संभावित खंड एवं अल्प वर्षा को लेकर सरकार सतर्क, किसानों को डीएसआर तकनीक और वैकल्पिक फसलों को अपनाने की सलाह
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय
कम वर्षा की आशंका के बीच सरकार ने जारी की आकस्मिक कार्ययोजना, धान की सीधी बुवाई और जल संरक्षण पर दिया जोर
रायपुर ACGN:- खरीफ सीजन 2026 में अल-नीनो के संभावित प्रभाव के कारण मानसून के देर से आने, जल्दी समाप्त होने तथा खंड एवं अल्प वर्षा की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के लिए विशेष आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की है। इसका उद्देश्य कम वर्षा की स्थिति में भी फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, उत्पादन बनाए रखना तथा खेती की लागत कम करना है।
कृषि विभाग ने किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में तैयार होने वाली फसलों और किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। विभाग ने धान की पारंपरिक रोपा पद्धति के बजाय डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) यानी धान की सीधी बुवाई को प्राथमिकता देने की अपील की है। इस तकनीक से लगभग 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है, प्रति एकड़ करीब 5,000 रुपये की लागत कम आती है तथा फसल 12 से 15 दिन पहले तैयार हो जाती है।
सरकार ने किसानों को वर्षा शुरू होने से पहले खेतों और मेड़ों की सफाई, समय पर जुताई तथा मेडबंदी कर वर्षा जल संरक्षण सुनिश्चित करने की सलाह दी है। उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में धान की जगह अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल, रामतिल और सोयाबीन जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलों की खेती अपनाने पर भी जोर दिया गया है। इन फसलों में कम पानी की आवश्यकता होती है और सूखे की स्थिति में भी बेहतर उत्पादन की संभावना रहती है।
कृषि विभाग ने कतार पद्धति से बुवाई, बीज उपचार तथा संतुलित उर्वरक उपयोग की भी सलाह दी है। किसानों को कार्बेन्डाजिम, थायमेथोक्साम-इमिडाक्लोप्रिड तथा विभिन्न फसलों के अनुसार जैव उर्वरकों से बीज उपचार करने की सलाह दी गई है। यदि 15 जुलाई तक अंकुरण नहीं होता है तो पुनः बुवाई के समय सामान्य से 10 प्रतिशत अधिक बीज उपयोग करने की अनुशंसा की गई है। वहीं कम वर्षा की स्थिति में नैनो यूरिया, 2 प्रतिशत यूरिया एवं डीएपी घोल के पर्णीय छिड़काव को लाभकारी बताया गया है।
सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में नालों पर अस्थायी बांध बनाकर, डबरियों, तालाबों और कुओं में वर्षा जल संग्रह करने तथा आवश्यकता पड़ने पर जीवन रक्षक सिंचाई के लिए इस जल का उपयोग करने की सलाह दी है। साथ ही ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने, मौसम पूर्वानुमान के आधार पर कृषि कार्य करने और फसल विविधीकरण के माध्यम से जोखिम कम करने की अपील की गई है।
राज्य सरकार ने किसानों से कृषि संबंधी किसी भी समस्या की स्थिति में निकटस्थ कृषि महाविद्यालय, अनुसंधान केंद्र, कृषि विज्ञान केंद्र अथवा कृषि विभाग से संपर्क कर वैज्ञानिक सलाह लेने का आग्रह किया है।
प्रदीप मिश्रा (प्रधान संपादक)
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