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डिजिटल इंडिया के दावों पर सवाल: मिशल रिकॉर्ड के लिए दर-दर भटक रहे ग्रामीण

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रायगढ़, छत्तीसगढ़ (धरमजयगढ़)

By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी

ऑनलाइन सुविधा बंद होने से दूरस्थ वनांचल के सैकड़ों ग्रामीण रोज लौट रहे निराश, जाति प्रमाण पत्र बनाने में भी आ रही बाधा

रायगढ़ ACGN:- एक ओर केंद्र एवं राज्य सरकार डिजिटल सेवाओं के विस्तार और प्रशासन को तकनीक से जोड़ने का दावा कर रही है, वहीं रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ तहसील कार्यालय में इन दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। तहसील में ऑनलाइन उपलब्ध मिशल अधिकार अभिलेख (मिशल रिकॉर्ड) ग्रामीणों को न तो भुईंया शाखा से मिल रहा है और न ही लोक सेवा केंद्र के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे दूर-दराज के गांवों से आने वाले ग्रामीणों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही विद्यार्थियों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके लिए वर्ष 1950 के पूर्व का मिशल अधिकार अभिलेख आवश्यक दस्तावेज माना जाता है। लेकिन धरमजयगढ़ तहसील में यह दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने से छाल, कापू, रायमेर सहित वनांचल के अनेक गांवों से आने वाले सैकड़ों ग्रामीण सुबह से शाम तक तहसील परिसर के चक्कर लगाने के बाद भी निराश होकर लौटने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे किराया खर्च कर लंबी दूरी तय करके तहसील पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें कोई समाधान नहीं मिल पाता।
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले यही मिशल रिकॉर्ड ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से भुईंया शाखा द्वारा उपलब्ध कराया जाता था। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब रिकॉर्ड पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध है, तो अब उसे जारी करने की सुविधा क्यों बंद कर दी गई है। यदि पहले यह व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो रही थी, तो वर्तमान में इसे बंद करने के पीछे क्या कारण हैं, इसका स्पष्ट जवाब किसी के पास नहीं है।
इस स्थिति ने डिजिटल सेवाओं और सुशासन के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि ऑनलाइन सेवाएं समय पर उपलब्ध नहीं होंगी तो डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य ही अधूरा रह जाएगा। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मिशल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने की व्यवस्था तत्काल बहाल की जाए, ताकि विद्यार्थियों और आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
अब देखना यह होगा कि इस गंभीर समस्या पर जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारी कितनी शीघ्रता से संज्ञान लेते हैं और व्यवस्था को सुचारु बनाते हैं या फिर ग्रामीणों की परेशानी पहले की तरह बनी रहती है।

प्रदीप मिश्रा
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