शासकीय सेवकों एवं आश्रित परिवार के उपचार हेतु शासनादेश जारी
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कोरबा छत्तीसगढ़
By ACGN 7647 9817119303 948009
152 निजी अस्पतालों को मिली मान्यता, चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए जारी किए गए विस्तृत दिशा-निर्देश
कोरबा /ACGN। राज्य शासन द्वारा प्रदेश के शासकीय सेवकों एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्यों के उपचार हेतु राज्यांतर्गत एवं राज्य के बाहर विभिन्न निजी चिकित्सालयों को प्रतिवर्ष मान्यता प्रदान की जाती है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ शासन चिकित्सा शिक्षा विभाग मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर अटलनगर द्वारा जारी पत्र क्रमांक GENS-1902/79/2026MED-328290 दिनांक 13 मई 2026 के माध्यम से राज्य के भीतर 86 तथा राज्य के बाहर 66 निजी चिकित्सालयों को 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक उपचार के लिए मान्यता प्रदान की गई है।
जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले के विभिन्न शासकीय विभागों में कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी सुविधा के अनुसार स्वयं अथवा अपने आश्रित परिवारजनों का उपचार मान्यता प्राप्त अथवा गैर मान्यता प्राप्त चिकित्सा संस्थानों में कराते हैं। उपचार उपरांत चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति हेतु आवेदन नियंत्रण अधिकारी के माध्यम से कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अथवा संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक कार्यालय में प्रस्तुत किए जाते हैं।
उन्होंने बताया कि अधिकांश प्रकरणों में आवेदन पत्रों के साथ आवश्यक दस्तावेज एवं जानकारी संलग्न नहीं होने के कारण फाइलें वापस करनी पड़ती हैं, जिससे चिकित्सा प्रतिपूर्ति प्रकरणों के निराकरण में अनावश्यक विलंब होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए चिकित्सा परिचर्या नियम 2013 के तहत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
डॉ. केशरी ने बताया कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति प्रकरणों के समुचित एवं त्वरित निराकरण हेतु निम्न मापदंडों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाना आवश्यक है
चिकित्सा प्रतिपूर्ति हेतु आवश्यक मापदंड एवं दिशा-निर्देश
कवरिंग लेटर के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत करना अनिवार्य – चिकित्सा प्रतिपूर्ति देयक संबंधित विभाग अथवा कार्यालय प्रमुख के प्रतिहस्ताक्षर सहित कवरिंग पत्र के माध्यम से प्रस्तुत किए जाएंगे।
निर्धारित प्रारूप में आवेदन अनिवार्य – चिकित्सा परिचर्या नियम 2013 के नियम 13(1) के अनुसार प्रारूप 01 एवं 02 में पूर्ण जानकारी सहित आवेदन प्रस्तुत करना होगा। निर्धारित प्रारूप वेबसाइट www.cgdme.com.in� से डाउनलोड किए जा सकते हैं।
राज्यांतर्गत उपचार हेतु अनुशंसा आवश्यक – राज्य के भीतर मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में उपचार कराने के लिए सक्षम जिला चिकित्सालय प्रमुख की अनुशंसा अनिवार्य होगी।
आकस्मिक उपचार की स्थिति में सूचना देना जरूरी
आपातकालीन परिस्थिति में उपचार उपरांत मुख्यालय लौटने के सात दिवस के भीतर संबंधित कर्मचारी अथवा परिवार सदस्य को अपने नियंत्रण अधिकारी को सूचना देकर कार्योत्तर स्वीकृति प्राप्त करनी होगी।
राज्य के बाहर उपचार हेतु रेफरल आवश्यक – राज्य के बाहर स्थित मान्यता प्राप्त निजी चिकित्सालयों में उपचार के लिए चिकित्सा महाविद्यालय की रेफरल कमेटी का रेफरल प्रमाण पत्र आवश्यक होगा। यदि संबंधित रोग की जांच अथवा उपचार सुविधा चिकित्सा महाविद्यालय में उपलब्ध नहीं है, तभी मरीज को अन्य संस्थानों में रेफर किया जाएगा।
पीपीपी एवं मान्यता प्राप्त संस्थाओं में रेफरल की आवश्यकता नहीं – स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत मान्यता प्राप्त तथा पीपीपी नीति के तहत संचालित संस्थाओं में उपचार के लिए रेफरल की आवश्यकता नहीं होगी।
छह माह के भीतर आवेदन प्रस्तुत करना अनिवार्य – चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति हेतु आवेदन उपचार व्यय की तिथि से छह माह के भीतर नियंत्रण अधिकारी को प्रस्तुत करना आवश्यक होगा।
प्रमाणपत्र एवं कैश मेमो संलग्न करना जरूरी – प्रत्येक आवेदन के साथ प्राधिकृत चिकित्सा परिचारक द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाणपत्र, कैश मेमो, रसीदें एवं उपचार तथा कमरे के किराये से संबंधित भुगतान दस्तावेज संलग्न किए जाएंगे।
डीडीओ करेगा दावों का निराकरण – चिकित्सा प्रतिपूर्ति संबंधी दावों का निराकरण संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डी.डी.ओ.) द्वारा किया जाएगा। नियंत्रण अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि दावा नियमों के अनुरूप एवं वास्तविक हो।
आश्रित प्रमाण पत्र अनिवार्य – आश्रित परिवारजनों के उपचार के मामलों में 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर नोटराइज्ड आश्रित प्रमाण पत्र की सत्यापित प्रति संलग्न करना अनिवार्य होगा।
डिस्चार्ज समरी प्रस्तुत करना आवश्यक – उपचारित अस्पताल द्वारा जारी डिस्चार्ज समरी आवेदन के साथ संलग्न करना अनिवार्य रहेगा।
मृत्यु की स्थिति में मृत्यु प्रमाण पत्र जरूरी – यदि शासकीय सेवक की मृत्यु हो चुकी हो, तो डिस्चार्ज समरी के स्थान पर अस्पताल द्वारा जारी मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।
जांच रिपोर्ट एवं अस्पताल बिल संलग्न करना अनिवार्य
स्वास्थ्य परीक्षण संबंधी सभी जांच रिपोर्ट तथा अस्पताल के बिल की सत्यापित प्रतियां आवेदन के साथ देना आवश्यक होगा।
चिकित्सा भत्ता लेने वाले कर्मचारियों के लिए नियम – ऐसे कर्मचारी जो राज्य शासन से चिकित्सा भत्ता प्राप्त कर रहे हैं, वे बाह्य रोगी (ओपीडी) उपचार के व्यय की प्रतिपूर्ति के पात्र नहीं होंगे।
सीजीएचएस दरों पर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश – शासन द्वारा मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों को सीजीएचएस योजना के तहत केंद्र शासन के कर्मचारियों के लिए निर्धारित दरों पर ही उपचार सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए कर्मचारियों को अस्पताल में अपना एम्पलाई आईडी अथवा पहचान पत्र प्रस्तुत करना होगा।
शिकायत करने की सुविधा उपलब्ध – यदि कोई मान्यता प्राप्त निजी अस्पताल शासन के निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो संबंधित कर्मचारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अथवा राज्य स्तर के सक्षम अधिकारी से शिकायत कर सकते हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी ने जिले के सभी शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपील की है कि वे स्वयं अथवा अपने आश्रित परिवार के सदस्यों के उपचार के दौरान निर्धारित नियमों एवं दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें, ताकि चिकित्सा प्रतिपूर्ति प्रकरणों के निराकरण में अनावश्यक विलंब न हो और कर्मचारियों को समय पर लाभ प्राप्त हो सके।
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