बालपुर में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन, शास्त्रसम्मत व्याख्या से श्रद्धालुओं को मिल रहा आध्यात्मिक मार्गदर्शन
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रायगढ़, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
जगन्नाथ रथयात्रा एवं गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर पितृमोक्षार्थ आयोजित कथा में उमड़ रही श्रद्धालुओं की आस्था, शास्त्रों के प्रमाणों से हो रहा जिज्ञासाओं का समाधान
रायगढ़ ACGN:- रायगढ़ जिले के ग्राम बालपुर में आषाढ़ शुक्ल पक्ष, भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा एवं गुप्त नवरात्रि के शुभ अवसर पर ब्राह्मण परिवार द्वारा अपने पितरों की शांति एवं मोक्ष की कामना से श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ का भव्य आयोजन किया गया है। धार्मिक आस्था और भक्ति से सराबोर इस आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
कथा वाचन का दायित्व सारंगढ़ क्षेत्र के ग्राम रेड़ा निवासी विद्वान एवं शास्त्रों के गहन अध्येता आचार्य पंडित विजयानंद शर्मा को सौंपा गया है। आचार्य श्री अपने सरल, प्रभावशाली एवं शास्त्रसम्मत प्रवचनों के माध्यम से श्रीमद्भागवत के गूढ़ रहस्यों को सहज भाषा में श्रद्धालुओं तक पहुंचा रहे हैं। उनके द्वारा दिए जा रहे उदाहरण, दृष्टांत एवं शास्त्रीय प्रमाणों से कथा न केवल रोचक बन रही है, बल्कि श्रोताओं की धार्मिक जिज्ञासाओं का भी संतोषजनक समाधान हो रहा है।
वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए आयोजकों द्वारा कथा स्थल पर विशाल एवं सुव्यवस्थित हॉल की व्यवस्था की गई है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रतिदिन आसपास के गांवों सहित दूर-दराज क्षेत्रों से भी श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं और सत्संग के दिव्य वातावरण का आनंद ले रहे हैं।
कथा के दौरान एक श्रद्धालु ने प्रश्न किया कि यदि गया धाम में पिंडदान एवं श्राद्ध कर दिया जाए तो क्या उसके बाद प्रतिवर्ष श्राद्ध करना आवश्यक है? इस जिज्ञासा का समाधान करते हुए आचार्य पंडित विजयानंद शर्मा ने श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित धुंधुकारी और गौकरण के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति, सदाचार और भगवान के प्रति समर्पण को मोक्ष का वास्तविक मार्ग बताया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना श्रद्धा के किए गए धार्मिक कर्म पूर्ण फल प्रदान नहीं करते, जबकि सच्चे मन से किया गया सत्संग, भगवान का स्मरण और धर्ममय जीवन आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।
आचार्य श्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि व्यस्त जीवन से समय निकालकर कम से कम एक दिन एक घंटे के लिए श्रीमद्भागवत कथा में अवश्य सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि सत्संग मनुष्य के जीवन को संस्कारित करता है, परिवार में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करता है तथा समाज को धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
धार्मिक वातावरण, भक्ति संगीत, शास्त्रसम्मत प्रवचन और श्रद्धालुओं की उमड़ती आस्था ने ग्राम बालपुर के इस आयोजन को आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना दिया है। कथा आगामी दिनों तक प्रतिदिन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ जारी रहेगी।
प्रदीप मिश्रा
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