वाहन चेकिंग वीडियो की जांच में वायरल दावा निकला भ्रामक
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बिलासपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
यातायात पुलिस की जांच में सामने आई सच्चाई, युवकों ने माना सोशल मीडिया पर गलत तरीके से वायरल हुआ वीडियो
सोशल मीडिया में वाहन चेकिंग के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर वायरल हुए वीडियो की जांच में इसे भ्रामक और तथ्यहीन पाया गया है। यातायात पुलिस द्वारा की गई जांच में स्पष्ट हुआ कि वीडियो को गलत संदर्भ में वायरल कर पुलिस की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर मामले की जांच की गई, जिसमें वाहन चालक देवा साहू, जलेश्वर साहू एवं वाहन जांचकर्ता अधिकारी सउनि वीरेन्द्र सिंह नेताम सहित संबंधित पुलिस स्टाफ के कथन दर्ज किए गए।
जांच में सामने आया कि 12 मई 2026 को सउनि वीरेन्द्र सिंह नेताम एवं उनकी टीम सकरी ओवरब्रिज के पास मोटर व्हीकल एक्ट के तहत वाहन चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान बिना हेलमेट बाइक चला रहे देवा साहू और उसके साथी जलेश्वर साहू को रोका गया। जांच में पाया गया कि उनके साथ कोई गर्भवती महिला मौजूद नहीं थी। हेलमेट नहीं पहनने पर मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 129/194 (डी) के तहत 500 रुपये का चालान काटा गया और उसकी रसीद वाहन चालक को दी गई।
जांच प्रतिवेदन में बताया गया कि वाहन जांच के दौरान देवा साहू ने गोपनीय तरीके से एक छोटा वीडियो क्लिप बनाया और उसे सुरेश साहू नामक व्यक्ति को भेजा, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर गलत तथ्यों के साथ वायरल किया गया।
देवा साहू और जलेश्वर साहू ने अपने बयान में स्वीकार किया कि वीडियो को बिना जानकारी और अनुमति के गलत तरीके से वायरल किया गया, जिससे पुलिस की छवि खराब हुई। दोनों युवकों ने यह भी कहा कि उन्होंने अज्ञानतावश वीडियो भेजा था।
यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया कि वाहन जांच के दौरान मानवीय संवेदनाओं का पूरा ध्यान रखा जाता है और महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों एवं दिव्यांगजनों के प्रति विशेष संवेदनशीलता बरती जाती है।
दोनों युवकों को पुलिस ने प्रदान किया हेलमेट

सड़क दुर्घटनाओं में युवाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर दोनों युवकों को आईएसआई मार्क हेलमेट भी प्रदान किया गया, ताकि वे भविष्य में यातायात नियमों का पालन करते हुए सुरक्षित वाहन चला सकें।
सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो वायरल करने से बचें बिलासपुर पुलिस
बिलासपुर पुलिस ने आम नागरिकों से सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार का वीडियो या सूचना साझा करने से पहले उसकी सत्यता जांचने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि बिना पुष्टि किए भ्रामक, झूठे या तथ्यहीन वीडियो वायरल करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आ सकता है।बिना सत्यता जांचे वीडियो साझा करना पड़ सकता है भारी, हो सकती है वैधानिक कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कई बार अधूरी या गलत जानकारी वाले वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल जाते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है और पुलिस एवं प्रशासन की छवि प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
बिलासपुर पुलिस ने नागरिकों से जिम्मेदारीपूर्वक सोशल मीडिया का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा है कि किसी भी वीडियो, फोटो या संदेश को प्रसारित करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें।
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया का सकारात्मक और जिम्मेदार उपयोग समाज में शांति एवं विश्वास बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबरों और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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