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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखी दुर्लभ उड़न गिलहरी, संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

स्वस्थ और समृद्ध वन पारिस्थितिकी तंत्र का मिला प्रमाण, दुर्लभ वन्यजीव की मौजूदगी से बढ़ी जैव विविधता की पहचान

रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। वन भ्रमण के दौरान रिजर्व क्षेत्र में दुर्लभ इंडियन फ्लाइंग स्क्विरल (भारतीय उड़न गिलहरी) दिखाई दी है। यह दुर्लभ और निशाचर जीव मुख्य रूप से घने जंगलों में पाया जाता है। वन विभाग ने इसे संरक्षण प्रयासों और बेहतर वन पारिस्थितिकी तंत्र की महत्वपूर्ण सफलता बताया है।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में राज्य सरकार द्वारा वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वन क्षेत्रों की सुरक्षा, जैव विविधता संवर्धन और वन्यजीवों के अनुकूल वातावरण तैयार करने के प्रयासों के कारण उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बनता जा रहा है।
इंडियन फ्लाइंग स्क्विरल की खासियत यह है कि यह सामान्य पक्षियों की तरह उड़ती नहीं है, बल्कि इसके आगे और पीछे के पैरों के बीच मौजूद विशेष झिल्ली की सहायता से एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक हवा में फिसलते हुए लंबी दूरी तय करती है। यह जीव दिन के समय पेड़ों के खोखलों में छिपकर आराम करता है और रात के समय भोजन की तलाश में सक्रिय होता है।


वन विशेषज्ञों के अनुसार उड़न गिलहरी का किसी क्षेत्र में पाया जाना उस जंगल की प्राकृतिक समृद्धि और पर्यावरणीय संतुलन का संकेत माना जाता है। यह प्रजाति केवल घने और सुरक्षित वन क्षेत्रों में ही निवास करती है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में इसकी मौजूदगी यहां की जैव विविधता और संरक्षण कार्यों की मजबूती को दर्शाती है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक श्री वरुण जैन ने कहा कि उड़न गिलहरी का दिखाई देना वन विभाग के लिए गौरव का विषय है। यह रिजर्व क्षेत्र में किए जा रहे संरक्षण कार्यों का सकारात्मक परिणाम है। विभाग वन्यजीवों के सुरक्षित आवास और संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
इस दुर्लभ प्रजाति के दस्तावेजीकरण से छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी तथा इको-पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में उड़न गिलहरी का दिखना केवल एक वन्यजीव की मौजूदगी नहीं, बल्कि योजनाबद्ध संरक्षण, सतत निगरानी और पर्यावरण संरक्षण की सफलता की कहानी है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने की प्रेरणा बनेगी।
प्रदीप मिश्रा
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