सीएमएचओ का आदेश तीन महीने बाद भी बेअसर, जीवन दीप कर्मचारियों को नहीं मिला कलेक्टर दर का वेतन
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू
3000 से 5000 रुपये मासिक वेतन पर वर्षों से कार्यरत कर्मचारी, संघ ने आदेश लागू नहीं होने पर जताई नाराजगी, आंदोलन की चेतावनी।
सूरजपुर ACGN:- सूरजपुर जिले के स्वास्थ्य विभाग में आदेशों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) द्वारा जारी स्पष्ट निर्देश के बावजूद तीन महीने से अधिक समय बीत जाने पर भी जीवन दीप समिति (JDS) के कर्मचारियों को कलेक्टर दर पर वेतन का लाभ नहीं मिल सका है। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है और विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जीवन दीप प्रकोष्ठ द्वारा वेतन विसंगति को लेकर ज्ञापन सौंपे जाने के बाद सीएमएचओ ने 19 मार्च 2026 को जिले के सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों (बीएमओ) को आदेश जारी कर जीवन दीप समिति के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों को तत्काल कलेक्टर दर पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने तथा पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, कर्मचारियों का आरोप है कि तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश बीएमओ कार्यालयों में इस आदेश का पालन नहीं किया गया है।

बताया जा रहा है कि जिले के विभिन्न शासकीय अस्पतालों में कार्यरत जीवन दीप समिति के कई कर्मचारी पिछले 10 से 15 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें आज भी केवल 3000 से 5000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान महंगाई के दौर में इतनी कम राशि में परिवार का भरण-पोषण करना अत्यंत कठिन हो गया है।
जीवन दीप कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. निलेश कुमार साहू ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी संचालनालय एवं सीएमएचओ स्तर से कई बार निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन खंड चिकित्सा अधिकारियों द्वारा लगातार उनकी अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन देकर टाल दिया जाता है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही कलेक्टर दर पर वेतन भुगतान प्रारंभ नहीं किया गया तो कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की होगी।
हालांकि, इस मामले में संबंधित खंड चिकित्सा अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है। यदि प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होती है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
प्रदीप मिश्रा (प्रधान संपादक)
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