खरीफ सीजन से पहले उर्वरक आपूर्ति पर मुख्यमंत्री की सख्त समीक्षा, हर किसान तक समय पर खाद पहुंचाने के निर्देश
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भुवनेश्वर, ओडिशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
ओड़िशा ब्यूरो स्वामी विजयानंद जी महाराज
लास्ट माइल डिलीवरी पर जोर, कालाबाजारी और तस्करी रोकने के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश
भुवनेश्वर – मुख्यमंत्री मोहन चारण मांझी ने शुक्रवार को लोक सेवा भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता और संतुलित वितरण की समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य के प्रत्येक किसान, चाहे वह छोटा हो या सीमांत, उसे उसकी आवश्यकता के अनुसार समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाए और किसी भी स्तर पर आपूर्ति में बाधा नहीं आने दी जाए।
मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों से वर्चुअल माध्यम से चर्चा करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर उर्वरक उत्पादन प्रभावित हुआ है, इसलिए राज्य में आपूर्ति व्यवस्था को और मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल आंकड़ों के आधार पर काम न किया जाए, बल्कि जमीनी स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाए कि खाद वास्तव में किसानों तक पहुंच रही है।

बैठक में कृषि विभाग के आयुक्त सह सचिव सचिन रामचंद्र यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र सरकार द्वारा चालू वर्ष में राज्य को 11 लाख 42 हजार 950 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा। अप्रैल माह के लिए 79 हजार 630 मीट्रिक टन उर्वरक की आवश्यकता है, जबकि 15 अप्रैल तक राज्य में 3 लाख 61 हजार 490 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। वर्तमान में राज्य में 1.77 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 60 हजार मीट्रिक टन से अधिक डीएपी का भंडार मौजूद है। उन्होंने बताया कि राज्य में 1,029 थोक विक्रेता और 12,093 खुदरा विक्रेता सक्रिय हैं तथा विभिन्न उर्वरक कंपनियों द्वारा आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है।
सरकार द्वारा उर्वरक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डीलर प्वाइंट्स की जांच भी की जा रही है, जिसके तहत छह लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार के उर्वरक विभाग द्वारा एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली लागू की गई है, जिसके माध्यम से प्रत्येक जिले में उर्वरकों की दैनिक आवश्यकता और वितरण की निगरानी की जा रही है।
मुख्यमंत्री माझी ने जिलाधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि कालाबाजारी और अवैध भंडारण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। गोदामों की नियमित जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उनके लाइसेंस रद्द किए जाएं। सीमावर्ती क्षेत्रों में उर्वरक तस्करी रोकने के लिए पुलिस और कृषि विभाग संयुक्त रूप से निगरानी बढ़ाएं तथा संदिग्ध वाहनों की जांच अनिवार्य रूप से की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सब्सिडी वाले यूरिया का औद्योगिक उपयोग में दुरुपयोग रोकने के लिए जिला स्तरीय टास्क फोर्स सक्रिय रूप से कार्य करे।

बैठक में पंचायत स्तर पर उर्वरक उपलब्धता और वितरण की निगरानी के लिए समितियों के गठन पर भी जोर दिया गया। राज्य की 6,694 ग्राम पंचायतों में से अब तक 6,229 में समितियां गठित की जा चुकी हैं और शेष पंचायतों में भी जल्द समितियां बनाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही किसानों का डिजिटल पंजीकरण मिशन मोड में पूरा करने के निर्देश देते हुए बताया गया कि राज्य के 44 लाख किसानों में से अब तक 15 लाख किसानों की डिजिटल फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है।
उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री कनक वर्धन सिंह देव ने कहा कि केंद्र सरकार समय-समय पर उर्वरकों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर रही है और उनका कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। वहीं सहकारिता मंत्री प्रदीप बाल समंत ने उर्वरक वितरण व्यवस्था को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने पर जोर दिया।
बैठक में मुख्य सचिव अनु गर्ग, सहकारिता विभाग के आयुक्त सह सचिव राजेश प्रभाकर पाटील तथा कृषि एवं सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रदीप मिश्रा
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