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राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस : विकास का दर्पण, प्रगति का प्रमाण

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बिलासपुर छत्तीसगढ़


By ACGN 7647981711, 9303948009

तथ्यों, आंकड़ों और प्रमाणों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की दिशा तय करने वाले विज्ञान सांख्यिकी के महत्व को समझने का दिन

ACGN:- 29 जून को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मानव सभ्यता की उस ज्ञान परंपरा का उत्सव है, जो तथ्यों, आंकड़ों और प्रमाणों के आधार पर समाज एवं राष्ट्र के विकास की दिशा निर्धारित करती है। सांख्यिकी केवल संख्याओं का विज्ञान नहीं है, बल्कि यह समाज की वास्तविक स्थिति को समझने और भविष्य की योजनाओं को सही दिशा देने का एक सशक्त माध्यम है।
आज के आधुनिक युग में जब पूरी दुनिया तेजी से बदल रही है, तब सांख्यिकी समाज, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण जैसे प्रत्येक क्षेत्र की वास्तविक तस्वीर सामने लाने का कार्य करती है। किसी भी राष्ट्र की योजनाएं उसके सपनों का स्वरूप होती हैं, जबकि सांख्यिकी उन सपनों को धरातल पर उतारने का आधार बनती है।


आंकड़ों के माध्यम से जनसंख्या वृद्धि, साक्षरता दर, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है। प्रत्येक आंकड़े के पीछे मानव जीवन से जुड़ी कोई कहानी, संघर्ष और उपलब्धि छिपी होती है। इसलिए सांख्यिकी केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं बल्कि उन आंकड़ों में छिपे समाज के अनुभवों को समझने की कला भी है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस हमें यह संदेश देता है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए सटीक, विश्वसनीय और पारदर्शी आंकड़े अत्यंत आवश्यक हैं। सही आंकड़े सुशासन की नींव रखते हैं और विकास की योजनाओं को प्रभावी बनाते हैं।
जब तथ्य बोलते हैं, तब विकास की दिशा स्पष्ट होती है। सांख्यिकी वह विज्ञान है जो संख्याओं को ज्ञान, तथ्यों को प्रमाण और योजनाओं को सफलता में बदलने का कार्य करता है। यह वैज्ञानिक सोच, पारदर्शिता और बेहतर निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है।
आंकड़ों में छिपा हुआ, युग का सारा ज्ञान।
सांख्यिकी के दीप से, उज्ज्वल हो इंसान।।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर हमें तथ्यपरक सोच अपनाने और आंकड़ों के महत्व को समझने का संकल्प लेना चाहिए, क्योंकि जहां आंकड़ों की भाषा सत्य बोलती है, वहीं विकास की नई इबारत लिखी जाती है।
सांख्यिकी के जनक प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस का योगदान
प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस (29 जून 1893 – 28 जून 1972) भारत के महान सांख्यिकीविद्, वैज्ञानिक और योजनाकार थे। उन्हें भारतीय सांख्यिकी का जनक माना जाता है। उन्होंने वर्ष 1931 में भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) की स्थापना कर सांख्यिकीय अनुसंधान को नई दिशा दी।
उनके द्वारा विकसित महालनोबिस दूरी (Mahalanobis Distance) आज भी विश्वभर में डेटा विश्लेषण और शोध कार्यों में उपयोग की जाती है। भारत की पंचवर्षीय योजनाओं के निर्माण में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनके ज्ञान, अनुसंधान और राष्ट्रसेवा को सम्मान देने के लिए प्रत्येक वर्ष 29 जून को भारत में राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया जाता है।
अंक-अंक में सत्य है, तथ्य-तथ्य में ज्ञान।
महालनोबिस ने दिया, सांख्यिकी को मान।।

प्रदीप मिश्रा (प्रधान संपादक)
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