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लोतलोता राखड़ डैम विवाद फिर गरमाया : दोबारा काम शुरू कराने पहुंचे सीएसईबी अधिकारी, ग्रामीणों ने फिर रोका, अतिरिक्त मुख्य अभियंता के बयान पर नया विवाद

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

ग्रामीणों ने साझा की वीडियो क्लिपिंग, बोले- पहले अनुमति दिखाइए, फिर शुरू करिए डैम का काम

कोरबा ACGN:- ग्राम पंचायत लोतलोता स्थित बंद पड़े राखड़ डैम को दोबारा शुरू करने को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गहरा गया है। 16 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी (सीएसपीजीसीएल/सीएसईबी) के अधिकारी एवं कर्मचारी पुनः कार्य प्रारंभ कराने के उद्देश्य से गांव पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों ने पहले की तरह इसका विरोध कर दिया। इस दौरान कंपनी के अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश पांडे सुरक्षा कर्मियों एवं कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया।

यह वही लोतलोता राखड़ डैम है, जिसे वर्ष 2023 में भर जाने और पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिलने के कारण बंद कर दिया गया था। डैम बंद होने के बाद यहां पौधरोपण किया गया, मिट्टी भराई की गई तथा राख परिवहन की पाइपलाइन भी हटा दी गई थी। लेकिन हाल ही में कंपनी द्वारा यहां दोबारा पाइपलाइन बिछाने और डैम को पुनः उपयोग में लाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए कि जब डैम तीन वर्षों से बंद था तो अचानक इसे दोबारा शुरू करने की आवश्यकता क्यों पड़ गई।

ग्रामीणों का कहना है कि 21 अप्रैल 2026 को झाबुआखार राखड़ डैम टूटने की घटना और उसमें एक युवक की मौत के बाद क्षेत्र के लोगों में स्वाभाविक रूप से भय का माहौल है। उसी घटना के बाद विशेषज्ञों की टीम ने लोतलोता डैम का भी निरीक्षण किया था, लेकिन आज तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। ऐसे में बिना तकनीकी रिपोर्ट और पर्यावरणीय स्वीकृति सार्वजनिक किए डैम को दोबारा चालू करने का प्रयास उचित नहीं माना जा सकता।

गौरतलब है कि पूर्व में भी जब सीएसईबी द्वारा लोतलोता डैम तक नई पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू किया गया था, तब ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया था। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा था कि यदि कंपनी के पास शासन एवं पर्यावरण विभाग की आवश्यक स्वीकृतियां हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए, उसके बाद ही कार्य शुरू किया जाए। विरोध के बाद सीएसईबी ने अधिवक्ता के माध्यम से जनपद सदस्य जीवन लाल यादव, ग्रामीण प्रतिनिधि सुदीम यादव तथा पूर्व सरपंच केशव (केसर) भारिया को नोटिस भेजते हुए शासकीय कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में ग्राम पंचायत लोतलोता ने लिखित उत्तर देकर कहा था कि ग्रामीण केवल जनसुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की चिंता कर रहे हैं तथा यदि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी कंपनी की होगी।

16 जुलाई को हुई ताजा घटनाक्रम के दौरान अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश पांडे और ग्रामीणों के बीच बातचीत के दौरान एक बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि बातचीत के दौरान अधिकारी ने कहा कि काम तो बंद नहीं होगा “यदि मारना बोलो तो मारेंगे और आज ही काम चालू करेंगे।” इस कथित बयान के बाद मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी बढ़ गई।

हालांकि कुछ समय बाद अधिकारी ने ग्रामीणों को पुनः समझाते हुए कहा कि उनके कथन का गलत अर्थ निकाला गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आशय “यदि मार खाना भी पड़े तो मार खा लेंगे, लेकिन काम करना पड़ेगा” था, न कि किसी को मारने की धमकी देना। इसके बावजूद यह बयान पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

ग्रामीणों का दावा है कि दोनों बयानों की वीडियो क्लिपिंग उनके पास मौजूद है, जिसे उन्होंने आपस में साझा भी किया है। उनका कहना है कि वीडियो में पूरी बातचीत दर्ज है और आवश्यकता पड़ने पर इसे संबंधित अधिकारियों के समक्ष भी प्रस्तुत किया जाएगा।

ग्रामीणों ने एक बार फिर दोहराया कि उनका विरोध किसी विकास कार्य के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि वे केवल यह जानना चाहते हैं कि जब डैम पर्यावरणीय कारणों से बंद किया गया था, तब अब उसे पुनः किस आधार पर प्रारंभ किया जा रहा है। यदि कंपनी के पास पर्यावरण विभाग, शासन एवं अन्य सक्षम प्राधिकारियों की सभी वैध स्वीकृतियां हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए, ताकि ग्रामीणों की शंकाएं दूर हो सकें।

बताया जा रहा है कि फिलहाल कंपनी और ग्रामीणों के बीच तत्काल कोई सहमति नहीं बन सकी। हालांकि दोनों पक्षों के बीच आगे बैठक आयोजित करने पर सहमति बनी है, जिसमें ग्रामीण अपनी मांगों और आपत्तियों को विस्तार से रखेंगे तथा कंपनी प्रबंधन भी अपना पक्ष प्रस्तुत करेगा।

जनहित के महत्वपूर्ण सवाल

यदि लोतलोता राखड़ डैम वर्ष 2023 से बंद था, तो अब अचानक इसे पुनः चालू करने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?

क्या डैम को दोबारा संचालित करने के लिए पर्यावरण विभाग, प्रदूषण नियंत्रण मंडल एवं सक्षम शासन स्तर से आवश्यक अनुमति प्राप्त हो चुकी है? यदि हाँ, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?

झाबू राखड़ डैम हादसे के बाद बनी जांच टीम की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? क्या उस रिपोर्ट में लोतलोता डैम का भी उल्लेख है?

जब ग्रामीणों ने पहले भी सुरक्षा और अनुमति संबंधी दस्तावेज देखने की मांग की थी, तब सीएसईबी प्रबंधन ने नोटिस भेजने का रास्ता क्यों अपनाया?

क्या बिना ग्रामीणों की आशंकाओं का समाधान किए कार्य प्रारंभ करना उचित प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जा सकती है?

16 जुलाई 2026 को ग्रामीणों और अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के दौरान अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश पांडे के कथित बयान की वीडियो क्लिप ग्रामीणों द्वारा साझा की गई है। क्या सीएसईबी इस पूरे घटनाक्रम पर अपना आधिकारिक पक्ष जारी करेगा?

यदि अधिकारी का आशय बाद में बताए अनुसार “मार खाना पड़े तो भी काम करना पड़ेगा” था, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न होने के पीछे संवाद और समन्वय की कमी के लिए जिम्मेदार कौन है?

क्या सीएसईबी भविष्य में किसी भी कार्य से पहले ग्राम पंचायत, ग्रामीण प्रतिनिधियों और प्रशासन के साथ संयुक्त बैठक कर सभी अनुमतियां एवं सुरक्षा संबंधी दस्तावेज सार्वजनिक करेगा?

यदि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना, पर्यावरणीय क्षति अथवा जनहानि होती है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?

क्या प्रशासन इस पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी, संरचनात्मक एवं पर्यावरणीय जांच कराकर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा, ताकि ग्रामीणों का विश्वास बहाल हो सके?

अब पूरे मामले पर क्षेत्रवासियों की नजरें प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी हैं। ग्रामीणों की मांग है कि लोतलोता राखड़ डैम की स्वतंत्र तकनीकी जांच, सुरक्षा ऑडिट और पर्यावरणीय स्वीकृतियों को सार्वजनिक किए बिना किसी भी प्रकार का संचालन प्रारंभ नहीं किया जाए, ताकि भविष्य में झाबु जैसी किसी भी संभावित दुर्घटना की पुनरावृत्ति न हो।

प्रदीप मिश्रा

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