केजी से पीजी तक मुफ्त शिक्षा की एसओपी जारी, आर्थिक तंगी नहीं बनेगी पढ़ाई में बाधा : मंत्री सूर्यवंशी सूरज
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भुवनेश्वर, ओडिशा
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजयानंद जी महाराज
‘ज्ञानोदय–शिक्षा रू समृद्धि’ योजना के तहत निःशुल्क शिक्षा का खाका तैयार, 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य
भुवनेश्वर ACGN:- ओडिशा सरकार ने मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी “ज्ञानोदय–शिक्षा रू समृद्धि” योजना के तहत केजी (बालवाड़ी) से पीजी (स्नातकोत्तर) तक निःशुल्क शिक्षा लागू करने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कर दी है। एसओपी में योजना के क्रियान्वयन, पात्रता, शुल्क वापसी, शिक्षण संस्थानों को भुगतान तथा प्रशासनिक जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है।

उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि सरकार सभी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही स्पष्ट किया कि योजना लागू होने के बाद कोई भी सरकारी अथवा सहायता प्राप्त महाविद्यालय मनमाने ढंग से शुल्क नहीं बढ़ा सकेगा।

एसओपी के अनुसार, यह योजना केवल स्टूडेंट एकेडमिक मैनेजमेंट सिस्टम (एसएएमएस) के माध्यम से नियमित स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर लागू होगी। इसमें पहली बार प्रवेश लेने वाले तथा पुनः प्रवेश लेने वाले दोनों प्रकार के विद्यार्थी शामिल होंगे। प्रवेश प्रक्रिया के प्रथम चरण में जिन विद्यार्थियों ने पहले ही प्रवेश शुल्क जमा कर दिया है, उन्हें पूरी राशि उसी बैंक खाते में वापस की जाएगी, जिससे भुगतान किया गया था।
सरकार ने महाविद्यालयों पर आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए चरणबद्ध भुगतान व्यवस्था भी तय की है। प्रवेश के बाद स्वीकृत राशि का 10 प्रतिशत, फिर 15 प्रतिशत तथा शेष राशि 25-25 प्रतिशत की तीन समान किस्तों में शैक्षणिक सत्र के दौरान जारी की जाएगी।
योजना के तहत पात्र विद्यार्थियों को प्रवेश शुल्क, पुनः प्रवेश शुल्क तथा संस्थानों द्वारा लिए जाने वाले अन्य नियमित शुल्क नहीं देने होंगे। हालांकि परीक्षा शुल्क और छात्रावास शुल्क योजना के दायरे में शामिल नहीं हैं, जिनका भुगतान विद्यार्थियों को स्वयं करना होगा।
एसओपी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों की न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी। विशेष परिस्थितियों में इसे 65 प्रतिशत तक शिथिल किया जा सकता है, लेकिन निर्धारित न्यूनतम उपस्थिति पूरी नहीं करने वाले विद्यार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यावसायिक एवं तकनीकी पाठ्यक्रम, स्व-वित्तपोषित पाठ्यक्रम, निजी गैर-अनुदानित संस्थान तथा पीपीपी मॉडल पर संचालित संस्थान इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगे। वहीं राज्य विश्वविद्यालयों, सरकारी महाविद्यालयों तथा सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालयों को योजना के तहत आने वाले नियमित पाठ्यक्रमों की फीस बढ़ाने पर रोक लगा दी गई है।
प्रदीप मिश्रा
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