जहां कभी गूंजता था लाल आतंक वहां सजी बाल चौपाल
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कांकेर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
दूरस्थ दुर्गकोंदल में बाल चौपाल के माध्यम से बच्चों से संवाद कर जानी गई उनकी समस्याएं, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता
छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की पहचान अब तेजी से बदलती नजर आ रही है। एक समय था जब इस क्षेत्र में भय और असुरक्षा का वातावरण बना रहता था और लोगों के जीवन पर नक्सली आतंक की छाया मंडराती थी, लेकिन आज उसी धरती पर बच्चों की हंसी और उम्मीदों की आवाज सुनाई दे रही है। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के दुर्गकोंडल क्षेत्र में आयोजित बाल चौपाल इस बदलाव की एक जीवंत तस्वीर बनकर सामने आई है। यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि उस सकारात्मक सोच और प्रयासों का प्रतीक है जिसके माध्यम से दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा के कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर इस विशेष बाल चौपाल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े तथा हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्षा शालिनी राजपूत भी शामिल हुईं। इस दौरान बच्चों और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं, जरूरतों और आकांक्षाओं को समझने का प्रयास किया गया। यह पहल इस बात को दर्शाती है कि शासन अब केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है बल्कि जमीनी स्तर पर पहुंचकर लोगों की समस्याओं को समझते हुए उनका समाधान निकालने की दिशा में काम कर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को उनके अधिकारों, सुरक्षा और आत्मरक्षा के बारे में जागरूक किया गया। बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श जैसे संवेदनशील विषय को बेहद सहज और सरल तरीके से समझाया गया। बच्चों ने भी गंभीरता के साथ इस विषय को समझते हुए अपनी जागरूकता का परिचय दिया। यह इस बात का संकेत है कि अब बस्तर के बच्चे भी अपने अधिकारों और सुरक्षा को लेकर पहले से अधिक सजग हो रहे हैं जो क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है।

बाल चौपाल में खेल और गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को नैतिक शिक्षा से भी जोड़ा गया। इस दौरान अनुशासन, ईमानदारी, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को रोचक तरीके से समझाया गया जिससे बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। साथ ही बच्चों को बाल सहायता सेवा के बारे में जानकारी दी गई और बताया गया कि किसी भी समस्या की स्थिति में वे सहायता कैसे प्राप्त कर सकते हैं। कई बच्चों ने यह भी बताया कि उन्होंने पहले इस सेवा का उपयोग किया है जिससे यह स्पष्ट हुआ कि जागरूकता अभियान अब असर दिखाने लगे हैं।

इस दौरान दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों के सामने डिजिटल सुविधाओं की कमी की समस्या भी सामने आई। कई बच्चों ने बताया कि उन्हें आधुनिक शिक्षा से जुड़ने के लिए आवश्यक साधन उपलब्ध नहीं हैं। इस विषय को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जिला शिक्षा विभाग से समन्वय कर आगामी शैक्षणिक सत्र से बच्चों को आधुनिक शिक्षण सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चे भी बेहतर शिक्षा से जुड़ सकें।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि दुर्गकोंडल में आयोजित यह बाल चौपाल बदलते बस्तर की नई कहानी है। जब शासन, प्रशासन और समाज मिलकर काम करते हैं तो सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सकारात्मक परिवर्तन संभव हो जाता है। आज बस्तर में बच्चों की मुस्कान और उनके सपनों की चमक इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र अब भय से निकलकर शिक्षा, विकास और खुशहाली की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

बाल चौपाल के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, बाल आयोग अध्यक्षा डॉ. वर्णिका शर्मा और हस्तशिल्प विकास बोर्ड अध्यक्षा शालिनी राजपूत ने मुख्यधारा में लौटे पूर्व नक्सल प्रभावित लोगों के पुनर्वास केंद्र का भी दौरा किया। उन्होंने वहां रह रहे लोगों और उनके परिवारों से संवाद कर उनकी समस्याओं को जाना और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें। इस पहल का उद्देश्य उन्हें मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा प्रदान करना है।
प्रदीप मिश्रा
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