हरा सोना संग्राहकों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े 13 लाख से अधिक परिवारों को मिलेगा लाभ, लगभग 920 करोड़ रुपए के भुगतान का अनुमान
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में आजीविका का प्रमुख साधन माने जाने वाले तेंदूपत्ता, जिसे ‘हरा सोना’ कहा जाता है, उससे जुड़े लाखों संग्राहक परिवारों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से प्रदेश के 13 लाख से अधिक परिवार जुड़े हुए हैं और इस वर्ष संग्राहकों को लगभग 920 करोड़ रुपए के भुगतान का अनुमान है।
राज्य के वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार राज्य शासन द्वारा लघु वनोपज संग्राहकों, विशेषकर आदिवासी समुदाय की आय बढ़ाने के उद्देश्य से तेंदूपत्ता संग्रहण दर में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। वर्ष 2024 से प्रति मानक बोरा की दर 4 हजार रुपए से बढ़ाकर 5 हजार 500 रुपए कर दी गई है, जिससे लाखों ग्रामीण और वनवासी परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

वर्ष 2026 में राज्य के 31 जिला वनोपज सहकारी यूनियनों के अंतर्गत 902 प्राथमिक समितियों में तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य प्रस्तावित है। इस वर्ष लगभग 15 लाख से अधिक मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का अनुमान लगाया गया है। एक मानक बोरे में 1000 गड्डियां होती हैं और प्रत्येक गड्डी में 50 पत्ते शामिल रहते हैं।
बस्तर संभाग में भी बढ़ा लक्ष्य
बस्तर संभाग के 10 जिला यूनियनों की 216 समितियों में लगभग 4 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। वहीं अन्य 21 यूनियनों की 868 समितियों में करीब 11 लाख मानक बोरा संग्रहण होने की संभावना है। इस कार्य से प्रदेश के 13 लाख से अधिक संग्राहक परिवार जुड़े हैं।
बस्तर संभाग में वर्ष 2025 में जहां 3.90 लाख परिवार इस कार्य से जुड़े थे, वहीं इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 4.04 लाख हो गई है। इस साल अब तक 14 हजार 57 नए परिवार तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से जुड़े हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी नई पहल
नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में पहली बार 10 नए फड़ स्थापित किए गए हैं, जहां करीब 2100 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का अनुमान है। इसके अलावा सुकमा और केशकाल क्षेत्रों में भी नए फड़ जोड़े गए हैं।
पिछले वर्ष नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बाधाओं के कारण 351 फड़ों में संग्रहण नहीं हो पाया था, लेकिन इस वर्ष सभी फड़ों में संग्रहण कार्य सुचारू रूप से संचालित करने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं।

पारदर्शी भुगतान और बेहतर व्यवस्था
संग्रहण कार्य को सुगम बनाने के लिए संग्राहक कार्ड, बोरा, सुतली, गोदाम और परिवहन जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। इसके साथ ही तेंदूपत्ता के भंडारण का बीमा भी कराया जा रहा है।
संग्राहकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से भुगतान राशि सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए भेजी जाएगी।
सरकार की इस पहल से न केवल वनवासियों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और आदिवासी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को नया बल मिलेगा।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और विश्वसनीय अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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