आरटीआई में वन विभाग का जवाब बना सवाल, धरमजयगढ़ उत्पादन इकाई ने कहा– कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं कूप कटिंग के अभिलेख
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रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी
वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक कूप कटिंग कार्यों की जानकारी मांगी गई थी, विभाग ने रिकॉर्ड उपलब्ध न होने की बात कही, पारदर्शिता और अभिलेख संधारण पर उठे गंभीर सवाल।
रायगढ़ ACGN:- सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में वन विभाग की उत्पादन इकाई धरमजयगढ़ का उत्तर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आवेदक द्वारा वर्ष 2023-24 से 2025-26 तक उत्पादन इकाई अंतर्गत स्वीकृत सभी कूपों में किए गए कूप कटिंग कार्यों की विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। इसमें कार्य का नाम, कूप क्रमांक सहित संबंधित अभिलेखों की जानकारी चाही गई थी।
परिक्षेत्राधिकारी, उत्पादन इकाई धरमजयगढ़ द्वारा 30 जून 2026 को दिए गए लिखित जवाब में स्पष्ट कहा गया कि मांगी गई जानकारी एवं संबंधित अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं तथा नया अभिलेख तैयार कर सूचना उपलब्ध कराने का कोई प्रावधान सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत नहीं है। इसलिए मांगी गई सूचना उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
विभाग के इस उत्तर के बाद कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े हो गए हैं। यदि कूप कटिंग जैसे सरकारी कार्य स्वीकृत हुए और उन पर शासन की राशि व्यय की गई, तो उनसे संबंधित मूल अभिलेख, प्रशासनिक स्वीकृतियां, माप पुस्तिका, भुगतान विवरण एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज आखिर किस कार्यालय में सुरक्षित हैं। यदि संबंधित कार्यालय में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, तो सरकारी कार्यों की निगरानी, वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जा रही है।
आरटीआई के इस जवाब ने वन विभाग की अभिलेख संधारण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले में प्रथम अपील की संभावना बनी हुई है। यदि उच्च स्तर पर भी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो यह प्रकरण प्रशासनिक जवाबदेही, सरकारी रिकॉर्ड के संरक्षण और सूचना के अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस का विषय बन सकता है।
यह मामला केवल सूचना उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी विभागों में पारदर्शिता, जवाबदेही और रिकॉर्ड प्रबंधन की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रथम अपील अथवा उच्च अधिकारियों के स्तर पर इस मामले में क्या कार्रवाई होती है और संबंधित अभिलेखों की स्थिति को लेकर क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।
प्रदीप मिश्रा (प्रधान संपादक)
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