रामगढ़ संस्कृति, इतिहास और पर्यटन का अद्भुत संगम, हमारी धरोहर आने वाली पीढ़ियों की अमूल्य विरासत : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
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सरगुजा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू,
मुख्यमंत्री ने रामगढ़ पहुंचकर प्राचीन सीताबेंगरा गुफा, जोगीमारा शिलालेख और हाथीपोल का किया अवलोकन, रामगढ़ महोत्सव-2026 का हुआ समापन
सरगुजा ACGN:- छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 का समापन समारोह मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रामगढ़ पहुंचकर विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में प्रसिद्ध सीताबेंगरा गुफा का अवलोकन किया और इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी ली।

मुख्यमंत्री साय ने जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख, भित्तिचित्रों तथा क्षेत्र की अनूठी प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का भी निरीक्षण किया। इस दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य और पर्यटन का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल प्राकृतिक संपदा से समृद्ध नहीं है, बल्कि यहां की पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत भी विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान रखती है।

उन्होंने कहा कि रामगढ़ जैसी धरोहरें हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन करना सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार इन ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित करने और पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, जिससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध विरासत से परिचित हो सकें तथा स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें।

रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएं भारतीय इतिहास, स्थापत्य कला, शिलालेख और चित्रकला की अनमोल धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाड़ियों में अपनी कालजयी रचना “मेघदूतम्” की रचना की थी। इसी ऐतिहासिक और साहित्यिक महत्व को याद रखने के लिए प्रत्येक वर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है।
लगभग 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा में निर्मित प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा में प्राचीन भित्तिचित्र परंपरा और यहां मिले अभिलेख इस क्षेत्र को विशेष पहचान देते हैं।
रामगढ़ की पहचान प्राकृतिक संरचना हाथीपोल से भी जुड़ी है। लगभग 180 फीट लंबी और 15 से 20 फीट ऊंची यह प्राकृतिक सुरंग पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। वर्षों तक जल प्रवाह के कारण बनी यह सुरंग अपनी अनूठी संरचना के कारण लोगों को आकर्षित करती है।
रामगढ़ पर्वत की गुफाओं और प्राकृतिक सौंदर्य का संबंध धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराओं से भी जोड़ा जाता है। यही कारण है कि यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है।
प्रदीप मिश्रा (प्रधान संपादक)
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