हें उजाड़ने की तैयारी की जा रही है, जबकि इसी स्थान से उनके परिवारों की रोज़ी-रोटी वर्षों से चल रही है।


17 जुलाई 2026 को लघु व्यापारियों ने सामूहिक रूप से नगर पालिक निगम कोरबा के जोन कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत कर 14 जुलाई 2026 को जारी अतिक्रमण नोटिस को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि वे पिछले लगभग 20 वर्षों से इसी स्थान पर व्यवसाय कर रहे हैं। इस दौरान बालको प्रबंधन और नगर निगम प्रशासन उनकी मौजूदगी से पूरी तरह अवगत रहे हैं। समय-समय पर निरीक्षण भी हुए, लेकिन कभी उन्हें अवैध कब्जाधारी नहीं बताया गया। ऐसे में अचानक नोटिस जारी कर अतिक्रमणकारी घोषित करना उनके लिए मानसिक और आर्थिक दोनों तरह का आघात है।


व्यापारियों ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि 17 दिसंबर 2025 को प्रदेश के उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने बालको प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मिनीमाता चौक के छोटे व्यापारियों को हटाने के बजाय उन्हें उसी क्षेत्र में व्यवस्थित किया जाए, ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो। व्यापारियों का आरोप है कि वर्तमान कार्रवाई मंत्री के निर्देशों की भावना के विपरीत दिखाई दे रही है और इससे यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि आखिर किसके आदेश पर वर्षों से व्यवसाय कर रहे गरीब परिवारों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।


लघु उद्यमियों का कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा या रियायत की मांग नहीं कर रहे, बल्कि केवल वही अधिकार चाहते हैं जो समान परिस्थितियों में कार्यरत अन्य व्यापारियों को प्राप्त हैं। उनका कहना है कि संविधान का अनुच्छेद-14 प्रत्येक नागरिक को समानता का अधिकार देता है और प्रशासनिक कार्रवाई में भी यही सिद्धांत लागू होना चाहिए।


व्यापारियों ने भारत सरकार के पथ विक्रेता (आजीविका का संरक्षण और पथ विक्रय का विनियमन) अधिनियम, 2014 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी छोटे व्यवसायी या पथ विक्रेता को तब तक नहीं हटाया जा सकता, जब तक टाउन वेंडिंग कमेटी द्वारा सर्वे कर उसे विधिवत वेंडिंग जोन में पुनर्स्थापित न किया जाए। बिना पुनर्वास के बेदखली इस कानून की मूल भावना के विपरीत होगी।


आवेदन में व्यापारियों ने मांग की है कि नगर निगम द्वारा जारी अतिक्रमण नोटिस तत्काल वापस लिया जाए, सभी प्रभावित व्यापारियों को संरक्षण दिया जाए तथा यदि किसी कारणवश स्थान परिवर्तन आवश्यक हो तो पहले सभी हितधारकों से चर्चा कर उसी क्षेत्र या आसपास उपयुक्त स्थान पर पुनर्व्यवस्थित किया जाए। उनका कहना है कि प्रशासन यदि संवेदनशीलता से निर्णय ले तो विकास और आजीविका दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।


इस संबंध में आवेदन की प्रतिलिपि उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, कलेक्टर कोरबा, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), महापौर, नगर निगम आयुक्त, पुलिस अधीक्षक, बालको प्रबंधन, वार्ड पार्षद हितानंद अग्रवाल, चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज तथा थाना प्रभारी बालकोनगर को भी भेजी गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल अतिक्रमण हटाने का मामला नहीं, बल्कि दर्जनों गरीब परिवारों के भविष्य और रोज़गार का प्रश्न है। जिन गुमटियों को प्रशासन अतिक्रमण मान रहा है, उन्हीं गुमटियों से वर्षों से कई परिवारों के घरों के चूल्हे जल रहे हैं। अब सबकी निगाहें नगर निगम प्रशासन और बालको प्रबंधन पर टिकी हैं कि वे कानून, मानवीय संवेदनाओं और पूर्व में दिए गए आश्वासनों के अनुरूप कोई न्यायपूर्ण समाधान निकालते हैं या नहीं।

प्रदीप मिश्रा
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