महास्नान के बाद भगवान जगन्नाथ ने दिए हाथी वेश में दिव्य दर्शन, अब अणसर काल में 16 जुलाई की रथयात्रा का इंतजार
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पुरी ओडिशा,
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजया नंद जी महाराज, ओड़िशा ब्यूरो
श्रीक्षेत्र पुरी में देव स्नान पूर्णिमा का भव्य आयोजन, लाखों श्रद्धालुओं ने किए महाप्रभु के दुर्लभ दर्शन; 16 जुलाई को निकलेगी विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा
पुरी ACGN:- महासागर की लहरों की तरह उमड़ी श्रद्धा, गगनभेदी “जय जय जगन्नाथ” के जयघोष, शंख-घंटियों की मंगलध्वनि और लाखों भक्तों की आस्था के बीच सोमवार को श्रीक्षेत्र पुरी में देव स्नान पूर्णिमा का भव्य एवं दिव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ, भगवान श्री बलभद्र, भगवती देवी सुभद्रा और भगवान श्री सुदर्शन जी का पारंपरिक महास्नान कराया गया, जिसके बाद भगवानों ने दुर्लभ हाथी वेश में भक्तों को दर्शन दिए।
देव स्नान पूर्णिमा के साथ ही विश्व प्रसिद्ध श्रीक्षेत्र पुरी रथयात्रा-2026 की धार्मिक शुरुआत मानी जाती है। ब्रह्ममुहूर्त में पारंपरिक पहाड़ी बीजे अनुष्ठान के साथ महाप्रभु चतुर्धा विग्रहों को श्रीमंदिर के गर्भगृह से स्नान मंडप तक भक्ति और श्रद्धा के साथ लाया गया।
श्रीमंदिर परिसर में मौजूद लाखों श्रद्धालु महाप्रभु की एक झलक पाने के लिए घंटों प्रतीक्षा करते रहे। जैसे ही भगवान स्नान वेदी पर पहुंचे, पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और “हरि हरि बोल”, “हुलहुली” तथा “जय जगन्नाथ” के जयकारों से श्रीक्षेत्र गूंज उठा।
मंगल आरती, अबकास नीति और अन्य पारंपरिक अनुष्ठानों के बाद श्रीमंदिर परिसर स्थित रहस्यमयी सुनाकुआ (स्वर्ण कुआं) से लाए गए पवित्र जल के 108 स्वर्ण कलशों से भगवानों का महास्नान कराया गया। इन कलशों में चंदन, कपूर, केसर, अगरू, सुगंधित पुष्प, खस सहित औषधीय जड़ी-बूटियां मिलाई गई थीं। परंपरा के अनुसार भगवान श्री जगन्नाथ जी को 35, भगवान बलभद्र जी को 33, देवी सुभद्रा जी को 22 और भगवान सुदर्शन जी को 18 कलशों के जल से स्नान कराया गया।

महास्नान के बाद गजपति महाराजा श्री दिव्यसिंह देव ने परंपरागत छेरा पहरा रस्म निभाई। इसके बाद भगवान श्री जगन्नाथ और भगवान श्री बलभद्र को विशेष हाथी वेश से सजाया गया, जबकि देवी सुभद्रा जी को पद्म वेश धारण कराया गया। यह दुर्लभ दर्शन हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार 15वीं शताब्दी में भगवान जगन्नाथ ने अपने अनन्य भक्त गणपति भट्ट की इच्छा पूरी करने के लिए स्वयं को भगवान गणेश के स्वरूप में दर्शन दिए थे। इसी परंपरा की स्मृति में महाप्रभु हाथी वेश धारण करते हैं।
देव स्नान पूर्णिमा के बाद भगवानों की मानवीय लीला के अनुसार अणसर काल प्रारंभ हो गया है। मान्यता है कि महास्नान के बाद भगवान अस्वस्थ होकर अगले 14 दिनों तक अणसर गृह में विश्राम करते हैं। इस अवधि में सामान्य श्रद्धालुओं को दर्शन नहीं मिलते और दैतापति सेवक भगवान की सेवा-पूजा करते हैं। इसके बाद नवयौवन दर्शन होगा और 16 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि पर भगवान तीनों भव्य रथों पर सवार होकर श्रीगुंडीचा मंदिर की यात्रा पर निकलेंगे।

देव स्नान पूर्णिमा को लेकर इस बार श्रीक्षेत्र पुरी में श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ रही। पुरी जाने वाले मार्गों, विशेषकर पीपली टोलगेट और राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। प्रशासन और पुलिस द्वारा यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए। सुरक्षा के लिए पुलिस की 79 प्लाटून सहित वरिष्ठ अधिकारियों और विशेष इकाइयों को तैनात किया गया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी पुरी पहुंचे और स्नान मंडप में महाप्रभु के दर्शन कर राज्य एवं विश्व के लोगों की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने रथखला पहुंचकर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया तथा कारीगरों से चर्चा की।
अब सभी श्रद्धालुओं को 16 जुलाई की ऐतिहासिक रथयात्रा का इंतजार है, जब महाप्रभु अपने भक्तों को दर्शन देने श्रीगुंडीचा धाम की ओर प्रस्थान करेंगे।
प्रदीप मिश्रा (प्रधान संपादक)
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